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हवाई उड़ान के लिए एएआई बनाएगा डीपीआर
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हवाई उड़ान के लिए एएआई बनाएगा डीपीआर
मेरठ। हवाई उड़ान का सपना अगले साल तक पूरा होने की संभावना प्रबल हो गई है। एएआई के नोडल अधिकारी ने भी शीघ्र ही मेरठ आकर मंडलायुक्त के साथ बैठक कर इस दिशा में तेजी से काम करने की बात कही है।
डॉ. भीमराव आंबेडकर हवाई पट्टी को हवाई अड्डे में बदलने की घोषणा 2013 में तत्कालीन नागरिक उड्डयन मंत्री चौ. अजित सिंह ने की थी, जिसके लिए प्रदेश सरकार को जमीन खरीदकर देनी थी और हवाई अड्डे का निर्माण एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया को करना था। केंद्र में भाजपा सरकार आने के बाद योजना बीच में लटक गई। इस दिशा में उस समय इतना ही काम हुआ कि हवाई पट्टी को एएआई के हवाले कर दिया गया। अब प्रदेश में जब भाजपा सरकार आई तो क्षेत्रीय हवाई उड़ान योजना के तहत मेरठ की मांग फिर से उठी। लेकिन जमीन का अड़ंगा और दिल्ली स्थित अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से एनओसी न मिलने से मामला फंसा रहा। इस बीच जमीन को लेकर कुछ मामले सुलझे। जिसमें वन विभाग की जमीन लेने पर केंद्र से स्वीकृति मिल गई, तो क्षेत्रीय उड़ान योजना के तहत जो बिड डाली गई, उस बिड में जूम एयरवेज ने मेरठ से उड़ान संचालन पर अपनी इच्छा जताई।
एएआई के नोडल अधिकारी संत कुमार ने बताया कि प्रदेश सरकार का मेरठ से हवाई उड़ान को लेकर बहुत सकारात्मक रवैया है। वह शीघ्र ही मेरठ आकर मंडलायुक्त सुरेंद्र सिंह से मिलेंगे और हवाई उड़ान की तमाम बाधाओं को दूर करते हुए डीपीआर बनवाएंगे। हवाई उड़ान का पूरा काम मंडलायुक्त के दिशा निर्देशन में होगा, क्योंकि वह प्रदेश के नागरिक उड्डयन सचिव भी रह चुके हैं।
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वर्तमान में रनवे की ये है स्थिति
वर्तमान में मेरठ की हवाई पट्टी पर रनवे की लंबाई 1513 मीटर और चौड़ाई 23 मीटर है। 19 सीटर विमान के लिए इसकी लंबाई 1800 और चौड़ाई 30 मीटर होना जरूरी है। वर्तमान में इसके लिए पर्याप्त जमीन उपलब्ध है। वन विभाग की 12 हेक्टेयर जमीन लेने को स्वीकृति मिल चुकी है।
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मेरठ। हवाई उड़ान का सपना अगले साल तक पूरा होने की संभावना प्रबल हो गई है। एएआई के नोडल अधिकारी ने भी शीघ्र ही मेरठ आकर मंडलायुक्त के साथ बैठक कर इस दिशा में तेजी से काम करने की बात कही है।
डॉ. भीमराव आंबेडकर हवाई पट्टी को हवाई अड्डे में बदलने की घोषणा 2013 में तत्कालीन नागरिक उड्डयन मंत्री चौ. अजित सिंह ने की थी, जिसके लिए प्रदेश सरकार को जमीन खरीदकर देनी थी और हवाई अड्डे का निर्माण एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया को करना था। केंद्र में भाजपा सरकार आने के बाद योजना बीच में लटक गई। इस दिशा में उस समय इतना ही काम हुआ कि हवाई पट्टी को एएआई के हवाले कर दिया गया। अब प्रदेश में जब भाजपा सरकार आई तो क्षेत्रीय हवाई उड़ान योजना के तहत मेरठ की मांग फिर से उठी। लेकिन जमीन का अड़ंगा और दिल्ली स्थित अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से एनओसी न मिलने से मामला फंसा रहा। इस बीच जमीन को लेकर कुछ मामले सुलझे। जिसमें वन विभाग की जमीन लेने पर केंद्र से स्वीकृति मिल गई, तो क्षेत्रीय उड़ान योजना के तहत जो बिड डाली गई, उस बिड में जूम एयरवेज ने मेरठ से उड़ान संचालन पर अपनी इच्छा जताई।
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एएआई के नोडल अधिकारी संत कुमार ने बताया कि प्रदेश सरकार का मेरठ से हवाई उड़ान को लेकर बहुत सकारात्मक रवैया है। वह शीघ्र ही मेरठ आकर मंडलायुक्त सुरेंद्र सिंह से मिलेंगे और हवाई उड़ान की तमाम बाधाओं को दूर करते हुए डीपीआर बनवाएंगे। हवाई उड़ान का पूरा काम मंडलायुक्त के दिशा निर्देशन में होगा, क्योंकि वह प्रदेश के नागरिक उड्डयन सचिव भी रह चुके हैं।
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वर्तमान में रनवे की ये है स्थिति
वर्तमान में मेरठ की हवाई पट्टी पर रनवे की लंबाई 1513 मीटर और चौड़ाई 23 मीटर है। 19 सीटर विमान के लिए इसकी लंबाई 1800 और चौड़ाई 30 मीटर होना जरूरी है। वर्तमान में इसके लिए पर्याप्त जमीन उपलब्ध है। वन विभाग की 12 हेक्टेयर जमीन लेने को स्वीकृति मिल चुकी है।