स्ट्रीट फूड हो या फिर ढाबे या रेस्टॉरेंट में मिलने वाले स्नैक्स, सभी के साथ टमेटो सॉस की डिमांड होती है। चाऊमीन, पेटीज और अन्य फास्ट फूड के साथ जिस टमेटो सॉस को हम खा रहे हैं, वह कितना जहरीला है यह आप शायद ही जानते हों। अमर उजाला की टीम ने यूपी के मेरठ जिले में इसकी जांच पड़ताल की तो चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई जिसे जानकर आप खुद ठेलों, दुकानों और रेस्टॉरेंट में मिलने वाली टमेटो सॉस से तौबा कर लेंगे: -
तस्वीरें देखकर टमेटो सॉस से कर लेंगे तौबा, खतरनाक केमिकल व सड़ी सब्जियां, गंदगी में हो रहा तैयार
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अमर उजाला की टीम लिसाड़ी गेट के हुमायूं नगर स्थित एक मकान में पहुंची। मकान बाहर से बंद था। इस मकान के आसपास बदबू फैली थी। टीम ने किसी तरह गेट खुलवाया गया तो अंदर का नजारा चौंकाने वाला था। बड़े-बड़े प्लास्टिक के कंटेनरों में सड़ी हुई सब्जियां रखीं थीं। एक तरफ बड़े बर्तनों में टमेटो सॉस तैयार किया जा रहा था। इसके साथ ही यहां गंदगी बहुत ज्यादा थी।
टीम ने वहां काम कर रहे लोगों से जानकारी ली तो बताया गया कि प्रतिदिन 300 से 400 लीटर सॉस बनाई जाती है और शहर के हर हिस्से में सप्लाई की जाती है। यह सॉस 10 से 12 दिन में सड़ जाती है। इसीलिए सॉस बनाकर जल्दी से सप्लाई कर दी जाती है।
इस नकली सॉस बनाने के लिए प्रिजरवेटिव एसिटिक एसिड, सोडियम बेनजोएट, अरारोट आदि का प्रयोग होता है। साथ ही कुछ अन्य केमिकल भी डाले जाते हैं। इसके अलावा नॉन परमिट कलर भी प्रयोग किए जाते हैं जो कपड़े रंगने और ड्राइक्लीन में प्रयोग किए जाते हैं।
कर्मचारियों ने बताया कि पहले सब्जियों को सड़ा गलाकर पीसा जाता है फिर उसमें लाल रंग मिलाया जाता है। अगर ग्रीन चिली सॉस बनाती है तो उसमें हरा रंग मिला दिया जाता है। इसे उबालकर ठंडा किया जाता है और फिर पैकिंग कर बाजार में बेचने के लिए भेज दिया जाता है।