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मुआवजे पर घमासान: किसानों ने किया आर-पार की लड़ाई का एलान, ये हैं 10 बड़ी मांगें

Sun, 03 Nov 2019 01:05 AM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Sun, 03 Nov 2019 01:05 AM IST
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Farmers Protest at Meerut Commissionary for  Land compensation of Meerut Express Way
कमिश्नरी पर तैनात पुलिस - फोटो : अमर उजाला
मेरठ में दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे पर किसानों ने आरपार की लड़ाई लड़ने का एलान कर दिया है। एक समान मुआवजा न मिलने का कई माह से विरोध कर रहे किसानों ने पदयात्रा का एलान किया था। चार दिनों तक 50 किलोमीटर का सफर पूरा कर पदयात्रा शनिवार को मेरठ कमिश्नरी पहुंची। यहां सैकड़ों की संख्या में किसानों ने केंद्र सरकार के खिलाफ अपना गुस्सा जाहिर किया और सरकार को किसान विरोधी बताया। 


किसान कल्याण समिति के बैनर तले हो रहे इस धरने में 19 गांवों के किसान शामिल हैं। सभी किसान एनएचएआई द्वारा अधिग्रहीत की गई जमीन के मामले में नाखुश हैं। उनका कहना है कि गांवों के लिए अलग-अलग रेट का मुआवजा तय किया गया है। जबकि हाल ही में बनाए गए ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे में एकसमान मुआवजा दिया गया था। डासना से 30 अक्तूबर को सुबह 11 बजे शुरू हुई पदयात्रा ने कलछीना, मुरादाबाद, भूडबराल में रात्रि विश्राम किया। पदयात्रा का समापन शनिवार शाम 4:30 बजे कमिश्नरी पार्क में हुआ।
Farmers Protest at Meerut Commissionary for  Land compensation of Meerut Express Way
कमिश्नरी पार्क में सभा के लिए लगाया गया पंडाल - फोटो : अमर उजाला
ये गांव हो रहे प्रभावित
भटजन, पलौता, मुरादाबाद, फजलगढ़, भोजपुर, शकूरपुर, किल्हौड़ा आदि गांव शामिल हैं।

...प्रतिकर अलग क्यों
किसानों का कहना है कि डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर और एक्सप्रेस-वे प्रोजेक्ट में एक ही गांवों में प्रतिकर रेट अलग-अलग थे। उन्होंने गांववार सूची बनाकर ज्ञापन तैयार किया। वर्ष 2010 में दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे के नोटिफिकेशन में 3500 और 4400 रुपये प्रतिवर्ग मीटर की दर से प्रतिकर दिया गया। जबकि साल 2014 के ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर में 2102 और 2732 की दर से प्रतिकर दिया गया।  

हाईवे पर लगा भीषण जाम
किसानों की पदयात्रा मोदीनगर से परतापुर में पहुंचने के बाद शनिवार को परतापुर तिराहे के समीप पंचायत के बाद कमिश्नरी के लिए पदयात्रा शुरू की गई। पदयात्रा में मौजूद सैकड़ों किसान जैसे ही हाईवे पर पहुंचे तो जाम लगने लगा। किसानों के हाईवे पर पहुंचते ही परतापुर से लेकर मोहिद्दीनपुर तक भीषण जाम की स्थिति बन गई। जाम में एंबुलेंस सहित स्कूली बसें भी फंसी रहीं। काफी मशक्कत के बाद ट्रैफिक पुलिस ने जाम पर काबू पाया।
Farmers Protest at Meerut Commissionary for  Land compensation of Meerut Express Way
मौके पर मौजूद पुलिस - फोटो : अमर उजाला

प्रशासन से वार्ता विफल, आज महापंचायत
कमिश्नरी पार्क में डेरा डालने से पहले पहले किसान कल्याण समिति के पदाधिकारी, सपा नेता, अतुल प्रधान, रालोद क्षेत्रीय अध्यक्ष यशवीर सिंह आदि ने प्रशासनिक अधिकारियों से वार्ता की। सिटी मजिस्ट्रेट संजय कुमार पांडे के कार्यालय में हुई वार्ता में समिति ने मांगें रखीं। लेकिन इस पर कोई फैसला नहीं हो सका। वार्ता में एडीएम सिटी अजय तिवारी, एसपी सिटी एएन सिंह, सहायक कमिश्नर मौजूद रहे। रालोद नेता यशवीर सिंह ने बताया कि हमने अपना मांग पत्र प्रशासन को दे दिया। कहा है कि जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं हम कमिश्नरी पार्क से नहीं उठेंगे। इसके अलावा रविवार को महापंचायत कर आगे की रणनीति पर विचार किया जाएगा। इस वार्ता में किसान कल्याण समिति से बबली गुर्जर, बबली कसाना, बाबूराम, टीकम नागर, अमरजीत, सतीश राठी, अमरपाल आदि मौजूद रहे।

महिलाएं भी कमिश्नरी पार्क पहुंची
पदयात्रा में किसान परिवार की काफी संख्या में महिलाएं भी कमिश्नरी पार्क में पहुंची। उन्होंने भी किसान विरोधी सरकार के नारे लगाकर अपनी आवाज बुलंद की। कहा कि अगर इस बार बात नहीं मानी गई तो हम एक्सप्रेस वे पर काम नहीं करने देंगे। सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि पुरुषों से आगे अब महिलाएं रहेंगी, तभी हमारी समस्या खत्म हो सकती है।

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Farmers Protest at Meerut Commissionary for  Land compensation of Meerut Express Way
कमिश्नरी पर तैनात पुलिस का वज्र वाहन - फोटो : अमर उजाला
पदयात्रा में बजे देशभक्ति के तराने
डासना से मेरठ तक चली इस पदयात्रा में देशभक्ति के तराने बजे। देशभक्ति के गानों पर किसान, युवा वर्ग झूमते नजर आए। किसान कहते सुने गए कि सरकार को इस बार होश में आकर हमें नियम के साथ मुआवजा देना होगा, जिससे दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे का निर्माण कार्य शुरू हो सके। 

यह बोले किसान
- हमें मुआवजे की राशि अन्य गांवों से कम दी गई है। मेरी साढ़े 16 बीघा जमीन एक्सप्रेस-वे में गई है। - सुलेमान, कुशालिया गांव 
- तीन बीघा जमीन लेकर हमारे साथ धोखा किया है। अब इसके बाद कोई सुनने के लिए तैयार नहीं है। - जाकिर, सौलाना गांव
- एक्सप्रेस-वे में गरीबों के साथ धोखा किया है। पता ही नहीं चला कि किसको किस आधार पर मुआवजा दिया। मेरी भी ढाई बीघा जमीन थी। - महबूब, सौलाना गांव
- हमारी भूमि का कोई हिसाब नहीं दिया गया। मुआवजा भी अलग-अलग दिया गया है। जिससे हम काम नहीं होने देंगे। मेरी चार बीघा जमीन थी। - जुनैद, कांशी गांव
- मेरी 14 बीघा जमीन थी। लेकिन मेरी चार बीघा जमीन का मुआवजा दूसरे को दे दिया। - इस्लाम, कुशालिया, गांव
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पदयात्रा में शामिले किसान - फोटो : अमर उजाला
ये हैं मांगें
1. सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार एक प्रोजेक्ट के लिए एक समान मुआवजा दिया जाए।
2. ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे की तर्ज पर एकसमान मुआवजा दिया जाए। 
3. डासना से मेरठ तक किसानों के आवागमन के लिए सर्विस रोड का निर्माण।
4. टेंडर में वर्णित अंडरपास की ऊंचाई 5.5 मीटर हो। इसे छोटा कर दिया गया है। जिससे ट्रैक्टरों व अन्य वाहनों का अंडरपास से गुजरना संभव नहीं है।
5. प्राप्त मुआवजे की रकम से कृषि भूमि खरीदने पर स्टांप शुल्क मुफ्त कर दें। आयकर के अवांछित नोटिस बंद करें।
6. हाईवे की साइड में किसानों के आवागमन को रोकने वाली दीवार को हटाया जाए। 
7. रेलवे कॉरीडोरके लिए अधिग्रहीत भूमि की तर्ज पर प्रभावित प्रत्येक खाताधारक को साढ़े पांच लाख रुपये दिए जाएं। 
8. किसानों को हाईवे के इस्तेमाल पर टोल टैक्स फ्री किए जाएं। क्षेत्रीय प्रभावित किसानों के नौजवानों को रोजगार दिए जाएं। 
9. सदर तहसील के गांव कांशी, सौलाना, अच्छरौंडा, भूडबराल, परतापुर सहित अन्य गांवों की आर्बिटेशन की सुनवाई नहीं हुई।
10. मुआवजे में बड़े स्तर पर अनियमितता, घोटाला, फर्जीवाड़े की शिकायतें आने के बाद भी कार्रवाई नहीं हो सकी है।

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