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Meerut: 47 लाख की राजस्व चोरी, दो टोल कंपनियों पर केस, भूनी टोल प्लाजा की भी जांच शुरू

Sun, 07 Sep 2025 01:22 PM IST
मोहम्मद मुस्तकीम अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ
अमर उजाला नेटवर्क, मेरठ Published by: मोहम्मद मुस्तकीम Updated Sun, 07 Sep 2025 01:22 PM IST
सार

एआईजी स्टांप की जांच में सामने आया कि इन टोल का अनुबंध केवल सौ रुपये के स्टांप पेपर पर कर लिया गया। जबकि नियमानुसान चार प्रतिशत स्टांप ड्यूटी देय होती है। इसी कारण यह कार्रवाई की गई है। 

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Meerut: Revenue theft of Rs 47 lakh, case against two toll companies, investigation into Bhuni toll plaza also
भूनी टोल प्लाजा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जनपद में स्टांप ड्यूटी चोरी करने वालों पर रजिस्ट्री विभाग ने कार्रवाई शुरू कर दी है। करोड़ों रुपये के अनुबंध महज 100 रुपये के स्टांप पर कर राजस्व को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। पौड़ी मार्ग स्थित भैंसा गांव और बिजनौर-किरतपुर-नजीबाबाद मार्ग स्थित बनेड़ा गांव में टोल प्लाजा का एनएचएआई-मैसर्स रेनू कंपनी के बीच 11.80 करोड़ रुपये का अनुबंध हुआ। इसमें सिर्फ 100-100 रुपये के दो स्टांप लगे हैं। नियमानुसार इन पर चार प्रतिशत स्टांप ड्यूटी देनी अनिवार्य थी, जिससे करीब 47 लाख रुपये राजस्व मिलना चाहिए था। इसको देखते रजिस्ट्री विभाग ने मैसर्स रेनू कंपनी के खिलाफ कोर्ट में मुकदमा दर्ज कराया गया है।
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एआईजी स्टांप नवीन कुमार एस ने बताया कि दोनों टोल प्लाजा का अनुबंध के तौर पर एनएचएआई ने 10.95 करोड़ रुपये और 90 लाख रुपये सिक्योरिटी राशि के रूप में उक्त कंपनी से जमा कराया हैं। इतनी बड़ी धनराशि के बावजूद महज सौ-सौ रुपये के स्टांप पर अनुबंध करना राजस्व चोरी में आता है। विभाग ने कई बार कंपनी को नोटिस जारी किए, मगर संतोषजनक जवाब नहीं मिला। 
 
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इसके बाद शनिवार को दोनों टोल प्लाजा संचालित करने वाली कंपनी के खिलाफ वाद दायर कर दिया गया है। एआईजी स्टांप का कहना है कि अनुबंध में चार प्रतिशत स्टांप ड्यूटी लगाना कानूनी तौर पर जरूरी है। इससे बचना राजस्व चोरी माना जाएगा। विभाग ने चेतावनी दी है कि भविष्य में भी जिस विभाग या कंपनी ने अनुबंध पर चार प्रतिशत स्टांप ड्यूटी नहीं लगाई होगी, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। 
 
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इसी क्रम में सरधना मार्ग स्थित भूनी टोल प्लाजा से भी अनुबंध की जानकारी मांगी गई है। विभाग अब अन्य टोल प्लाजा के अनुबंधों की भी जांच करने की तैयारी में है, ताकि यह पता चल सके कि कहीं और भी इसी तरह से सरकारी खजाने को चूना तो नहीं लगाया गया है।
 
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