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पुलिस कमिश्नरेट में सुनवाई के ज्यादा अवसर, सुधरेंगी यातायात व्यवस्था
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मेरठ। पुलिस कमिश्नरेट से आम जनता को ज्यादा लाभ मिलेगा। सुनवाई के लिए अफसरों की संख्या बढ़ने से समस्या का समाधान जल्द हो सकते हैं। यातायात व्यवस्था सुधरेगी और साइबर अपराध के प्रति जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को राहत मिल सकती हैं। लखनऊ, नोएडा, कानपुर, गाजियाबाद के बाद मेरठ में भी पुलिस कमिश्नरेट बनाने की प्रक्रिया पर तेजी से काम कराया जा रहा है।
अपराधी पुलिस को खुली चुनौतियां दे रहे हैं। अप्रैल महीने में ही हस्तिनापुर थानाक्षेत्र में परमजीत हत्याकांड, जानी थानाक्षेत्र के पांचली खुर्द में हिस्ट्रीशीटर 25 हजारी रिंकू गुर्जर हत्याकांड और सिवास खास में किशोरीलाल हत्याकांड सहित कई वारदातों में पुलिस पर सवाल उठे हैं। उक्त तीनों हत्याकांड में मरने वाले युवक हत्या के मामले में ही जेल से जमानत पर बाहर आए थे। पुलिस ने उनकी मॉनीटरिंग नहीं की और उनके विरोधियों ने सरेआम हत्याकांड की वारदात को अंजाम दिया। पुलिस कमिश्नरेट में जेल में जमानत पर बाहर आए या फिर जेल में शातिर अपराधियों की गतिविधियों पर निगरानी ज्यादा होती है। शहर में यातायात व्यवस्था पूरी तरफ से चौपट हैं। दो साल से दिल्ली रोड पर रैपिड रेल प्रोजेक्ट चल रहा हैं, दिनभर लोगों को जाम से जूझना पड़ता है।
पुलिस की संख्या कम बताकर जाम तक खुलवाने का प्रयास नहीं होता है। पुलिस कमिश्नरेट होने से यह समस्या सुधर सकती है। कमिश्नरेट से पुलिस संख्या बढ़ जाएगी। जिले में कमिश्नरेट प्रणाली लागू से पुलिसिंग बेहतर हो जाती है। आमजन को अधिकारियों से मिलना आसान हो जाता है। अधिकारियों व पुलिस फोर्स की संख्या बढ़ने से कानून व्यवस्था पर ज्यादा काम होगा। ग्रामीण क्षेत्रों में हत्या और चोरी की घटनाएं अधिक हो रही हैं। इन पर पुलिस ने शिकंजा कसने का प्रयास तो किया है, लेकिन ज्यादा असर नहीं पड़ा। नई व्यवस्था से ज्यादा राहत मिल सकती है।
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कमिश्नरेट से मिलेगी पुलिस को ताकत
लखनऊ, नोएडा, वाराणसी, कानपुर, आगरा, प्रयागराज, गाजियाबाद में पुलिस कमिश्नरेट लागू होने से पुलिस को ताकत मिली है। इसको देखते हुए अगले चरण में मेरठ और गोरखपुर में भी कमिश्नरेट लागू करने की तैयारी चल रही है। मेरठ में यह व्यवस्था लागू होने पर जाम से छुटकारा मिलेगा और ट्रैफिक व्यवस्था बेहतर हो जाएगी। बताया गया कि जिन जनपदों में कमिश्नरेट व्यवस्था है, वहां पर कानून व्यवस्था बेहतर हुई है। अपराध का ग्राफ भी घटा है।
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मेरठ में अपराध की घटना देशभर में गूंजती है। सौरभ हत्याकांड में पत्नी मुस्कान और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला ने चौंकाने वाला खुलासा किया। सोशल मीडिया पर कई पोस्ट वायरल हुई, जिसका समाज में बुरा असर पड़ा। कमिश्नरेट से सोशल मीडिया पर शिकंजा कस जाएगा। आर्म्स एक्ट और गुंडा एक्ट जैसी कार्रवाई पुलिस सीधी कर सकती है। - सुनील त्यागी, सेवानिवृत डिप्टी एसपी
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साइबर अपराध का ग्राफ लगातार बढ़ता जा रहा हैं। पुलिस कमिश्नरेट होने से साइबर अपराध पर शिकंजा कसा जा सकता हैं। दूरदराज जनपद से आकर बदमाश अपराध की घटना करने पर भी पुलिस कमिश्नरेट होने से लगाम कसी जाएगी। अपराधियों की जनपद में मॉनीटरिंग होने लगेगी। - विनोद सिरोही, सेवानिवृत डिप्टी एसपी
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अपराधी पुलिस को खुली चुनौतियां दे रहे हैं। अप्रैल महीने में ही हस्तिनापुर थानाक्षेत्र में परमजीत हत्याकांड, जानी थानाक्षेत्र के पांचली खुर्द में हिस्ट्रीशीटर 25 हजारी रिंकू गुर्जर हत्याकांड और सिवास खास में किशोरीलाल हत्याकांड सहित कई वारदातों में पुलिस पर सवाल उठे हैं। उक्त तीनों हत्याकांड में मरने वाले युवक हत्या के मामले में ही जेल से जमानत पर बाहर आए थे। पुलिस ने उनकी मॉनीटरिंग नहीं की और उनके विरोधियों ने सरेआम हत्याकांड की वारदात को अंजाम दिया। पुलिस कमिश्नरेट में जेल में जमानत पर बाहर आए या फिर जेल में शातिर अपराधियों की गतिविधियों पर निगरानी ज्यादा होती है। शहर में यातायात व्यवस्था पूरी तरफ से चौपट हैं। दो साल से दिल्ली रोड पर रैपिड रेल प्रोजेक्ट चल रहा हैं, दिनभर लोगों को जाम से जूझना पड़ता है।
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पुलिस की संख्या कम बताकर जाम तक खुलवाने का प्रयास नहीं होता है। पुलिस कमिश्नरेट होने से यह समस्या सुधर सकती है। कमिश्नरेट से पुलिस संख्या बढ़ जाएगी। जिले में कमिश्नरेट प्रणाली लागू से पुलिसिंग बेहतर हो जाती है। आमजन को अधिकारियों से मिलना आसान हो जाता है। अधिकारियों व पुलिस फोर्स की संख्या बढ़ने से कानून व्यवस्था पर ज्यादा काम होगा। ग्रामीण क्षेत्रों में हत्या और चोरी की घटनाएं अधिक हो रही हैं। इन पर पुलिस ने शिकंजा कसने का प्रयास तो किया है, लेकिन ज्यादा असर नहीं पड़ा। नई व्यवस्था से ज्यादा राहत मिल सकती है।
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कमिश्नरेट से मिलेगी पुलिस को ताकत
लखनऊ, नोएडा, वाराणसी, कानपुर, आगरा, प्रयागराज, गाजियाबाद में पुलिस कमिश्नरेट लागू होने से पुलिस को ताकत मिली है। इसको देखते हुए अगले चरण में मेरठ और गोरखपुर में भी कमिश्नरेट लागू करने की तैयारी चल रही है। मेरठ में यह व्यवस्था लागू होने पर जाम से छुटकारा मिलेगा और ट्रैफिक व्यवस्था बेहतर हो जाएगी। बताया गया कि जिन जनपदों में कमिश्नरेट व्यवस्था है, वहां पर कानून व्यवस्था बेहतर हुई है। अपराध का ग्राफ भी घटा है।
मेरठ में अपराध की घटना देशभर में गूंजती है। सौरभ हत्याकांड में पत्नी मुस्कान और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला ने चौंकाने वाला खुलासा किया। सोशल मीडिया पर कई पोस्ट वायरल हुई, जिसका समाज में बुरा असर पड़ा। कमिश्नरेट से सोशल मीडिया पर शिकंजा कस जाएगा। आर्म्स एक्ट और गुंडा एक्ट जैसी कार्रवाई पुलिस सीधी कर सकती है। - सुनील त्यागी, सेवानिवृत डिप्टी एसपी
साइबर अपराध का ग्राफ लगातार बढ़ता जा रहा हैं। पुलिस कमिश्नरेट होने से साइबर अपराध पर शिकंजा कसा जा सकता हैं। दूरदराज जनपद से आकर बदमाश अपराध की घटना करने पर भी पुलिस कमिश्नरेट होने से लगाम कसी जाएगी। अपराधियों की जनपद में मॉनीटरिंग होने लगेगी। - विनोद सिरोही, सेवानिवृत डिप्टी एसपी