एक्सक्लूसिव रिपोर्ट: खुल गई एसबीआई बैंक की पोल, किसानों को लगाई करोड़ों की चपत
किसान क्रेडिट कार्ड पर आरबीआई से मिलने वाली तीन प्रतिशत छूट न देकर एसबीआई ने किसानों को करोड़ों की चपत लगा दी। एक साल की अवधि में पैसा जमा करने पर केसीसी पर किसानों से सात प्रतिशत ब्याज लिया जाता है, इसमें तीन प्रतिशत आरबीआई से वापस हो जाता है। किसान को केवल चार प्रतिशत ब्याज ही देना होता है। एसबीआई में इसके उलट 12 प्रतिशत तक ब्याज की वसूली कर ली गई है। जिले के 35 हजार किसानों ने एसबीआई से 700 करोड़ का ऋण केसीसी पर लिया हुआ है।
किसानों को खेती में सहयोग करने के लिए केंद्र सरकार ने किसान क्रेडिट कार्ड की योजना चलाई है। इस योजना के तहत केसीसी का ब्याज नौ प्रतिशत माना गया है, इसमें दो प्रतिशत की छूट केंद्र सरकार की ओर से होती है। इस कारण केवल सात प्रतिशत ब्याज रह जाता है। इसमें केंद्र सरकार ने यह नियम बनाया हुआ है कि जो किसान एक साल पूरा होने से पहले बैंक का पैसा वापस कर देगा उसे आरबीआई की ओर से तीन प्रतिशत ब्याज की छूट उसे अलग से मिलेगी। किसान को केवल चार प्रतिशत ब्याज ही देना होगा। जिले में कुल दो लाख 90 हजार किसानों ने केसीसी पर ऋण लिया हुआ है। इनमें 35 हजार किसान ऐसे हैं, जिन्होंने एसबीआई की शाखाओं से ऋण लिया है। लगभग सात सौ करोड़ का ऋण किसानों ने एसबीआई से लिया है। दूसरे सभी बैंक तो किसानों को केंद्र सरकार के नियमों के अनुसार छूट का लाभ दे रहे हैं। एसबीआई की शाखाओं में आरबीआई से मिलने वाले तीन प्रतिशत ब्याज का लाभ किसानों को नहीं मिल रहा है।
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रोहाना कलां बैंक से जुड़े किसान सतीश ने बताया कि उसने एक वर्ष के भीतर अपना पूरा पैसा जमा किया। उसे तीन प्रतिशत का लाभ तो मिला ही नहीं, बल्कि सात प्रतिशत की जगह 12 प्रतिशत ब्याज लगा दिया। दूसरे सभी किसानों के साथ भी यही किया गया है। लीड बैंक मैनेजर को रोहाना कलां के साथ एसबीआई मखियाली, बरला और बसेडा की शाखा की शिकायत भी की गई है। सभी की शिकायत एक ही प्रकार की है। प्रतिदिन जिस प्रकार एसबीआई की शाखाओं की शिकायतें सामने आ रही है, इससे यह लग रहा है कि एसबीआई की अधिकतम शाखाओं में यह खेल हो गया है।
एसबीआई की शाखाओं का दस साल का ऑडिट हो: राकेश टिकैत
भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत का कहना है कि एसबीआई ने किसानों के साथ छल किया है। किसानों को मिलने वाली छूट को हड़प लिया है। यह बहुत बड़ा घोटाला है। इस घोटाले को पूरी तरह उजागर करने के लिए एसबीआई की शाखाओं का बीते दस सालों का ऑडिट होना चाहिए, जिससे इनकी सच्चाई जनता के सामने आए। किसानों को छूट का उनका पैसा ब्याज के साथ वापिस किया जाए। दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो।
सभी शिकायतें एसबीआई की है: बुंदेला
जिले के लीड बैंक मैनेजर अमित बुंदेला का कहना है कि केसीसी में छूट का लाभ किसानों को नहीं मिलने की शिकायतें उनके पास लगातार आ रही हैं। सभी शिकायतें एसबीआई की है। प्रथम दृष्टया एसबीआई के अधिकारी इसे तकनीकी चूक बता रहे हैं। अभी जांच शुरू होने जा रही है, यह तो जांच के बाद ही पता चलेगा कि किसानों को कितना नुकसान हुआ और इसका जिम्मेदार कौन है।
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