मुंगेर का शाहदुल्ला 90 हजार की तनख्वाह देकर तैयार करा रहा मौत का सामान, पढ़ें ये खास रिपोर्ट
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पश्चिमी यूपी के जिलों में मुंगेर के शाहदुल्ला का बड़ा नेटवर्क है। वह मोटी रकम लेकर हथियार सप्लायरों को मुंगेर के कारीगर उपलब्ध कराता है। मेरठ के 12 समेत 81 सप्लायर उसके संपर्क में हैं। ये सप्लायर खराद मशीन लगाने की आड़ में पिस्टल बनाने की फैक्ट्री चलाते हैं। मुठभेड़ में पकड़े गए सवा लाख के इनामी फुरकान, समीर उर्फ मेंढक ने पूछताछ में शाहदुल्ला का नाम बताया है। ऐसे में शाहदुल्ला की तलाश में दिल्ली पुलिस की स्पेशल टीम और मेरठ क्राइम ब्रांच लग गई है। समीर और फुरकान के यहां पर दो साल से मुंगेर के कारीगर पिस्टल बना रहे थे।
पांच हजार में तैयार होती है एक पिस्टल
मुंगेर का कारीगर एक महीने की सैलरी 90 हजार रुपये लेता है। ऐसे में उसको रोज एक पिस्टल तैयार कर देनी होती है। करीब दो हजार रुपये का सामान पिस्टल को तैयार करने में लगता है। पांच हजार रुपये में पिस्टल तैयार होती है। हथियार सप्लायर इन पिस्टलों को 20 से 25 हजार रुपये में बेचते हैं। सप्लायरों का नेटवर्क देहात इलाके में सबसे ज्यादा बताया गया। परतापुर में समीर से चार पिस्टल बरामद की गई थीं।
खराद की आड़ में बना रहे पिस्टल
पुलिस के मुताबिक पूछताछ में फुरकान और समीर उर्फ मेंढक ने बताया कि पिस्टल बनाने में खराद का काम सबसे ज्यादा होता है। खराद की आड़ में पिस्टल तैयार की जाती है। इसकी जानकारी लोकल थाने की पुलिस को लग जाती है तो सप्लायर उनको पैसा देने लगता है। दो महीने पहले पकड़े गए मुंगेर के कारीगरों ने मेरठ पुलिस की पोल खोली थी।
नेटवर्क की जानकारी जुटाई जा रही
मुंगेर के कारीगरों को शाहदुल्ला भेजता है। उसके नेटवर्क की जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस हथियार सप्लायरों की तलाश में लगी है। उनका यह गोरखधंधा पुलिस बंद करेगी। मुठभेड़ में पकड़े दोनों सप्लायरों को रिमांड पर लेकर पूछताछ होगी। -अखिलेश कुमार, एसएसपी
शाहदुल्ला का नेटवर्क नहीं टूटा
शाहदुल्ला के नेटवर्क का खुलासा पुलिस की जांच में हुआ है। इसके बावजूद उसका नेटवर्क तोड़ने में पुलिस फेल साबित हुई है। मुजफ्फरनगर, सहारनपुर व मेरठ में शाहदुल्ला का बड़ा नेटवर्क बताया गया है। एएसपी कैंट सतपाल सिंह ने शाहदुल्ला की जानकारी मुंगेर से मंगाई है। उसका आपराधिक रिकार्ड भी बड़ा बताया गया है।
लिसाड़ीगेट में 10-12 फैक्ट्री
हथियार सप्लायर फुरकान और समीर ने बताया कि लिसाड़ीगेट में 10-12 फैक्ट्रियां अवैध पिस्टल तैयार कर रही हैं। यहां पर मुंगेर के कारीगर काम करते हैं। कारीगर फैक्ट्री से नहीं निकलते। महीने में एक बार अपने घर जाते हैं। आसपास के इलाके में रहने वालों से वास्ता नहीं रखते। इस वजह से लोगों को उनके काम की जानकारी भी नहीं होती।
एनआईए टीम पर किया हमला
17 अक्टूबर 2017 में चंडीगढ़ में आरआरएस नेता रवींद्र गोसाई की हत्या हुई थी। इसमें मुंगेर की पिस्टल प्रयोग हुई थी। एनआईए की टीम ने पुलिस फोर्स लेकर सप्लायर मलूक निवासी गाजियाबाद, मेरठ के फकरू व शेरू की तलाश में दबिश दी थी। 11 दिसंबर को गाजियाबाद के भोजपुर में हथियार सप्लायरों ने एनआईए और पुलिस पर हमला किया था। इसमें मेरठ क्राइम ब्रांच के सिपाही तहजीब को पैर में गोली भी लगी थी।
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