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मेरठ के नगर निगम अफसरों पर एफआईआर की तलवार

Wed, 09 Sep 2015 01:45 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ Updated Wed, 09 Sep 2015 01:45 AM IST
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nagar nigam meerut

मलिन बस्तियों में घटिया सामग्री से सड़क और नाली निर्माण कराने के मामले में तत्कालीन नगरायुक्त और डूडा के कई अफसरों पर रिपोर्ट दर्ज होगी। आरोप यह भी हैं कि इन अफसरों ने मलिन बस्तियों की बजाय दूसरी कॉलोनियों में कार्य कराए। एसीएम की जांच रिपोर्ट पर शासन ने नगरायुक्त और परियोजना निदेशक डूडा को एफआईआर दर्ज कराने और आरोप पत्र बनाने के आदेश दिए हैं।

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यह था मामला
वर्ष 2013-14 में डूडा ने शहर की मलिन बस्तियों में 96 रास्तों पर टाइल्स और नालियां बनाने का प्रस्ताव तैयार किया था। इसके लिए निर्माण सामग्री सप्लाई के लिए टेंडर छोड़े गए थे। उस समय 26 कार्य पूर्ण हो गए थे। जिनमें से 23 कार्यों की फाइल पर डूडा ने निर्माण सामग्री का 30 प्रतिशत पेमेंट भी कर दिया था। इसके अलावा अन्य 73 मार्गों पर निर्माण कार्य चलता रहा। जिसकी अपर नगर मजिस्ट्रेट रामभरत तिवारी और एक अन्य अधिकारी ने जांच की थी।
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डीएम ने फिर कराई जांच
दोनों प्रशासनिक अफसरों की जांच रिपोर्ट से डीएम पंकज यादव संतुष्ट नहीं हुए। उन्होंने अपर नगर मजिस्ट्रेट दीपाली कौशिक से दोबारा जांच कराई। उन्होंने अपनी जांच रिपोर्ट में घटिया निर्माण सामग्री इस्तेमाल किए जाने का उल्लेख किया। जिस पर शासन ने तत्कालीन नगरायुक्त अब्दुल समद, पीओ डूडा सरस्वती सिंह, आरके कौशिक, एई किरनपाल, अशोक कुमार, शिवकुमार और डूडा के समस्त 34 फर्मों के मालिक, जिन्होंने निर्माण सामग्री सप्लाई की, उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के आदेश जारी कर दिए।
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एक सप्ताह पहले आए आदेश
शासन का आदेश आए एक सप्ताह से अधिक समय बीत गया है, लेकिन अभी तक एफआईआर दर्ज नहीं कराई गई है। बताया गया कि आदेशों को परियोजना निदेशक दबाए बैठे हैं। उधर,जांच रिपोर्ट में आरोपी बनाए गए अधिकारी और निर्माण सामग्री सप्लायरों के होश उड़े हैं। सूत्र बताते हैं कि डूडा के अधिकारी न्यायालय का दरवाजा खटखटाने तो सप्लायर आंदोलन की तैयारी में हैं। मंगलवार को इस्लाम मलिक एडवोकेट के नेतृत्व में निर्माण सामग्री सप्लायर डूडा के परियोजना अधिकारी आरपी सिंह से मिले। स्वयं को निर्दोष बताते हुए भुगतान की मांग की। चेतावनी दी कि अगर एफआईआर दर्ज की गई तो आंदोलन होगा।


आरोप से हम बहुत आहत
सेवानिवृत्त पीओ डूडा सरस्वती सिंह का कहना है कि हमने पार्षदों के प्रस्तावों पर मलिन बस्तियों में रास्ते बनवाने का प्रोजेक्ट तैयार किया था। काम भी सभी मलिन बस्तियों में हुआ है। किस नजरिए से जांच कराई गई है, हम नहीं जानते। लेकिन यह सत्य है कि किसी भी कार्य का न तो भुगतान हो पाया है और न ही कार्य गलत स्थान पर किए गए हैं। हमें नोटिस प्राप्त हुआ है। हमने डूडा से उस समय का रिकॉर्ड मांगा है, जिसका हम शासन को जवाब दे रहे हैं। रिटायर होने के बाद हम पर जो आरोप लगाए जा रहे हैं, उससे हम बेहद आहत हैं।  

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