सोना-चांदी की बढ़ती कीमतों से बेरोजगार हुए हजारों कारीगर, बयां किया दर्द, बोले- कभी नहीं देखा ऐसा वक्त
- मेरठ में 30 हजार से ज्यादा आभूषण कारीगर
- महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल से हैं अधिकांश कारीगर
- 20 कैरेट में हाथ के बने गहने बनाने में कुशल हैं मेरठ के कारीगर
विस्तार
सोने-चांदी की कीमतों में चल रहे उतार चढ़ाव से हजारों कारीगर बेरोजगार हो गए हैं। लॉकडाउन के बाद से ही सराफा बाजार में जेवर बनाने का नया काम नहीं आ रहा है। ऐसे में आभूषण निर्माताओं के हाथों से काम छिन रहा है। उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।
बाजार खुलने के बाद से ही सोने और चांदी की कीमतों में काफी तेजी आई। सोने की कीमतों ने 58 हजार तक का भाव छू लिया। वहीं चांदी भी 70 हजार तक पहुंच गई। कीमतें बढ़ने से सराफा बाजार हिल गया। अब बीते पांच दिनों से कीमतों में उतार जारी है। कीमतों की अनियमितता के चलते लोग सोने में निवेश कर रहे हैं। लेकिन गहने बनवाने पर किसी का ध्यान नहीं है। साया और त्योहार के बाद भी बाजार में गहनों के ऑर्डर नहीं आ रहे हैं। ऐसे में दैनिक मजदूरी पर बाजार में काम करने वाले कारीगरों के सामने रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
अब फिर बढ़ेगी सोने की कीमत
सात अगस्त को सोना, चांदी अब तक के सबसे ऊंचे भाव पर था। उसके बाद से लगातार कीमतें कम हो रही हैं। बाजार विशेषज्ञ रविप्रकाश अग्रवाल के अनुसार, अब कीमतें फिर बढ़ेंगी। क्योंकि सोना, चांदी का अर्थशास्त्र है, कीमतें जिस दर से घटती हैं, बाद में उससे तेज दर से बढ़ती हैं। आगामी डेढ़ महीने में सोना साठ हजार तक जा सकता है।
खाली बैठे हैं कारीगर, घर चलाना भी हो रहा मुश्किल
30 साल से सराफा बाजार में काम कर रहा हूं। आज तक इतनी परेशानी नहीं आई। पांच माह से काम नहीं है। घर चलाना मुश्किल हो रहा है। - लियाकत ढलाई वाले
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पहली बार देखा इतना बुरा वक्त
25 सालों से सराफा बाजार में काम करते हुए कई जिम्मेदारियां निभा लीं। कभी इतनी मंदी नहीं आई। कोरोना के बाद से बाजार में ग्राहक और काम नहीं है। - बप्पी सामंती
हमें भी मिले सरकारी सहायता
सरकार ने प्रवासी मजदूरों को काम और सहायता दी। हम सराफा कारीगर सरकार की किसी योजना में नहीं आते। जेवर कारीगरों के सामने रोजी का संकट है। हमें भी मदद मिले। - समर कोटाल
तीन दिनों में कीमतों में आया बदलाव
तिथि सोना प्रति चांदी
दस ग्राम प्रति किलो
17 अगस्त 53,000 62,500
18 अगस्त 53,600 64,000
19 अगस्त 53,300 62,500
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विदेशों में माना जाता है मेरठ की कारीगरी का लोहा
मेरठ एशिया की स्वर्ण मंडी कहलाता है। मेरठ में लगभग 90 हजार कारीगर और 7500 दुकानें व कारखाने हैं। मेरठ में आभूषण बनने की कारीगरी का लोहा देश विदेश में माना जाता हैं। फिल्म इंडस्ट्रीज में भी मेरठ में बने डिजाइन इस्तेमाल होते रहे हैं, लेकिन आज मेरठ का सराफा मंदी के दौर से गुजर रहा है। नोटबंदी, अत्यधिक जीएसटी दर और 12.5 प्रतिशत इंपोर्ट ड्यूटी, 20 कैरट हॉल मार्किंग को लिस्ट से बाहर करने जैसे फैसलों ने मेरठ की कारीगरी को ग्रहण लगा दिया है। इसमें सबसे ज्यादा नुकसान 20 कैरट बंद होने से हुआ है। मेरठ के हस्तनिर्मित आभूषण सीधे निर्यात करने की सुविधा नहीं है। इस कारण सारा मुनाफा दिल्ली, मुंबई, गुजरात के एक्सपोर्टर ले लेते हैं। मेरठ ज्वैलरी हस्तशिल्प क्षेत्र आज अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहा है।
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