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30 लाख रुपये की दवाओं से निकालने पड़ेंगे मेडिकल में तीन माह
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मेडिकल कॉलेज में खड़ा हो सकता है दवाओं का संकट
मेरठ। एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज में मरीजों के लिए दवाओं का संकट खड़ा होने वाला है। दरअसल, दवाओं के बजट में महज 30 लाख रुपये बचे हैं और अभी तीन माह (मार्च तक) का समय निकालना है। हर माह करीब एक करोड़ रुपये की दवाइयां खर्च होती हैं। प्राचार्य ने पांच करोड़ रुपये का बजट मांगा था। बजट नहीं मिलने से मेडिकल प्रबंधन परेशान है।
वित्तीय वर्ष (अप्रैल 2019 से मार्च 2020 तक) दवाओं के लिए 10 करोड़ रुपये की धनराशि आवंटित की गई थी। इनमें से दिसंबर 2019 तक 9 करोड़ 69 लाख 85 हजार 650 रुपये की दवाइयां मंगाई जा चुकी है। 30 लाख 14 हजार 350 रुपये बजट में बाकी है। पिछले साल ओपीडी में जनवरी से दिसंबर तक 9 लाख 87 हजार 323 मरीज आए। 39130 भर्ती किए गए।
मेडिकल कॉलेज में दवाओं का स्टॉक खत्म हो रहा है। दवाओं को लेकर मरीज परेशान हैं। कई बार उन्हें आधी अधूरी दवाइयां लेकर जाना पड़ता है। मजबूरी में बाजार से दवाएं खरीदनी पड़ती हैं। वहीं शासन का दावा है कि अब मेडिकल कॉलेजों में 839 तरह की दवाइयां मुहैया कराई जाएंगी। जबकि अभी तक करीब 350 तरह की दवाएं उपलब्ध हैं। 80 प्रतिशत दवाइयां शासन कारपोरेशन से भेजेगा, जबकि 20 प्रतिशत दवाइयों का बजट ही मेडिकल कॉलेज को मिलेगा। एक जुलाई से यह व्यवस्था लागू करने की तैयारी है। मेडिकल में दवाओं का बजट 2017-18 में 10 करोड़ रुपये था। 2018-19 में बढ़ाकर 15 करोड़ रुपये कर दिया गया था। अब दोबारा उसे घटाकर 2019-20 में 10 करोड़ रुपये कर दिया गया।
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बजट के लिए भेजा रिमाइंडर
प्राचार्य डॉ. आरसी गुप्ता ने बताया कि दवाओं के बजट के लिए शासन से डिमांड की जा चुकी है। रिमाइंडर भी भेजा गया है। हालांकि अभी तक बजट नहीं मिला है। फिर से बजट की मांग की जाएगी।
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मेरठ। एलएलआरएम मेडिकल कॉलेज में मरीजों के लिए दवाओं का संकट खड़ा होने वाला है। दरअसल, दवाओं के बजट में महज 30 लाख रुपये बचे हैं और अभी तीन माह (मार्च तक) का समय निकालना है। हर माह करीब एक करोड़ रुपये की दवाइयां खर्च होती हैं। प्राचार्य ने पांच करोड़ रुपये का बजट मांगा था। बजट नहीं मिलने से मेडिकल प्रबंधन परेशान है।
वित्तीय वर्ष (अप्रैल 2019 से मार्च 2020 तक) दवाओं के लिए 10 करोड़ रुपये की धनराशि आवंटित की गई थी। इनमें से दिसंबर 2019 तक 9 करोड़ 69 लाख 85 हजार 650 रुपये की दवाइयां मंगाई जा चुकी है। 30 लाख 14 हजार 350 रुपये बजट में बाकी है। पिछले साल ओपीडी में जनवरी से दिसंबर तक 9 लाख 87 हजार 323 मरीज आए। 39130 भर्ती किए गए।
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मेडिकल कॉलेज में दवाओं का स्टॉक खत्म हो रहा है। दवाओं को लेकर मरीज परेशान हैं। कई बार उन्हें आधी अधूरी दवाइयां लेकर जाना पड़ता है। मजबूरी में बाजार से दवाएं खरीदनी पड़ती हैं। वहीं शासन का दावा है कि अब मेडिकल कॉलेजों में 839 तरह की दवाइयां मुहैया कराई जाएंगी। जबकि अभी तक करीब 350 तरह की दवाएं उपलब्ध हैं। 80 प्रतिशत दवाइयां शासन कारपोरेशन से भेजेगा, जबकि 20 प्रतिशत दवाइयों का बजट ही मेडिकल कॉलेज को मिलेगा। एक जुलाई से यह व्यवस्था लागू करने की तैयारी है। मेडिकल में दवाओं का बजट 2017-18 में 10 करोड़ रुपये था। 2018-19 में बढ़ाकर 15 करोड़ रुपये कर दिया गया था। अब दोबारा उसे घटाकर 2019-20 में 10 करोड़ रुपये कर दिया गया।
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बजट के लिए भेजा रिमाइंडर
प्राचार्य डॉ. आरसी गुप्ता ने बताया कि दवाओं के बजट के लिए शासन से डिमांड की जा चुकी है। रिमाइंडर भी भेजा गया है। हालांकि अभी तक बजट नहीं मिला है। फिर से बजट की मांग की जाएगी।