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Meerut News: कानून की किताबें विधि विद्यार्थियों के लिए धर्मग्रंथ
Wed, 07 Oct 2026 06:15 PM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
संवाद न्यूज एजेंसी, मेरठ
Updated Wed, 07 Oct 2026 06:15 PM IST
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मेरठ कॉलेज में नवप्रवेशित विद्यार्थियों के दीक्षारंभ समारोह में बोले जिला जज अरविंद मिश्रा
बोले- 2047 के विकसित भारत का नेतृत्व करें युवा
संवाद न्यूज एजेंसी
मेरठ। कानून की धाराएं रटने के साथ संविधान की मूल भावना, न्याय के सिद्धांत और समाज के प्रति जिम्मेदारी को समझना भी विधि विद्यार्थियों के लिए जरूरी है। कानून की पुस्तकें उनके लिए धर्मग्रंथ समान हैं। युवा विधिवेत्ताओं को अनुशासन और निरंतर अध्ययन के साथ आगे बढ़ते हुए वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में नेतृत्व की भूमिका निभानी होगी।
यह बात जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार मिश्रा ने बुधवार को मेरठ कॉलेज के विधि विभाग में एलएलबी प्रथम वर्ष के नवप्रवेशित विद्यार्थियों के दीक्षारंभ समारोह में कही। उन्होंने कहा कि विधि के विद्यार्थी भविष्य के न्यायिक अधिकारी, अधिवक्ता और विधि विशेषज्ञ हैं। इसलिए उनके चरित्र और आचरण का प्रभाव न्याय व्यवस्था में लोगों के विश्वास पर भी पड़ता है। उन्होंने विद्यार्थियों से लगन और मनोयोग से मेहनत करने का आह्वान किया।
प्रबंध समिति के अध्यक्ष डॉ. ओपी अग्रवाल ने कहा कि विधि शिक्षा केवल धाराओं और प्रावधानों का अध्ययन नहीं, बल्कि समाज में न्याय, समानता और संवैधानिक मूल्यों की स्थापना का माध्यम है। सचिव विवेक गर्ग ने कहा कि विधि के क्षेत्र में कॅरिअर की व्यापक संभावनाएं हैं। विद्यार्थियों को नियमित अध्ययन के साथ बदलते विधिक प्रावधानों और नवीनतम जानकारियों से अपडेट रहना चाहिए। प्राचार्य प्रो. नीरज कुमार ने विद्यार्थियों को कॉलेज की परंपराओं, अनुशासन और शैक्षणिक उत्कृष्टता बनाए रखने के लिए प्रेरित किया। विभागाध्यक्ष प्रो. प्रवीण दुबलिश ने भी संबोधित किया।
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कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के समक्ष पुष्पांजलि और दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। अतिथियों का पौधा और स्मृति चिह्न भेंट कर स्वागत किया गया। संचालन प्रो. आरके उपाध्याय ने किया। प्रो. एमपी वर्मा ने आभार जताया। इस दौरान पूर्व प्राचार्या प्रो. अंजलि मित्तल, पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. केके मित्तल, प्रो. चंद्रशेखर भारद्वाज सहित शिक्षक और विद्यार्थी मौजूद रहे।
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बोले- 2047 के विकसित भारत का नेतृत्व करें युवा
संवाद न्यूज एजेंसी
मेरठ। कानून की धाराएं रटने के साथ संविधान की मूल भावना, न्याय के सिद्धांत और समाज के प्रति जिम्मेदारी को समझना भी विधि विद्यार्थियों के लिए जरूरी है। कानून की पुस्तकें उनके लिए धर्मग्रंथ समान हैं। युवा विधिवेत्ताओं को अनुशासन और निरंतर अध्ययन के साथ आगे बढ़ते हुए वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में नेतृत्व की भूमिका निभानी होगी।
यह बात जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार मिश्रा ने बुधवार को मेरठ कॉलेज के विधि विभाग में एलएलबी प्रथम वर्ष के नवप्रवेशित विद्यार्थियों के दीक्षारंभ समारोह में कही। उन्होंने कहा कि विधि के विद्यार्थी भविष्य के न्यायिक अधिकारी, अधिवक्ता और विधि विशेषज्ञ हैं। इसलिए उनके चरित्र और आचरण का प्रभाव न्याय व्यवस्था में लोगों के विश्वास पर भी पड़ता है। उन्होंने विद्यार्थियों से लगन और मनोयोग से मेहनत करने का आह्वान किया।
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प्रबंध समिति के अध्यक्ष डॉ. ओपी अग्रवाल ने कहा कि विधि शिक्षा केवल धाराओं और प्रावधानों का अध्ययन नहीं, बल्कि समाज में न्याय, समानता और संवैधानिक मूल्यों की स्थापना का माध्यम है। सचिव विवेक गर्ग ने कहा कि विधि के क्षेत्र में कॅरिअर की व्यापक संभावनाएं हैं। विद्यार्थियों को नियमित अध्ययन के साथ बदलते विधिक प्रावधानों और नवीनतम जानकारियों से अपडेट रहना चाहिए। प्राचार्य प्रो. नीरज कुमार ने विद्यार्थियों को कॉलेज की परंपराओं, अनुशासन और शैक्षणिक उत्कृष्टता बनाए रखने के लिए प्रेरित किया। विभागाध्यक्ष प्रो. प्रवीण दुबलिश ने भी संबोधित किया।
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कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती के समक्ष पुष्पांजलि और दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। अतिथियों का पौधा और स्मृति चिह्न भेंट कर स्वागत किया गया। संचालन प्रो. आरके उपाध्याय ने किया। प्रो. एमपी वर्मा ने आभार जताया। इस दौरान पूर्व प्राचार्या प्रो. अंजलि मित्तल, पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. केके मित्तल, प्रो. चंद्रशेखर भारद्वाज सहित शिक्षक और विद्यार्थी मौजूद रहे।