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मीट फैक्ट्रियों की वजह से जहरीला हो रहा शहर का पानी, 25 गांवों के लोग परेशान

Thu, 31 Jan 2019 02:55 PM IST
दुष्यंत शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Thu, 31 Jan 2019 02:55 PM IST
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Meerut, The city's water is becoming poisonous because of meat factories
दूषित पानी भरने से बने तालाब में पड़ा फैक्टरियों से निकला कचरा - फोटो : अमर उजाला

मेरठ में हापुड़ रोड पर गांव अलीपुर के आसपास चल रही मीट फैक्ट्रियां पानी को तो जहरीला बना ही रही हैं, साथ ही वातावरण को भी दूषित कर रही हैं। ज्यादातर फैक्ट्रियों के अवशेषों को आसपास ही या फिर दूषित पानी के तालाबों में फेंका जा रहा है। इन अवशेषों के कारण बुरी तरह दुर्गंध फैली हुई है।

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हापुड़ रोड पर बनी मीट फैक्ट्रियों के आसपास के 25 गांवों में एक साल में करीब 400 मौतें हो चुकी हैं। वहीं मीट फैक्ट्री संचालकों का दावा है कि वे ईटीपी का पूरा इस्तेमाल कर रहे हैं और इससे निकलने वाले पानी को सिंचाई के काम में ला रहे हैं। लेकिन मीट फैक्ट्रियों के पास बने तालाब इस बात को झुठला रहे हैं। बोरों में भरकर अवशेषों को बाहर फेंका जा रहा है। अमर उजाला में मामला प्रकाशित होने के बाद बुधवार को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम ने अलीपुर क्षेत्र में छापेमारी की। गुपचुप तरीके से जांच की और कागजात चेक किए। सैंपलिंग की बात भी सामने आ रही है।

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नहीं पेयजल के उचित साधन
हापुड़ रोड के आसपास भूजल दूषित होने के कारण जल निगम ने कई गांवों में गहरी बोरिंग कर टंकी के माध्यम से पेयजल की व्यवस्था कराई है। कई गांवों में अभी तक ग्रामीण सरकारी नलों, निजी हैंडपंपों या सबमर्सिबल का पानी पी रहे हैं। क्योंकि सभी गांवों में टंकियां नहीं हैं।

हालात को बताया सामान्य         
प्रदूषण विभाग का कहना है कि इस क्षेत्र में दो तरह के प्लांट हैं। पहला जिसमें मीट प्रोसेसिंग का काम होता है, दूसरा जिसमें पशुओं के अवशेषों से मुर्गी दाना बनाया जाता है। चल रहे सभी स्लाटर हाउसों में ईटीपी लगा है। मुर्गी दाना प्लांट में पानी का प्रयोग नहीं होता। सभी ठीक काम कर रहे हैं।

गंभीर है मामला
मामला गंभीर है। मैंने स्वास्थ्य विभाग को जांच सौंपी है कि आखिर ये मौतें क्यों हो रही है। रिपोर्ट आने पर आगे का एक्शन लिया जाएगा। - अनिल ढींगरा, डीएम

बढ़ रही संख्या
खरखौदा कस्बे में बीमारी से मरने वालों की संख्या बढ़ रही है। कारण मीट फैक्ट्रियों से निकलने वाला दूषित जल ही है। - रमेश चंद ठेकेदार, चेयरमैन, नगर पंचायत खरखौदा

नमूने लिए थे
हाल ही में प्रदूषण विभाग ने मौतों का कारण पता लगाने के लिए कई गांवों में भूजल के नमूने लिए थे। कुछ नमूनों में आयरन की मात्रा ज्यादा मिली थी। - डा. योगेंद्र, सहायक वैज्ञानिक, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड मेरठ

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