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Meerut News: ज्योति को सांस लेने में हो रही दिक्कत, नहीं पता चली गई पति-बेटी की जान
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डौरली अग्निकांड : पिता-पुत्री की मौत और 11 लोगों के झुलसने का मामला
सागर और शिवानी की मौत की खबर सुनकर कांता के नहीं थम रहे आंसू
माई सिटी रिपोर्टर/ संवाद न्यूज़ एजेंसी
मेरठ/मोदीपुरम। रुड़की रोड स्थित कृष्णा नगर में दुकानों और मकान में लगी आग में झुलसी ज्योति को सांस लेने में दिक्कत हो रही है। उनका अभी भी अस्पताल में उपचार चल रहा है। परिजनों का कहना है कि ज्योति को मंगलवार रात तक नहीं बताया गया है कि उनके पति सागर गोस्वामी (35) और बेटी शिवानी उर्फ लाली (8) की अग्निकांड में जान चली गई है। सागर की मां को सोमवार रात इसकी जानकारी हुई तो वह फूटकर रोने लगीं। उनकी आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं।
पल्लवपुरम थाना क्षेत्र के डौरली के कृष्णा नगर स्थित सतीश के भवन में रविवार रात शॉर्ट सर्किट से आग लग गई थी। आग भवन के बाहरी साइड में किराये पर दी गईं दो दुकानों में चल रहे कृष्णपाल के टेंट हाउस में आग लगी थी। आग बढ़ने पर भवन के भीतर बरामदे में रखे टेंट के सामान और यहां खड़ी दो बाइक व एक इलेक्ट्रिक स्कूटी तक पहुंच गई थी। इससे भवन के अंदर दो कमरों में किराये पर रह रहा रोहटा गांव निवासी सागर गोस्वामी का परिवार फंस गया था। सागर की मां कांता के शोर मचाने पर सागर, उनकी पत्नी ज्योति, बेटा कान्हा व शिवा और आठ साल की मासूम बेटी शिवानी एक कमरे में घुस गए थे। उधर, दो अन्य कमरों में रह रहे मसूरी गांव निवासी संजय कश्यप का परिवार भी इसी कमरे में घुस गया था। हादसे के दौरान संजय कश्यप अपनी 14 साल की बेटी जनक को लेकर शास्त्रीनगर स्थित उसके मामा के घर आए हुए थे। उनकी पत्नी सरिता, बेटे आशु, प्रिंस, करन और बेटी भावना भी सागर के कमरे में घुस गए थे। कमरे में धुआं भर गया। इससे सभी बेहोश हो गए। आग की तपिश से सभी मामूली रूप से झुलस गए। एक अन्य कमरे में रहने वाला किरायेदार अरुण रजाई ओढ़कर जीने के रास्ते छत पर पहुंच गया। हालांकि इस प्रयास में वह भी झुलस गया था। सागर गोस्वामी के चचेरे भाई गौरव ने बताया कि अब केवल उनकी भाभी ज्योति का अस्पताल में उपचार चल रहा है। अन्य सभी को अस्पताल से उपचार के बाद घर भेज दिया गया।
बरामदे में नहीं रखा होता सामान, तो नहीं जाती दो जान
पीड़ित परिवार के लोगों का कहना है कि आग लगने के दौरान टेंट की दुकान का सामान मेनगेट के अंदर बने बरामदे में रखा हुआ था। अगर यह सामान नहीं रखा तो और इसमें आग नहीं लगती तो दोनों परिवार बाहर निकल सकते थे। यहां बड़े-बड़े कूलर, डीजे आदि व टेंट का अन्य सामान रखा था। वहीं, स्कूटी और बाइक जीने के आसपास खड़ी थीं। उस दौरान तेज हवा चल रही थी। आग तेजी से फैली और बरामदे में रखा सामान व स्कूटी-बाइक जलने लगीं। कमरे में घुसने से पहले दोनों परिवारों ने बाहर निकलने की कोशिश की लेकिन आग से रास्ता बंद होने के कारण उन्हें जान बचाने के लिए कमरे में घुसना पड़ा।
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आग से दरक गया लिंटर और दीवारें, सहमे लोग
कृष्णा नगर स्थित भवन में लगी आग इतनी भीषण थी कि लिंटर और दीवारें दरक गईं थीं। मंगलवार को भी लोगों में अग्निकांड और यहां का मंजर देख चुके लोग सहमे रहे। खौफ का माहौल बना रहा। हालांकि मंगलवार को मकान पर ताला लटका हुआ था। इसके बावजूद लोग यहां आकर बाहर से आग से क्षतिग्रस्त हुए भवन को देखकर हादसे की चर्चा करते दिखे। गनीमत रही कि जिस कमरे में दोनों परिवार के 11 लोग जान बचने के लिए घुसे थे। अधिक आग नहीं पहुंची थी। यहां टंगे पर्दे आदि भी सुरक्षित थे। हालांकि पूरा कमरा और दरवाजा पूरी धुएं व तपिश से काला हो गया था।
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सागर और शिवानी की मौत की खबर सुनकर कांता के नहीं थम रहे आंसू
माई सिटी रिपोर्टर/ संवाद न्यूज़ एजेंसी
मेरठ/मोदीपुरम। रुड़की रोड स्थित कृष्णा नगर में दुकानों और मकान में लगी आग में झुलसी ज्योति को सांस लेने में दिक्कत हो रही है। उनका अभी भी अस्पताल में उपचार चल रहा है। परिजनों का कहना है कि ज्योति को मंगलवार रात तक नहीं बताया गया है कि उनके पति सागर गोस्वामी (35) और बेटी शिवानी उर्फ लाली (8) की अग्निकांड में जान चली गई है। सागर की मां को सोमवार रात इसकी जानकारी हुई तो वह फूटकर रोने लगीं। उनकी आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे हैं।
पल्लवपुरम थाना क्षेत्र के डौरली के कृष्णा नगर स्थित सतीश के भवन में रविवार रात शॉर्ट सर्किट से आग लग गई थी। आग भवन के बाहरी साइड में किराये पर दी गईं दो दुकानों में चल रहे कृष्णपाल के टेंट हाउस में आग लगी थी। आग बढ़ने पर भवन के भीतर बरामदे में रखे टेंट के सामान और यहां खड़ी दो बाइक व एक इलेक्ट्रिक स्कूटी तक पहुंच गई थी। इससे भवन के अंदर दो कमरों में किराये पर रह रहा रोहटा गांव निवासी सागर गोस्वामी का परिवार फंस गया था। सागर की मां कांता के शोर मचाने पर सागर, उनकी पत्नी ज्योति, बेटा कान्हा व शिवा और आठ साल की मासूम बेटी शिवानी एक कमरे में घुस गए थे। उधर, दो अन्य कमरों में रह रहे मसूरी गांव निवासी संजय कश्यप का परिवार भी इसी कमरे में घुस गया था। हादसे के दौरान संजय कश्यप अपनी 14 साल की बेटी जनक को लेकर शास्त्रीनगर स्थित उसके मामा के घर आए हुए थे। उनकी पत्नी सरिता, बेटे आशु, प्रिंस, करन और बेटी भावना भी सागर के कमरे में घुस गए थे। कमरे में धुआं भर गया। इससे सभी बेहोश हो गए। आग की तपिश से सभी मामूली रूप से झुलस गए। एक अन्य कमरे में रहने वाला किरायेदार अरुण रजाई ओढ़कर जीने के रास्ते छत पर पहुंच गया। हालांकि इस प्रयास में वह भी झुलस गया था। सागर गोस्वामी के चचेरे भाई गौरव ने बताया कि अब केवल उनकी भाभी ज्योति का अस्पताल में उपचार चल रहा है। अन्य सभी को अस्पताल से उपचार के बाद घर भेज दिया गया।
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बरामदे में नहीं रखा होता सामान, तो नहीं जाती दो जान
पीड़ित परिवार के लोगों का कहना है कि आग लगने के दौरान टेंट की दुकान का सामान मेनगेट के अंदर बने बरामदे में रखा हुआ था। अगर यह सामान नहीं रखा तो और इसमें आग नहीं लगती तो दोनों परिवार बाहर निकल सकते थे। यहां बड़े-बड़े कूलर, डीजे आदि व टेंट का अन्य सामान रखा था। वहीं, स्कूटी और बाइक जीने के आसपास खड़ी थीं। उस दौरान तेज हवा चल रही थी। आग तेजी से फैली और बरामदे में रखा सामान व स्कूटी-बाइक जलने लगीं। कमरे में घुसने से पहले दोनों परिवारों ने बाहर निकलने की कोशिश की लेकिन आग से रास्ता बंद होने के कारण उन्हें जान बचाने के लिए कमरे में घुसना पड़ा।
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आग से दरक गया लिंटर और दीवारें, सहमे लोग
कृष्णा नगर स्थित भवन में लगी आग इतनी भीषण थी कि लिंटर और दीवारें दरक गईं थीं। मंगलवार को भी लोगों में अग्निकांड और यहां का मंजर देख चुके लोग सहमे रहे। खौफ का माहौल बना रहा। हालांकि मंगलवार को मकान पर ताला लटका हुआ था। इसके बावजूद लोग यहां आकर बाहर से आग से क्षतिग्रस्त हुए भवन को देखकर हादसे की चर्चा करते दिखे। गनीमत रही कि जिस कमरे में दोनों परिवार के 11 लोग जान बचने के लिए घुसे थे। अधिक आग नहीं पहुंची थी। यहां टंगे पर्दे आदि भी सुरक्षित थे। हालांकि पूरा कमरा और दरवाजा पूरी धुएं व तपिश से काला हो गया था।