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Meerut: निकाय चुनाव से पहले ATS की छापेमारी से हड़कंप, PFI ने शहर में हिंसा के बाद जलाई थी चौकी

Mon, 08 May 2023 11:07 AM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Mon, 08 May 2023 11:07 AM IST
सार

मेरठ में दूसरे चरण का निकाय चुनाव होने से पहले यूपी एटीएस की कार्रवाई से हड़कंप मच गया। वहीं एटीएस की कार्रवाई इतनी गोपनीय रही कि स्थानीय पुलिस को भी इसकी भनक नहीं लगी। टीम ने शहर से एक सपा नेता को हिरासत में लिया है।

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Meerut: ATS raid before civic elections, PFI burnt post after violence in the city
यूपी एटीएस - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

एटीएस (आतंकवाद निरोधक दस्ते) ने शनिवार रात करीब छह घंटे तक शहर में छानबीन की। इस दौरान लिसाड़ीगट, कोतवाली क्षेत्र सहित कई जगहों पर दबिश दी गई। चार लोगों को हिरासत में लिया गया है।  इनमें बुलंदशहर का एक सपा नेता भी है। बताया गया कि प्रतिबंधित संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के सदस्य हैं। ये पीएफआई के लिए काम कर रहे थे। इनके लोगों के बैंक खातों से लेकर अन्य जानकारी जुटाई जा रही है। 

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पापुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीफआई) के एजेंटों के खिलाफ एटीएस ने पूरे प्रदेश में घेराबंदी शुरू कर दी है। मेरठ से भी शनिवार देर रात कई आरोपियों को पकड़ा गया है। इससे यह तय हो गया है प्रतिबंध होने के बावजूद भी पीएफआई ने अपनी जड़े यहां जमा रखी हैं। पहले भी पीएफआई के एजेंट मेरठ में बड़ी हिंसा भी कर चुके हैं।
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यह भी पढ़ें: Meerut: सपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव आज मेरठ में करेंगे रोड शो, रूठे मुस्लिम नेताओं को मनाने पर रहेगा जोर

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दिसंबर 2019 में सीएए के विरोध में लिसाड़ीगेट में जुमे की नमाज के बाद एक समुदाय के लोगों ने पुलिस पर हमला किया था। तिरंगा गेट के सामने इस्लामाबाद पुलिस चौकी को आग के हवाले कर दिया गया था। उपद्रवियों ने पुलिस पर फायरिंग की थी। 

दरअसल, 20 दिसंबर 2019 को सीएए को लेकर प्रदेशभर में हिंसा हुई थी। लिसाड़ीगेट में जुमे की नमाज के बाद एक समुदाय के लोगों ने पुलिस पर हमला कर हिंसा कर दी थी। पुलिस-प्रशासन की ढीली कार्रवाई के चलते प्रदेश सरकार ने फटकार लगाई थी।

इसके बाद पुलिस एक्शन में आई और हिंसा और आगजनी में नष्ट हुई सरकारी संपत्ति की कीमत के तौर पर 28.27 लाख रुपये की वसूली के लिये 51 आरोपियों की संपत्ति नीलाम करने का नोटिस दिया गया था।
 

पांच लोगों की हुई थी मौत,173 बने थे आरोपी
लिसाड़ीगेट क्षेत्र और हापुड़ रोड पर हुई हिंसा में पांच लोगों की गोली लगने से मौत हुई थी। इस हिंसा में लिसाड़ीगेट, नौचंदी, ब्रह्मपुरी, मवाना, जानी, सरधना थाने में 23 मुकदमे दर्ज हुए थे।

इनमें 173 आरोपी नामजद हुए थे जबकि 76 आरोपी जेल भेजे गए थे। जांच के लिए एसआईटी गठित की गई। अधिकांश मुकदमों में चार्जशीट दाखिल हो चुकी है। सीएए की हिंसा में नामजद आरोपियों से वसूली  करने के लिए शासन के आदेश  पर प्रशासन ने संज्ञान लिया था। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी थी।

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