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Meerut News: मेडा में तालाबंदी कर धरने पर बैठे किसान, जमकर की नारेबाजी
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बड़ा हुआ मुआवजा न मिलने पर वेदव्यासपुरी के किसानों ने की मेडा की तालाबंदी, धरने पर बैठे
मेरठ। जमीन के बढ़े प्रतिकर और मुआवजे की मांग कर रहे किसानों ने सोमवार को मेरठ विकास प्राधिकरण (मेडा) पहुंचकर तालाबंदी की और धरने पर बैठ गए। किसानों ने अफसरों के खिलाफ नारेबाजी करते हुए वादाखिलाफी के आरोप लगाए। कहा कि उन्हें सिर्फ आश्वासन मिल रहे हैं। बाद में मेडा सचिव किसानों के बीच धरने में पहुंचे। उन्होंने कहा कि 11 नवंबर को शासन में पैरोकारी की जाएगी। आश्वासन पर किसान माने और चेताया कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो मेडा में बेमियादी धरना प्रदर्शन किया जाएगा।
सोमवार दोपहर को ट्रैक्टर ट्रॉली में सवार होकर पहुंचे किसानों ने मेडा के मुख्य द्वार पर ताला लगा दिया। इसके बाद गेट के पास ही धरने पर बैठ गए। मेडा अधिकारियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस दौरान काफी संख्या में महिलाएं मौजूद रहीं। किसान नेता तथा पार्षद प्रशांत कसाना ने बताया कि वेदव्यासपुरी में मेरठ मंडपम के पास पिछले 67 दिन से किसान धरने पर बैठे हैं। लोहियानगर, गंगानगर और वेदव्यासपुरी के किसान बढ़े हुए प्रतिकर की मांग कर रहे हैं। किसान नेता सुभाष प्रधान ने बताया कि साल 2015 में हुए समझौते के अनुसार किसान बढ़े हुए प्रतिकर की मांग कर रहे हैं। समझौते के बाद दो करोड़ 80 लाख रुपये मुआवजा किसानों को दिया भी जा चुका है। इसके बाद कोरोना आ जाने और अफसरों के बदल जाने के बाद से प्रक्रिया एकाएक रोक दी गई।
किसान नेता मंगत सिंह ने बताया कि ऊर्जा राज्यमंत्री डा. सोमेंद्र तोमर और मेडा सचिव आनंद कुमार सिंह ने पूर्व में धरना स्थल पर आकर किसानों से वार्ता कर जल्द मुआवजा वितरण का आश्वासन दिया था। काफी लंबा समय बीत जाने के बाद भी कोई प्रक्रिया शुरू नहीं की गई। कई दौर की वार्ता के बाद भी किसानों की मांग पूरी नहीं की जा रही है। अब किसान हर कीमत पर बढ़ा हुआ प्रतिकर लेकर मानेंगे।
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मेडा सचिव आनंद कुमार सिंह धरनारत किसानों के बीच पहुंचे। उन्होंने किसानों को समझा-बुझाकर शांत किया। सचिव ने बताया कि किसानों को बढ़ा हुआ प्रतिकर का मामला शासन को भेजा जा चुका है। उन्होंने किसानों से कहा कि रिमाइंडर भेजा गया है। इसमें 11 नवंबर को शासन में पैरोकारी करने का आश्वासन दिया।
इस दौरान पार्षद प्रशांत कसाना, सुभाष प्रधान, मंगत सिंह, बिन्नी गुर्जर, पार्षद प्रशांत कसाना, अनिल चौधरी, पिंटू प्रधान, नरेश चौधरी, विजय बैसला, पप्पू आदि किसानों के साथ ही श्यामो देवी, बाला, मुनेष, शांति, राजबाला आदि समेत काफी संख्या में महिलाएं मौजूद रहीं।
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सोमवार दोपहर को ट्रैक्टर ट्रॉली में सवार होकर पहुंचे किसानों ने मेडा के मुख्य द्वार पर ताला लगा दिया। इसके बाद गेट के पास ही धरने पर बैठ गए। मेडा अधिकारियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इस दौरान काफी संख्या में महिलाएं मौजूद रहीं। किसान नेता तथा पार्षद प्रशांत कसाना ने बताया कि वेदव्यासपुरी में मेरठ मंडपम के पास पिछले 67 दिन से किसान धरने पर बैठे हैं। लोहियानगर, गंगानगर और वेदव्यासपुरी के किसान बढ़े हुए प्रतिकर की मांग कर रहे हैं। किसान नेता सुभाष प्रधान ने बताया कि साल 2015 में हुए समझौते के अनुसार किसान बढ़े हुए प्रतिकर की मांग कर रहे हैं। समझौते के बाद दो करोड़ 80 लाख रुपये मुआवजा किसानों को दिया भी जा चुका है। इसके बाद कोरोना आ जाने और अफसरों के बदल जाने के बाद से प्रक्रिया एकाएक रोक दी गई।
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किसान नेता मंगत सिंह ने बताया कि ऊर्जा राज्यमंत्री डा. सोमेंद्र तोमर और मेडा सचिव आनंद कुमार सिंह ने पूर्व में धरना स्थल पर आकर किसानों से वार्ता कर जल्द मुआवजा वितरण का आश्वासन दिया था। काफी लंबा समय बीत जाने के बाद भी कोई प्रक्रिया शुरू नहीं की गई। कई दौर की वार्ता के बाद भी किसानों की मांग पूरी नहीं की जा रही है। अब किसान हर कीमत पर बढ़ा हुआ प्रतिकर लेकर मानेंगे।
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मेडा सचिव आनंद कुमार सिंह धरनारत किसानों के बीच पहुंचे। उन्होंने किसानों को समझा-बुझाकर शांत किया। सचिव ने बताया कि किसानों को बढ़ा हुआ प्रतिकर का मामला शासन को भेजा जा चुका है। उन्होंने किसानों से कहा कि रिमाइंडर भेजा गया है। इसमें 11 नवंबर को शासन में पैरोकारी करने का आश्वासन दिया।
इस दौरान पार्षद प्रशांत कसाना, सुभाष प्रधान, मंगत सिंह, बिन्नी गुर्जर, पार्षद प्रशांत कसाना, अनिल चौधरी, पिंटू प्रधान, नरेश चौधरी, विजय बैसला, पप्पू आदि किसानों के साथ ही श्यामो देवी, बाला, मुनेष, शांति, राजबाला आदि समेत काफी संख्या में महिलाएं मौजूद रहीं।