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कृषि शिक्षा में बढ़ते बेटियों के कदम

Sat, 14 May 2016 02:12 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Sat, 14 May 2016 02:12 AM IST
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krishi shiksha
कृषि युनीवर्सिटी में रिसर्च करती छात्रा - फोटो : अमर उजाला
 डॉक्टर और इंजीनियरिंग के साथ ही बेटियां कृषि शिक्षा में भी किस्मत आजमा रही हैं। कृषि क्षेत्र की हर बारीकी को सीख रही हैं। स्नातक से लेकर पीजी तक छात्राओं की संख्या ठीकठाक है। वैज्ञानिक बनने के लिए रिसर्च भी कर रही हैं। रोजगार के बढ़ते अवसरों को देखते हुए लड़कियां का इस क्षेत्र में रुझान बढ़ा है। भारत में कृषि शिक्षा ग्रहण करने वाले लोगों की बेरोजगारी का प्रतिशत सबसे कम है, जिसके चलते युवाओं का क्रेज इस ओर बढ़ रहा है।
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भारत सरकार ने 2030 तक कृषि उत्पादकता दोगुनी करने का फैसला किया है। इसके लिए कृषि में छात्र-छात्राओं की मांग और बढे़गी। सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में पढ़ रही बेटियों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। पिछले वर्षों की तुलना में हर साल 15 से 20 प्रतिशत लड़कियों की संख्या बढ़ रही है। बीएससी एजी, एमटेक बायोटेक और पीएचडी में भी संख्या अच्छी है।
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छात्राओं की संख्या पर नजर
2011
बीएससी एजी           5
बीटेक  बायोटेक        29
एमएससी                3
एमटेक एईएफटी        3
एमटेक बायोटेक        10
पीएचडी                 3

2012
बीएससी एजी            6  
बीटेक बायोटेक          28
एमएससी एजी            6
एमटेक एईएफटी         4
एमटेक बायो टेक्नोलॉजी   12
पीएचडी                  10

2013
बीएसी एजी              15
 बीटेक बायोटेक          17
एमएससी                  9
एमटेक एईएफटी           4
एमटेक बायो टेक्नोलॉजी  7
पीएचडी                   7

2014
बीएससी एजी          11  
बीटेक बायोटेक         23  
एमएससी                8  
एमटेक बायो टेक्नोलॉजी  11
एमटेक एईएफटी         8
पीएचडी                  8

2015
बीएससी एजी           10   
बीटेक बायोटेक        18  
एमएससी              12  
एमटेक बायो टेक्नोलॉजी 15
एमटेक एईएफटी         7
पीएचडी                 10


छात्राओं से बातचीत

देश में कृषि का महत्वपूर्ण योगदान है। अर्थ व्यवस्था कृषि पर निर्भर है। वह अच्छा शिक्षक बनकर देश के लिए काम करना चाहती है। - अंकिता त्रिवेदी सुल्तानपुर, एग्रीकल्चर बायो टेक्नोलॉजी
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किसानों के लिए रिसर्च बहुत जरूरी है। किसान ही अर्थव्यवस्था को मजबूत करते हैं। इसलिए बायोटेक्नोलॉजी का क्षेत्र चुना, इसमें कॅरियर की संभावनाएं बहुत हैं। दीक्षा दूबे, कानपुर, एमएससी बायोटेक

कृषि के क्षेत्र में रुझान काफी बढ़ रहा है। इसलिए माइक्रोबायॉलोजी से किसानों की मदद की जा सकती है। राईजोबियम वैक्टीरिया दालों मेें पाया जाता है, जो काफी नुकसानदेह है। रिसर्च के माध्यम से इसकी रोकथाम की जाएगी। - श्रुति वाजपेयी, कानपुर एमएससी बायोटेक
 
बायोटेक एक ऐसी स्ट्रीम है, जो सभी के लिए लाभदायक है। बायोटेकनोलॉजी के माध्यम से देश की उत्पादकता को बढ़ाया जा सकता है। इसमें कॅरियर बनाने की भी राह अच्छी है। - रंजना सिंह, इलाहाबाद, पीएचडी

मैंने इंटर पास करते ही एग्रीकल्चर के क्षेत्र को चुना। मुझे एक अच्छा वैज्ञानिक बनना है। किसानों की मदद करके ही हम देश के लिए कुछ कर सकते हैं। बायो कंट्रोल पर काम करने पर फोकस रहेगा।
- सुषमा सागर, हापुड़ पीएचडी

एग्रीकल्चर का क्रेज बढ़ रहा है। देश कृषि प्रधान है। सभी कुछ एग्रीकल्चर पर ही निर्भर करता है। विवि मेें भी हर साल लड़कियों की संख्या बढ़ रही है। - अनन्या, झांसी, बीएससी एजी

वैज्ञानिक बनकर देश की सेवा करना चाहती हूं। डॉक्टर और इंजीनियर नहीं मेरा मकसद वैज्ञानिक बनकर सेवा करने है। किसानों और कृषि क्षेत्र के लिए बहुत कुछ करना है। - शुभा त्रिपाठी लखनऊ, बीएससी एजी


प्लांट बायोटेक पर काम करना अच्छा लगता है। भविष्य में वैज्ञानिक बनकर काम करना चाहती हूं। किसान की घटती उत्पादकता को बढ़ाने के लिए प्रयास करूंगी। - वंदना शर्मा, बुलंदशहर, पीएचडी

 
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