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बारिश बनी आफत: मेरठ पुलिस लाइन में जर्जर क्वार्टर की छत गिरी, आठ लोग दबे-तीन बच्चे भी घायल

Mon, 01 Sep 2025 10:23 AM IST
डिंपल सिरोही न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: डिंपल सिरोही Updated Mon, 01 Sep 2025 10:23 AM IST
सार

मेरठ पुलिस लाइन के पी-ब्लॉक में रविवार शाम जर्जर सरकारी क्वार्टर की छत गिरने से परिवार के आठ सदस्य दब गए। दमकल विभाग ने रेस्क्यू कर सभी को अस्पताल में भर्ती कराया। घायलों में तीन बच्चे भी शामिल हैं।

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Meerut Police Line Quarters Roof Collapse: 8 Family Members Trapped, 3 Children Injured
मेरठ में मकान गिरा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मेरठ पुलिस लाइन के पी-ब्लॉक में रविवार देर शाम चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी टेलर (दर्जी) ओमकार के जर्जर सरकारी क्वार्टर की छत भरभरा कर गिर गई। मलबे में तीन बच्चों समेत परिवार के आठ सदस्य दब गए। दमकल विभाग ने रेस्क्यू कर ओमकार सिंह (55) उनकी पत्नी सुमन (50) बड़े बेटे विशाल (35), विशाल की पत्नी पिंकी (32), छोटे बेटे आकाश (30) और तीन बच्चे आशु, नित्या व लड्डू को मलबे से निकालकर जसवंत राय अस्पताल भर्ती कराया। 
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दिव्यांग ओमकार को गंभीर अवस्था में आईसीयू में भर्ती कराया गया है। सुमन और आकाश का भी इलाज चल रहा है। अन्य परिजनों को प्राथमिक उपचार के बाद घर भेज दिया गया।
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एडीजी भानु भास्कर, डीआईजी कलानिधि नैथानी, एसएसपी डॉ विपिन ताडा समेत तमाम अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर हादसे की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवार को दूसरा क्वार्टर दिलवाया जाएगा। वहीं, पीड़ित परिवार को आरोप है कि कई बार आरआई को जर्जर मकान के बारे में बताकर दूसरा क्वार्टर देने के लिए प्रार्थना पत्र दिया, मगर कोई सुनवाई नहीं हुई।
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हादसा रविवार देर शाम करीब 7:30 बजे हुआ। पैरों से दिव्यांग ओमकार पुलिस विभाग में चतुर्थश्रेणी कर्मचारी के पद पर कार्यरत हैं। वे पुलिसकर्मियों के कपड़े सिलाई करते हैं। उन्हें पुलिस लाइन के पी- ब्लॉक में क्वार्टर आवंटित है। वह करीब डेढ़ दशक से परिवार साथ इस क्वार्टर में रह रहे हैं।

भवन पुराना होने के कारण जर्जर अवस्था में है। रविवार शाम को ओमकार अपने परिवार के साथ क्वार्टर में थे। परिजन खाना बनाने की तैयारी में लगे थे। तभी अचानक क्वार्टर की छत भरभराकर गिर गई। परिवार के सभी आठ सदस्य मलबे में दब गए। परिजनों की चीख-पुकार और मकान गिरने की आवाज सुनकर आसपास में रहने वाले कर्मचारियों के परिवार घरों से बाहर निकलकर आए। 

सिविल लाइन और फायर ब्रिगेड की छह गड़ियां मौके पर पहुंचीं और रेस्क्यू कर मलबे में दबे सभी परिजनों को बाहर निकालकर पास ही स्थित जसवंत राय अस्पताल में ले जाकर भर्ती कराया। एसएसपी ने मौके पर पहुंचकर घायलों का हाल जाना। 

कुछ देर बाद एडीजी और डीजाईजी ने भी घटनास्थल पर पहुंच गए। उन्होंने हादसाग्रस्त क्वार्टर और उसके आसपास के क्वार्टरों की भी अंदर से स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने तुरंत पीड़ित परिवार को दूसरे क्वार्टर में शिफ्ट कराने के निर्देश दिए।

दिन रात करते लोगों की सुरक्षा घर में सताता है हादसे का डर
मेरठ पुलिस लाइन में कई क्वार्टर काफी जर्जर हालत में हैं। इनमें दिन रात लोगों की सुरक्षा में जुटे रहने वाले बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी और उनके परिवार जान जोखिम में डालकर रह रहे हैं। हादसे के बाद इन जर्जर क्वार्टरों में रह रहे लोगों ने खुलकर पीड़ा बयां की। उन्होंने बताया कि करीब 15 वर्ष पहले जर्जर क्वार्टरों की मरम्मत हुई थी। इसके बाद कई बार मरम्मत के लिए अधिकारियों को प्रार्थना पत्र दिए गए लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। 

ओमकार के पड़ोस में रहने वाली सुमित्रा सिंह ने बताया कि सभी क्वार्टरों की हालत काफी खराब है। यहां रहते हुए डर लगता है। बारिश में छत टपकती है और घरों में पानी भर जाता है। पानी की निकासी की कोई व्यवस्था यहां नहीं है। क्वार्टरों के पीछे जो नालियां हैं, उनकी करीब दो वर्ष से सफाई नहीं हुई है। इससे बीमारी फैलने की भी आशंका रहती है।

ऊषा ने बताया कि बारिश में हालत काफी ज्यादा खराब हो जाती है। छतों से पानी टपकने से दीवारों में भी सीलन आ गई है। छत पर पॉलिथीन डालकर पानी रोकने की कोशिश करते हैं लेकिन फिर भी पानी घरों में भर जाता है।

तीन-चार बार वह मरम्मत के लिए प्रार्थना पत्र दे चुके हैं लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है। जून माह में सर्वे हुआ था। तब बताया गया था कि जल्द ही मरम्मत होगी। उसके बाद क्या हुआ पता नहीं है। यहां कभी भी कोई और बड़ा हादसा होने की आशंका बनी रहती है। 

जान जोखिम में डालकर रह रहे पुलिसकर्मियों के परिवारों ने बयां की पीड़ा 
पुलिस लाइन ही नहीं जिले के कई थानों में भी पुलिसकर्मियों के क्वार्टर की स्थिति काफी जर्जर है। यहां भी कई वर्षों से मरम्मत नहीं हुई। यहां भी हादसे की आशंका बनी रहती है। कुछ थानों में नए क्वार्टरों का निर्माण हुआ है। कुछ थानों के क्वार्टरों में दूसरे जिलों में तबादले होने के बाद भी पुलिसकर्मी या उनके परिवार रह रहे हैं।

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