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कैमरे में कैद हुआ तेंदुआ, पिंजरा लगाया
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किठौर/मेरठ। ग्राम फतेहपुर नारायण में तेंदुआ आबादी की तरफ बढ़ता हुआ बंबा के समीप पहुंच गया। इससे लोगों में दहशत है। दूसरी जगह कांबिंग कर रही वन विभाग की टीम तुरंत मौके पर पहुंची। तेंदुए की पुष्टि होने के बाद टीम ने पिंजरा लगाया। वहीं, लोग रात को पहरा दे रहे हैं।
भड़ौली-फतेहपुर के ग्रामीणों ने कई दिन पहले जंगल में तेंदुआ होने की सूचना वन विभाग को दी थी। इसके बाद भी अधिकारियों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। इस पर कुछ कर्मचारी मौके पर गए और खानापूर्ति करके लौट गए थे।
उधर, ग्रामीणों में तेंदुए को लेकर भारी दहशत है। इसके बावजूद वे अथक प्रयास के बाद तेंदुए की वीडियो क्लिप बनाने में कामयाब रहे। इससे उन्होंने क्षेत्र में तेंदुए की आमद की पुष्टि कर दी। इसके बाद वन विभाग में हड़कंप मच गया। रेंजर समेत वन विभाग के कर्मचारी मौके पर पहुंचे और तेंदुए के पंजे देखकर लोकेशन ट्रेस करने में जुट गए। यह सिलसिला रात भर चला। सोमवार सुबह तेंदुए की लोकेशन मिलने पर उसे पकड़ने के लिए पिंजरा लगा दिया। तेंदुआ पिंजरे की गिरफ्त में जल्द ही आएं उसके लिए चारा बनाकर बकरी को पिंजरे में बंद किया गया। हालांकि सोमवार देर शाम तक तेंदुआ पिंजरे में कैद नहीं हो सका था।
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उधर, तेंदुए की आबादी क्षेत्र में आमद होने के बावजूद वन विभाग के पास उसे बेहोश करके पकड़ने के लिए ट्रैंक्विलाइजर गन तक नहीं है। विभागीय कर्मचारियों के पास महज रस्सी एवं डंडे हैं। ट्रैंक्विलाइजर गन के लिए दूसरे जिलों पर निर्भर रहना पड़ता है।
कब-कब आया तेंदुआ
- अगस्त और नवंबर 2020 में गाजियाबाद में दो बार तेंदुआ आया
- लॉकडाउन के दौरान बुलंदशहर में तेंदुए का मेरठ वन विभाग की टीम ने रेस्क्यू किया
- 23 मार्च 2020 को परतापुर के गगोल के समीप रात में तेंदुआ दिखाई दिया
- भूड़बराल के जंगल में अप्रैल 2018 में तेंदुआ देखे जाने की ग्रामीणों ने सूचना दी थी
- सितंबर 2017 में सरधना क्षेत्र में करनाल हाईवे पर आए तेंदुए की दुर्घटना में मौत हुई
- अप्रैल 2016 में तेंदुआ छावनी क्षेत्र स्थित सैन्य अस्पताल में पहुंच गया
- फरवरी 2014 में आबूलेन पर कई दिन तक तेंदुआ घूमता रहा
वर्जन
वन विभाग की टीमें लगातार सर्च अभियान चला रही हैं। तेंदुए को पकड़ने के लिए पिंजरा लगाया गया है। एक पंपिंग ट्रैंक्विलाइजर गन विभाग के पास है। जरूरत पड़ी तो दूसरे जिलों से ट्रैंक्विलाइजर गन मंगवाई जाएगी।-राजेश कुमार, डीएफओ
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भड़ौली-फतेहपुर के ग्रामीणों ने कई दिन पहले जंगल में तेंदुआ होने की सूचना वन विभाग को दी थी। इसके बाद भी अधिकारियों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। इस पर कुछ कर्मचारी मौके पर गए और खानापूर्ति करके लौट गए थे।
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उधर, ग्रामीणों में तेंदुए को लेकर भारी दहशत है। इसके बावजूद वे अथक प्रयास के बाद तेंदुए की वीडियो क्लिप बनाने में कामयाब रहे। इससे उन्होंने क्षेत्र में तेंदुए की आमद की पुष्टि कर दी। इसके बाद वन विभाग में हड़कंप मच गया। रेंजर समेत वन विभाग के कर्मचारी मौके पर पहुंचे और तेंदुए के पंजे देखकर लोकेशन ट्रेस करने में जुट गए। यह सिलसिला रात भर चला। सोमवार सुबह तेंदुए की लोकेशन मिलने पर उसे पकड़ने के लिए पिंजरा लगा दिया। तेंदुआ पिंजरे की गिरफ्त में जल्द ही आएं उसके लिए चारा बनाकर बकरी को पिंजरे में बंद किया गया। हालांकि सोमवार देर शाम तक तेंदुआ पिंजरे में कैद नहीं हो सका था।
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उधर, तेंदुए की आबादी क्षेत्र में आमद होने के बावजूद वन विभाग के पास उसे बेहोश करके पकड़ने के लिए ट्रैंक्विलाइजर गन तक नहीं है। विभागीय कर्मचारियों के पास महज रस्सी एवं डंडे हैं। ट्रैंक्विलाइजर गन के लिए दूसरे जिलों पर निर्भर रहना पड़ता है।
कब-कब आया तेंदुआ
- अगस्त और नवंबर 2020 में गाजियाबाद में दो बार तेंदुआ आया
- लॉकडाउन के दौरान बुलंदशहर में तेंदुए का मेरठ वन विभाग की टीम ने रेस्क्यू किया
- 23 मार्च 2020 को परतापुर के गगोल के समीप रात में तेंदुआ दिखाई दिया
- भूड़बराल के जंगल में अप्रैल 2018 में तेंदुआ देखे जाने की ग्रामीणों ने सूचना दी थी
- सितंबर 2017 में सरधना क्षेत्र में करनाल हाईवे पर आए तेंदुए की दुर्घटना में मौत हुई
- अप्रैल 2016 में तेंदुआ छावनी क्षेत्र स्थित सैन्य अस्पताल में पहुंच गया
- फरवरी 2014 में आबूलेन पर कई दिन तक तेंदुआ घूमता रहा
वर्जन
वन विभाग की टीमें लगातार सर्च अभियान चला रही हैं। तेंदुए को पकड़ने के लिए पिंजरा लगाया गया है। एक पंपिंग ट्रैंक्विलाइजर गन विभाग के पास है। जरूरत पड़ी तो दूसरे जिलों से ट्रैंक्विलाइजर गन मंगवाई जाएगी।-राजेश कुमार, डीएफओ