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किसानों में दिखी परिवर्तन की आग: - कहा वोट की चोट से मोदी-योगी को करेंगे सत्ता से बाहर, मोर्चा नेताओं ने खूब सुनाई खरी-खोटी

Mon, 06 Sep 2021 11:06 AM IST
Dimple Sirohi राजदीप जाखड़, अमर उजाला, मेरठ
राजदीप जाखड़, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Mon, 06 Sep 2021 11:06 AM IST
सार

मुजफ्फरनगर किसान-मजदूर महापंचायत में संयुक्त किसान मोर्चा नेताओं ने तीन कृषि कानूनों से होने वाले नुकसान से लेकर खेती पर आने वाले संकट के बारे में किसानों को न केवल सचेत किया बल्कि सत्ता परिवर्तन के लिए वोट की चोट देने की हामी भी भरवाई। उन्होंने सरकार को खूब खरी-खोटी भी सुनाई।

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kisan Mahapanchayat: fire to change the government seen in Farmers, - Said Modi-Yogi will be pushed out with votes
महापंचायत में शामिल किसान नेता - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मुजफ्फरनगर के जीआईसी मैदान पर हुई एतिहासिक किसान-मजदूर महापंचायत में आए किसानों के अंदर सत्ता परिवर्तन की आग दिखाई दी, बशर्ते यह आग विधानसभा चुनाव तक जलती रहे। अगर ऐसा हुआ तो प्रदेश में भाजपा को नुकसान उठाना पड़ सकता है। महापंचायत में आए किसानों ने कहा कि मोदी और योगी ने पूंजीपतियों के सामने सरेंडर कर दिया है, इसलिए वोट की चोट से दोनों को सत्ता से बाहर करेंगे। मोर्चा के सभी नेताओं ने भी सरकार को वोट की चोट देने का एलान कर किसानों से भी हामी भरवाई। किसानों ने भी हाथ उठाकर और पटके लहराकर हामी भरी।
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तीन कृषि कानूनों के विरोध और एमएसपी की कानूनी जामा पहनाने की मांग को लेकर किसान पिछले नौ महीने से दिल्ली के बॉर्डर घेरे बैठे है। पश्चिमी बंगाल में भाजपा के विरोध में चुनावी बिगुल फूंककर सफलता के रथ पर सवार संयुक्त किसान मोर्चा ने रविवार को किसानों की राजधानी मुजफ्फरनगर में किसान-मजदूर महापंचायत आहूत की।
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महापंचायत में यूपी समेत देश के करीब दस राज्यों के किसानों की भारी मौजूदगी से महापंचायत एतिहासिक बन गई। महापंचायत में पहुंची भारी भीड़ से गदगद संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं के निशाने पर मोदी और योगी सरकार के साथ अंबानी और अड़ानी ही रहे।
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नेताओं के ज्वलंत और तथ्यपरक भाषणों से किसानों में सत्ता परिवर्तन की आग दिखाई दी। बागपत के अंछाड़ निवासी किसान वीरेंद्र तोमर और मेरठ के छिलौरा गांव निवासी इंदर ने कहा कि मोदी सरकार के एजेंडे में किसान नहीं पूंजीपति दोस्त है। किसानों से बना पूछे ही कोरोना काल में तीन कृषि कानून लाए गए और भारी विरोध के बाद बिना सदन में बहस कराए पास करा लिए गए। जब किसानों ने ये कानून मांगे ही नहीं तो उन्हें जबर्दस्ती क्यों दे रहे हैं।

मुजफ्फरनगर के कबीरपुर गांव निवासी उज्जवल बालियान ने बताया कि पिछले नौ महीने से किसान बॉर्डर पर बैठे हुए हैं। सैकड़ों किसानों की जान चली गई है, लेकिन पीएम ने शोक तक प्रकट नहीं किया है। भाजपा नेता उल्टा किसानों को माओवादी, खालिस्तानी, आंदोलनजीवी करके बेइज्जत कर रहे हैं। किसान वोट की चोट से सरकार को सबक सिखाएंगे।

मोर्चा नेताओं ने सुनाई खरी खोटी
संयुक्त किसान मोर्चा नेताओं ने तीन कृषि कानूनों से होने वाले नुकसान से लेकर खेती पर आने वाले संकट के बारे में किसानों को न केवल सचेत किया बल्कि सत्ता परिवर्तन के लिए वोट की चोट देने की हामी भी भरवाई। शिवकुमार क्क्का, डॉ. दर्शनपाल, बलबीर सिंह राजोवाल, अभिमन्यू कौहाड़, मेधा पाटकर, योगेंद्र यादव से लेकर चौधरी राकेश टिकैत आदि सभी नेताओं ने आंदोलन को फसल और नस्ल बचाने का आंदोलन बताया। कहा कि ये आजादी की दूसरी लड़ाई है जो अपनों से लड़नी पड़ रही है। किसानों ने अंग्रेजों से भी जंग जीती थी अब मोदी-योगी से भी जंग जीतेंगे।

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उमड़ा किसानों का जनसैलाब - फोटो : अमर उजाला

एतिहासिक रही किसान महापंचायत, मगर वोट क्लब का नहीं तोड़ सकी रिकॉर्ड
मुजफ्फरनगर के जीआईसी मैदान में हुई किसान-मजदूर महापंचायत भारी भीड़ की दृष्टि से तो एतिहासिक बन गई, लेकिन सन् 1979 में दिल्ली के वोट क्लब पर हुई चौधरी चरण सिंह की किसान महापंचायत जितनी भीड़ नहीं पहुंची। उस रैली के गवाह रहे बुजुर्गों ने बताया कि वोट क्लब की महापंचायत का रिकार्ड अभी तक नहीं टूट सका है। हालांकि मुजफ्फरनगर की किसान महापंचायत में जुटी भारी भीड़ ने किसानों के अंदर जोश और उत्साह भर दिया है। वहीं सरकार को भी संदेश देने में कामयाब रही है।

गांव चिंदौड़ी के किसान चौधरी बलवान सिंह और पाथौली निवासी ब्रजपाल सिंह सांगवान ने बताया कि उन्होंने वोट क्लब की चौधरी चरण सिंह वाली महापंचायत भी देखी थी और इस महापंचायत का भी हिस्सा बने हैं। भीड़ की दृष्टि से इसमें वोट क्लब जितनी तो भीड़ नहीं आई लेकिन महापंचायत अपना उद्देश्य साधने और सरकार को संदेश देने में सफल हो गई। पिछले नौ महीने से बॉर्डर पर बैठे किसानों और किसान आंदोलन में महापंचायत ने नई जान फूंकने का काम किया है।

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