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Meerut News: मैं खेल रही थी... अम्मी, अब्बू और भाई-बहन सब दब गए
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मेरठ। जाकिर कॉलोनी के हादसे में अपनों की मौत के बाद परिजन की आंख से आंसू नहीं थम पा रहे। सभी परिजन बार-बार यही बोल रहे हैं कि हमारी तो दुनिया ही उजड़ गई। ऐसा मनहूस दिन ऊपर वाला किसी को न दिखाए।
सात वर्षीय रिया को पता भी नहीं कि उसके पिता साजिद का साया उसके सिर से उठ गया है। दादी नफ्फो, दोनों बड़ी बहनें सानिया और रिजा और भाई साकिब भी इस दुनिया में नहीं रहे। जबकि मां सायमा अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रही है। रिया कक्षा-7 में पढ़ती है। उसने बताया कि जिस समय मकान गिरा वह घर के बाहर खेल रही थी। घर में अम्मी, अब्बू और भाई-बहन दब गए। घर में रो रही महिलाओं को वह भारी मन से देख रही थी।
नईम कुछ समय पहले ही घर से बाहर निकला था। उसने इस हादसे में पत्नी अलीशा और पांच माह की बेटी हिमशा को खो दिया। मां के साथ भाई-भाभी और उनके बच्चों की मौत ने उसे भीतर तक झकझोर दिया। नईम ने कहा कि यह गम जिंदगीभर भुलाया नहीं जा सकता। मलबा हटाकर उसने अपनों को बचाने के प्रयास किया लेकिन वह सफल नहीं हो पाया, इसका गम जिंदगी भर रहेगा।
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नदीम ने बताया कि वह हादसे से कुछ देर पहले गर्भवती पत्नी फरहाना से पशुओं का दूध निकालने की बात कहकर नीचे आया था। मां से भी कहा था कि दूध निकालने का समय हो गया है। वह घर से बाहर दो मिनट पहले ही निकला था। तभी तेज धमाके की आवाज के साथ मकान गिर गया। पलक झपकते ही तीन मंजिला मकान के मलबे में पूरा परिवार दब गया। यह देख आंखों के सामने एकबारगी अंधेरा छा गया। परिजन को बचाने के लिए वह कुछ नहीं कर सका।
नफ्फो की पुत्री इसराना ने बताया कि वह 11 बहन-भाई हैं। सभी की शादी हो चुकी है। एक भाई की मौत हो चुकी है। वह अपने घर पर थी। तभी चारों भाई से अलग मकान में रह रहे भाई आबिद की पत्नी ने नसीम को फोन कर बताया कि मकान गिर गया है। परिवार के सारे लोग दब गए हैं। यह सुनते ही उसका कलेजा बैठ गया। मौके पर पहुंचकर पता चला कि सब कुछ खत्म हो गया। इसके बाद वह बेहोश होकर गिर गई। आसपास की महिलाओं ने उसे संभाला।
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सात वर्षीय रिया को पता भी नहीं कि उसके पिता साजिद का साया उसके सिर से उठ गया है। दादी नफ्फो, दोनों बड़ी बहनें सानिया और रिजा और भाई साकिब भी इस दुनिया में नहीं रहे। जबकि मां सायमा अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रही है। रिया कक्षा-7 में पढ़ती है। उसने बताया कि जिस समय मकान गिरा वह घर के बाहर खेल रही थी। घर में अम्मी, अब्बू और भाई-बहन दब गए। घर में रो रही महिलाओं को वह भारी मन से देख रही थी।
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नईम कुछ समय पहले ही घर से बाहर निकला था। उसने इस हादसे में पत्नी अलीशा और पांच माह की बेटी हिमशा को खो दिया। मां के साथ भाई-भाभी और उनके बच्चों की मौत ने उसे भीतर तक झकझोर दिया। नईम ने कहा कि यह गम जिंदगीभर भुलाया नहीं जा सकता। मलबा हटाकर उसने अपनों को बचाने के प्रयास किया लेकिन वह सफल नहीं हो पाया, इसका गम जिंदगी भर रहेगा।
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नदीम ने बताया कि वह हादसे से कुछ देर पहले गर्भवती पत्नी फरहाना से पशुओं का दूध निकालने की बात कहकर नीचे आया था। मां से भी कहा था कि दूध निकालने का समय हो गया है। वह घर से बाहर दो मिनट पहले ही निकला था। तभी तेज धमाके की आवाज के साथ मकान गिर गया। पलक झपकते ही तीन मंजिला मकान के मलबे में पूरा परिवार दब गया। यह देख आंखों के सामने एकबारगी अंधेरा छा गया। परिजन को बचाने के लिए वह कुछ नहीं कर सका।
नफ्फो की पुत्री इसराना ने बताया कि वह 11 बहन-भाई हैं। सभी की शादी हो चुकी है। एक भाई की मौत हो चुकी है। वह अपने घर पर थी। तभी चारों भाई से अलग मकान में रह रहे भाई आबिद की पत्नी ने नसीम को फोन कर बताया कि मकान गिर गया है। परिवार के सारे लोग दब गए हैं। यह सुनते ही उसका कलेजा बैठ गया। मौके पर पहुंचकर पता चला कि सब कुछ खत्म हो गया। इसके बाद वह बेहोश होकर गिर गई। आसपास की महिलाओं ने उसे संभाला।