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अब बिल्डरों को साथ लेकर फ्लैट बेचेगा एमडीए
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अब बिल्डरों को साथ लेकर फ्लैट बेचेगा एमडीए
मेरठ। अरबों रुपये के बोझ तले दबा बैठा एमडीए अब अपनी आय बढ़ाने के साधन खोज रहा है। वर्ष 2014-15 में शताब्दीनगर, लोहियानगर में समाजवादी आवास तैयार किए गए। एमडीए की योजनाओं में काम करने वाले ठेकेदार का भुगतान भी आज तक नहीं हुआ। वहीं, इनका निर्माण भी पूरा नहीं किया गया। अब प्रमुख सचिव आवास ने इन फ्लैटों को लेकर गंभीरता दिखाई है। उन्होंने कहा है कि अगर इनका ढांचा गिर गया तो जिम्मेदार कौन होगा। इसी को देखते हुए बिल्डरों को साथ लेकर इन फ्लैटों का निस्तारण किया जाएगा। इसके लिए एमडीए उपाध्यक्ष ने भी मुख्य अभियंता को निर्देश दिए हैं।
शताब्दीनगर में 570 और लोहियानगर में 305 फ्लैटों का निर्माण किया गया था, लेकिन यह योजना परवान नहीं चढ़ सकी। इन फ्लैटों के बिक जाने के बाद एमडीए को अरबों का फायदा होता। जिससे शहर के कई हिस्सों में होने वाले विकास कार्य पूरे हो जाते। एमडीए ने बोर्ड बैठक में अपनी योजनाओं में विकास कार्य कराने के लिए 28 करोड़ का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा था, लेकिन इस पर अभी अनुमति नहीं मिल सकी है।
बिल्डरों के साथ होगी बैठक
मुख्य अभियंता दुर्गेश प्रसाद श्रीवास्तव ने बताया कि बिल्डरों के साथ बैठक की जाएगी। जिसमें इन फ्लैटों के निस्तारण के लिए चर्चा की जाएगी। जिससे इन फ्लैटों को बेचकर आय कमाई जा सके। वहीं, इसके अलावा एमडीए वीसी का बंगला भी खंडहर स्थिति में पहुंच गया है। कई बार इस बंगले को भी बेचने के लिए चर्चाएं तेज हुईं, लेकिन करोड़ों रुपये का ये बंगला भी बदहाल स्थिति में पहुंच गया है।
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अमर उजाला ने चेताया था
इस मामले को लेकर अमर उजाला ने कई बार खबरों को प्रकाशित किया। 18 दिसंबर और चार जनवरी के अंक में इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया गया था। इसमें करोड़ों रुपये के फ्लैट की बर्बादी का जिक्र किया गया। वहीं, इससे बाधित हो रहे विकास कार्यों को भी प्रमुखता से प्रकाशित किया गया।
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मेरठ। अरबों रुपये के बोझ तले दबा बैठा एमडीए अब अपनी आय बढ़ाने के साधन खोज रहा है। वर्ष 2014-15 में शताब्दीनगर, लोहियानगर में समाजवादी आवास तैयार किए गए। एमडीए की योजनाओं में काम करने वाले ठेकेदार का भुगतान भी आज तक नहीं हुआ। वहीं, इनका निर्माण भी पूरा नहीं किया गया। अब प्रमुख सचिव आवास ने इन फ्लैटों को लेकर गंभीरता दिखाई है। उन्होंने कहा है कि अगर इनका ढांचा गिर गया तो जिम्मेदार कौन होगा। इसी को देखते हुए बिल्डरों को साथ लेकर इन फ्लैटों का निस्तारण किया जाएगा। इसके लिए एमडीए उपाध्यक्ष ने भी मुख्य अभियंता को निर्देश दिए हैं।
शताब्दीनगर में 570 और लोहियानगर में 305 फ्लैटों का निर्माण किया गया था, लेकिन यह योजना परवान नहीं चढ़ सकी। इन फ्लैटों के बिक जाने के बाद एमडीए को अरबों का फायदा होता। जिससे शहर के कई हिस्सों में होने वाले विकास कार्य पूरे हो जाते। एमडीए ने बोर्ड बैठक में अपनी योजनाओं में विकास कार्य कराने के लिए 28 करोड़ का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा था, लेकिन इस पर अभी अनुमति नहीं मिल सकी है।
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बिल्डरों के साथ होगी बैठक
मुख्य अभियंता दुर्गेश प्रसाद श्रीवास्तव ने बताया कि बिल्डरों के साथ बैठक की जाएगी। जिसमें इन फ्लैटों के निस्तारण के लिए चर्चा की जाएगी। जिससे इन फ्लैटों को बेचकर आय कमाई जा सके। वहीं, इसके अलावा एमडीए वीसी का बंगला भी खंडहर स्थिति में पहुंच गया है। कई बार इस बंगले को भी बेचने के लिए चर्चाएं तेज हुईं, लेकिन करोड़ों रुपये का ये बंगला भी बदहाल स्थिति में पहुंच गया है।
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अमर उजाला ने चेताया था
इस मामले को लेकर अमर उजाला ने कई बार खबरों को प्रकाशित किया। 18 दिसंबर और चार जनवरी के अंक में इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया गया था। इसमें करोड़ों रुपये के फ्लैट की बर्बादी का जिक्र किया गया। वहीं, इससे बाधित हो रहे विकास कार्यों को भी प्रमुखता से प्रकाशित किया गया।