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तेल का खेल: जांच के घेरे में आईओसीएल, ट्रांसपोर्टर बोले-अफसरों ने खूब भरी अपनी जेबें  

Wed, 11 Sep 2019 03:17 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Wed, 11 Sep 2019 03:17 PM IST
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IOCL under investigation transporter said, officers earned a lot of money in oil game
पेट्रोल पंप के गोदाम पर छापेमारी - फोटो : अमर उजाला
मेरठ में कुंडा स्थित रतिराम खूबचंद ऑयल डिपो में भूमिगत टैंकों से मिले करीब 70 हजार लीटर केरोसिन के मामले में इंडियन ऑयल कारपोरेशन लिमिटेड (आईओसीएल) बैकफुट पर नजर आ रहा है। तीन दिन बाद भी आईओसीएल की टीम इस मामले में सक्रिय नजर नहीं आई है।
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कंपनी के क्षेत्रीय बिक्री अधिकारी मोहित कुमार ही अभी तक प्रशासन से संपर्क में हैं। बाकी अधिकारी पूरे मामले में बचते नजर आ रहे हैं। जबकि प्रशासन ने अब 16 बिंदुओं पर कंपनी के सीनियर मैनेजर राजीव कुमार से दो दिन में जवाब मांगा है। 
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सात अगस्त को ऑयल डिपो पर हुई छापामारी और इसके बाद टैंकों की जांच के लिए आईओसीएल को पत्र लिखने के बावजूद वहां से अभी तक भी पूरे मामले में कोई सक्रियता नहीं दिखाई गई है। जिला प्रशासन से सिर्फ क्षेत्रीय बिक्री अधिकारी मोहित कुमार ने संपर्क किया है।

एडीएम सिटी ने कंपनी के सीनियर मैनेजर को पत्र लिखकर रतिराम खूबचंद ऑयल डिपो के विषय में कंपनी द्वारा लाइसेंस जारी करते समय तमाम औपचारिकताओं और बाद में ऑयल वितरण की व्यवस्था के तहत होने वाले नियमों के पालन संबंधी जानकारी मांगी हैं। 
 

हम मजिस्ट्रेट की भूमिका में
इस पूरे मामले में एडीएम सिटी अजय तिवारी का कहना है कि हमने छापा मारकर जो अनियमितता पकड़ी हैं और आपूर्ति विभाग के माध्यम से एफआईआर दर्ज कराई है। उसके बाद अब पूरी कार्रवाई पुलिस और आईओसीएल को करनी है। प्रशासन अब सिर्फ मजिस्ट्रेट की भूमिका में है। 

पुलिस भी मांगने जा रही जवाब
इस पूरे प्रकरण में पुलिस की जांच धीमी गति से बढ़ रही है। हालांकि पुलिस का कहना है कि पूरे मामले पर तेल कारोबारी के साथ ही आईओसीएल से जवाब मांगा जा रहा है, जिसकी बिंदुवार प्रश्नावली तैयार कर नोटिस जारी किया जाएगा। एसपी सिटी डॉ. एएन सिंह ने बताया कि रतिराम खूबचंद फर्म में कितना केरोसिन आता था और कितना वितरित होता था, जांच के लिए फर्म के कर्मचारियों से लिए अभिलेख और कमरे को भी सील किया है। 

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इन 16 बिंदुओं पर मांगा जवाब
  • आईओसीएल ने क्या भूमिगत टैंक निरीक्षण कर ग्रीन कार्ड जारी किया
  • जो टैंकर डिपो पर तेल लेकर आते हैं, क्या उनमें जीपीएस और व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम (वीटीएस) लगाया गया है
  • यदि वीटीएस लगाया है तो अब तक का उसका सारा डेटा उपलब्ध कराया जाए
  • आईओसीएल पिछले पांच साल की निरीक्षण रिपोर्ट उपलब्ध कराए
  • केरोसिन को नीले रंग में वितरित करना था, लेकिन उसे पेट्रोल डीजल रंग में ही वितरित क्यों किया गया
  • क्या ऐसा करने के लिए सीजीएम ऑपरेशन या उच्चाधिकारियों ने अनुमति दी थी
  • इस तरह ऑयल डिपो में भूमिगत टैंक में प्रथम दृष्टया छेड़छाड़ पायी गई है तो क्या आईओसीएल द्वारा जांच की जानी अपेक्षित है
  • क्या वह कार्रवाई शीघ्र नहीं होनी चाहिए
  • भूमिगत टैंकाें को स्थापित करने की प्रक्रिया विस्तार से बताएं, क्या उसका पालन किया गया
  • क्या आईओसीएल द्वारा समय-समय पर भूमिगत टैंकों का संबंधित नियमावली के तहत निरीक्षण होता है
  • यदि पीईएसओ मानक के अनुसार निरीक्षण होता है तो कभी हुआ है, यदि हुआ तो उसकी रिपोर्ट दी जाए
  • इस फर्म की पीईएसओ लाइसेंस की अनंतिम प्रति उपलब्ध कराएं
  • आईओसीएल द्वारा परिसर में लगे डिस्पेनिंग यूनिट का सत्यापन प्रमाणपत्र उपलब्ध कराएं
  • परिसर में मिले टैंकर के ड्राइवर का संबंधित कार्य का लाइसेंस भी उपलब्ध कराएं
  • भूमिगत चारो टैंकों में जो केरोसिन मिला है, उसमें से उसे बाहर निकालने के लिए क्या केवल डीयू ही है या मौके पर कुछ और मॉड भी हैं 
  • उक्त यूनिट में कब-कब सैंपल लिए गए, उसकी रिपोर्ट भी उपलब्ध कराएं 
  • उक्त फर्म के लेआउट स्वीकृत प्लान की प्रति उपलब्ध कराएं 

ट्रांसपोर्टर बोले अफसरों ने खूब कमाया पैसा
तेल के काले कारोबार को लेकर मेरठ ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन ने भी अफसरों पर निशाना साधा है। ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के ऑफिस में हुई मीटिंग में अध्यक्ष गौरव शर्मा ने आरोप लगाया कि कुछ ही पेट्रोल पंप के मालिकों पर शिकंजा कसा गया है। जितने भी तेल कारोबारी पकड़े गए हैं, उनकी संपत्ति की भी जांच होनी चाहिए। मिलावटी तेल की वजह से अधिकांश वाहनों का इंजन खराब हुआ है। प्रशासन ने इन लोगों को पकड़ा। लेकिन इनके पंपों पर अभी भी मिलावटी तेल की सप्लाई हो रही है।

गौरव शर्मा ने सरकारी लैब में सैंपल जांचने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। वहीं, कहा कि आपूर्ति विभाग या अन्य अफसर, जो भी लोग इस खेल से जुड़े हैं, उन्होंने खूब पैसा कमाया। साथ ही संदेह के घेरे में आए पेट्रोल पंपों के बंद न होने से साफ है कि सरकारी तंत्र में तेल माफियाओं की घुसपैठ जारी है।

ट्रांसपोर्टरों ने सैंपलों की जांच श्रीराम टेस्ट लैबोरेटरी दिल्ली में कराने की मांग की। इसके लिए सभी ट्रांसपोर्टर सैंपल टेस्ट का खर्चा उठाने के लिए तैयार हैं। यदि सैंपल मानकों पर सही नहीं उतरते हैं तब उसमें शीघ्र अति शीघ्र कार्रवाई होनी चाहिए। दोषियों के पेट्रोल पंप भी बंद किए जाने चाहिए।
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