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ये है कलयुग का श्रवण कुमार, कांवड़ में दादा-दादी को बिठाकर कर रहा धार्मिक यात्रा

Mon, 30 Jul 2018 10:05 PM IST
कपिल कुमार, अमर उजाला, मेरठ
कपिल कुमार, अमर उजाला, मेरठ Updated Mon, 30 Jul 2018 10:05 PM IST
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kalyug ka shravan kumar, and holding a grandparents in Kanwar traveling
कलयुग का श्रवण मेरठ का राहुल - फोटो : अमर उजाला

देश में आज भी ऐसे युवा मौजूद है, जो अपने माता-पिता और बुजुर्गों की सेवा के लिए अलग ही सोच रखते हैं। युवाओं की सोच बदलने निकले 'कलयुग के श्रवण' राहुल कुमार ने भी कुछ ऐसा ही कर दिखाने का सपना संजोया है। मेरठ में गांव जंगेठी के रहने वाले राहुल कुमार अपने दादा-दादी को लेकर धार्मिक यात्रा पर निकले हैं। कलयुग के श्रवण ने 21 जुलाई को हरिद्वार में हर पैड़ी पर गंगाजल भरने के बाद अपने दादा-दादी को कांवड़ में बैठाकर यात्रा शुरू की। जो अब अपनी मंजिल के करीब है।

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एक क्विंटल 35 किलो वजन लेकर चल रहे श्रवण
शायद आपको यकीन न हो, लेकिन यह सच है कि कलयुग के श्रवण राहुल कुमार हरिद्वार से एक क्विंटल पैतीस किलो वजन लेकर मेरठ के लिए निकले हैं। यह वजन तब है जब वह अपने दादा छोटेलाल (90) दादी कश्मीरी (80) को कांवड़ में बैठाकर अपने घर के लिए निकले हैं। वैसे तो हर कोई उसकी तारीफ कर रहा है, लेकिन केवल तारीफ से काम नहीं चलेगा। क्योंकि राहुल देश के युवाओं की सोच बदलना चाहते हैं। उनका मानना है कि देश का हर युवा अपने माता-पिता और बुजुर्गों की सेवा करें। यही वजह है कि राहुल कुमार ने नई पीड़ि के युवाओं को संदेश देने के लिए यह कदम उठाया है।
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दाल-रोटी से चल रहा सफर
राहुल बताते हैं कि वह खाने में सिर्फ दाल-रोटी ही ले रहे हैं। इसके अलावा दुध का सेवन कर करीब 12 घंटे आराम भी करते हैं। वह 24 घंटों में सिर्फ बारह घंटे ही चल रहे हैं जिसमें वह प्रतिदिन 8 किलोमीटर की यात्रा तय कर रहे हैं। राहुल ने बताया कि उनके साथ उनके पिता कमल सिंह और तीन मामा (अमित, जॉनी और सोनवीर) साथ में है। राहुल सोमवार तक मुजफ्फरनगर तक की यात्रा तय कर चुके हैं। खास बात यह है कि चिलचिलाती धूप और तपती सड़कें उनके कदमों को नहीं रुक पाई।

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दादा-दादी को कराए नीलकंठ महादेव के दर्शन

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कलयुग का श्रवण मेरठ का राहुल - फोटो : अमर उजाला

कलयुग के श्रवण राहुल कुमार 19 जुलाई को अपने दादा-दादी, पिता कमल सिंह और तीन मामा (अमित, जॉनी और सोनवीर) के साथ बस से ऋषिकेश पहुंचे। जहां उन्होंने पहले अपने दादा-दादी को नीलकंठ महादेव के दर्शन कराए। इसके बाद वह हरिद्वार लौट आए। 21 जुलाई को हरिद्वार में चंडी देवी और मंसा देवी के दर्शन कराने के बाद उन्होंने दादा दादी को गंगा में पावन डुबकी लगवाकर गंगाजल भरा। इसके बाद राहुल ने दादा-दादी को कांवड़ पर बैठाया और हरकी पैड़ी से मेरठ के लिए निकल पड़े। राहुल की इस यात्रा में उसके पिता और तीनों मामा पैदल ही चल रहे हैं।

युवाओं की सोच बदलना चाहते हैं राहुल 
मेरठ में एक निजी कंपनी में इलेक्ट्रिीशियन राहुल कुमार का कहना है कि युवा पीढ़ी की धारणा अपने बुजुर्गों को लेकर ठीक नहीं होती। शादी के बाद अधिकांश लोग अपने मां-बाप को अकेले छोड़ देते हैं। उन्होंने कहा कि वह युवा पीढ़ी की सोच बदलना चाहते हैं। इसीलिए इस तरह की यात्रा पर निकले हैं। उन्होंने बताया कि वह पूरे देश के युवाओं को बताना चाहते हैं कि बुजुर्गों की सेवा से बढ़कर कोई धर्म नहीं।

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