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विवादित पोस्टर मामला: पॉपुलर फ्रंट के पांच पदाधिकारी हिरासत में, एलआईयू-आईबी ने की पूछताछ

Wed, 24 Jul 2019 01:47 AM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Wed, 24 Jul 2019 01:47 AM IST
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Meerut disputed poster case: IB has inquired after five officials of the Popular Front were detained
प्रेस वार्ता करते संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया के पदाधिकारी - फोटो : अमर उजाला

मेरठ में विवादित पोस्टर लगाने को लेकर चर्चा में आए संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के पांच पदाधिकारियों को नौचंदी पुलिस ने मंगलवार को हिरासत में ले लिया। इन पर बिना अनुमति प्रेस वार्ता करने का आरोप है। एलआईयू, आईबी और पुलिस के उच्च अधिकारियों ने इनसे थाने पहुंचकर पूछताछ की। वहीं, देर रात पांचों लोगों को लिखापढ़ी करने के बाद सुपुर्दगी में सौंप दिया गया।

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एसपी सिटी डॉ. एएन सिंह के अनुसार पीएफआई नाम के संगठन द्वारा मंगलवार को अपार चेंबर में प्रेस वार्ता करने की सूचना थी। बाद में पड़ताल में सामने आया कि प्रेस वार्ता नौचंदी थाना क्षेत्र के शास्त्रीनगर सेक्टर-13 स्थित सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया के ऑफिस में की जा रही है। नौचंदी पुलिस ने मौके से अनीस अंसारी निवासी दिल्ली सचिव नार्थ जोन पीएफआई, मौलाना साजिद निवासी मेरठ एडहॉक कमेटी मेंबर, मौलाना शादाब निवासी शामली एडहॉक कमेटी मेंबर, राशिद निवासी मेरठ और परवेज निवासी दिल्ली को पूछताछ के लिए हिरासत में ले लिया।
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एसपी सिटी ने बताया कि बीती 17 जुलाई को लिसाड़ीगेट क्षेत्र में पॉपुलर फ्रंट के नाम से ‘बेखौफ जिओ-बाइज्जत जिओ’ स्लोगन से पोस्टर लगाए गए थे। इन पोस्टरों पर कुछ चित्र भी बनाए गए थे। पुलिस-प्रशासन ने ये पोस्टर विवादित और भड़काऊ माने थे। सीओ कोतवाली दिनेश शुक्ला ने संगठन के कार्यकर्ता बताए गए वसीम निवासी लिसाड़ीगेट को जेल भेजा था। संगठन के जिलाध्यक्ष मुफ्ती शहजाद को नामजद किया गया था, जिसकी गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं।

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केंद्र-प्रदेश पर साधा निशाना
पीएफआई की तरफ से जारी प्रेसनोट में आरोप लगाया गया कि भीड़तंत्र की हिंसक घटनाओं को रोकने के लिए दिल्ली और यूपी पुलिस ने कोई कारगर कदम नहीं उठाया। पिछले एक सप्ताह से शांतिपूर्ण अभियान में शामिल होने के कारण एक वर्ग के युवकों को निशाना बनाया जा रहा है। उन युवकों को पॉपुलर फ्रंट के राष्ट्रीय अभियान में शामिल होने के कारण परेशान किया जा रहा है। जो नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों और लोकतांत्रिक तरीके में रुकावट डालने के सिवा कुछ नहीं है। पीएफआई के सचिव अनीस अंसारी ने कहा कि नए दौर में हमने नहीं सुना कि कुछ लोग धार्मिक आस्थाओं के लिए गोमांस खाने या गाय रखने के आरोप में बेगुनाह लोगों की जान ले लेते हों। साल 2014 में भाजपा की सरकार बनने के बाद से 180 बड़े और 33 छोटे भीड़ के द्वारा हमले सामने आए हैं। जिनमें 50 से अधिक लोगों को मार डाला गया। भीड़ का शिकार बनने वालों में 56 प्रतिशत गरीब एक वर्ग के हैं। 

...ये तो शुरुआत है
अनीस अंसारी ने प्रेस नोट में आरोप लगाए कि भीड़ तंत्र की हिंसक घटनाएं रुकने का नाम नहीं ले रही हैं। झारखंड में तबरेज अंसारी जैसे कई नाम सूची में हैं। केंद्र सरकार मॉब लिंचिंग की घटनाओं को न तो रोक पा रही है और न ही कोई कानून पास करना चाहती है। इससे एक वर्ग में भय का माहौल है। ऐसे माहौल को देखते हुए पीएफआई ने बेखौफ जिओ, बाइज्जत जीओ के नाम से राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू किया है। देशभर में पोस्टर अभियान, हैंडबिल का वितरण, नुक्कड़ सभा, सेमिनार और जनसभाओं का आयोजन किया जा रहा है। लेकिन समझ नहीं आ रहा है कि पोस्टरों में पुलिस को ऐसा क्या विवादित लग रहा है जो पुलिस ने मेरठ और शामली से दो लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। हम पुलिस-प्रशासन, केंद्र व यूपी सरकार से अपील करते हैं कि संगठन को निशाना बनाना और परेशान करना बंद कर दे।

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