उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य पहुंचे मेरठ, जनता के इन सवालों के देंगे जवाब
उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य बुधवार शाम को मेरठ पहुंचे। इस दौरान केशव मौर्य सबसे पहले मोदीपुरम में जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष मनिंदर पाल सिंह के आवास पर पहुंचे। यहां उन्होंने उनके पिता की मौत पर परिजनों को सांत्वना दी।
सरकार के खजाने में क्या पश्चिम उप्र के लिए कुछ नहीं है। क्योंकि जहां मेरठ में गंगनहर पटरी मार्ग सहित आधा दर्जन प्रपोजल पर सरकार मुहर नहीं लगा पा रही है। वहीं, पुराने प्रोजेक्ट चेतावाला घाट गंगा पर पुल का निर्माण भी धन के अभाव में अटका है। पीडब्ल्यूडी विभाग केवल सड़कों की गड्ढा मुक्ति तक ही सिमटकर रह गया है। वह भी पूरी नहीं हो पा रही है। ये सवाल मेरठ की जनता के है, जिनका जवाब तो देना ही होगा।
वादे कर भूली सरकार
उप्र में भाजपा सरकार बनने के बाद सीएम योगी आदित्यनाथ और डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य कई बार मेरठ दौरे पर आए। जनता को गंगनहर की पटरी पर कांवड़ मार्ग और हस्तिनापुर क्षेत्र में चेतावाला घाट गंगा पर पुल निर्माण लोकसभा चुनाव से पहले पूरा कराने का आश्वासन दिया था। साथ ही जनपद की सड़कों को पूरी तरह गड्ढा मुक्त करने का आश्वासन दिया था। सरकार के इन आश्वासनों पर कितना खरा उतरी है, उसकी बानगी गंगनहर, गंगा पुल और टूटी सड़कों में देखी जा सकती है।
चेतावाला घाट पर गंगा पुल का निर्माण अधूरा
मेरठ और बिजनौर के बीच की दूरी कम करने के लिए 10 साल से बनाए जा रहे गंगा चेतावाला घाट पर पुल का निर्माण धन के अभाव में अधूरा पड़ा है। जिस पुल का लाभ अब से पांच साल पहले जनता को मिलना था, वह अभी तक नहीं मिल पाया है। इसके लिए सरकार ही सबसे अधिक जिम्मेदार है।
अब से पहले भी डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने मेरठ दौरे के दौरान दोनों प्रोजेक्ट का तोहफा देने का एलान किया था। जिनमें से एक भी पूरा नहीं हो पाया है। न तो पीडब्ल्यूडी ने सड़क निर्माण पूरा किया है और न ही सेतु निगम ने पुल निर्माण।
एक किमी सड़क को बता दिया तोहफा
अगर मेरठ क्षेत्र में सरकार की उपलब्धियां गिनाने की बात करें तो सरधना क्षेत्र के दौराला-मसूरी मार्ग पर एक किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण पॉलीथिन से किया गया है, जिसे लेकर सरकारी मशीनरी प्रचार-प्रसार कर रही है।
फाइलों में ही कैद है कांवड़ पटरी मार्ग
भविष्य में शहर को जाम से बचाने और गंगनहर की पटरी पर दोनों तरफ सड़क बनाने का दो साल पहले प्रपोजल तैयार किया गया था। एक तरफ पहले से ही सड़क बनी हुई है, लेकिन दूसरी तरफ सड़क बनाने के लिए तैयार किए प्रपोजल पर सरकार मोहर लगाने को तैयार नहीं है।
प्रपोजल को भी सरकार ने कई बार बदलवा दिया है। कभी गंगनहर की दायीं पटरी पर तो कभी बायीं पटरी पर सड़क बनाने का प्रपोजल बनवाया जा रहा है। 300 करोड़ से अधिक की लागत का प्रपोजल तैयार किया गया, जिसे अभी भी सरकार की मोहर लगने का इंतजार है। जनता की नजरों में सरकार कांवड़ पटरी मार्ग को लेकर समय पूरा कर रही है।
न यात्री शेड और न लगे क्रश बैरियर
मुरादनगर से मुजफ्फरनगर के बीच गंगनहर में डूबने से काफी लोगों की जान जा चुकी है। गंगनहर पर कांवड़ पटरी मार्ग पर जहां नहर किनारे क्रश बैरियर लगाने का प्रपोजल तैयार किया गया था। वहीं कांवड़ पटरी मार्ग पर यात्री शेड बनाए जाना निश्चित किया था। इनमें से कोई कार्य पूरा नहीं हो पाया है। पीडब्ल्यूडी अधिकारी विकास कार्य के लिए बजट की कमी होना बता रहे हैं।
गड्ढा मुक्ति में भी सफलता नहीं
जनता को सरकार से पूरी तरह सड़क गड्ढा मुिक्त का लाभ भी नहीं मिल पाया है। गड्ढा मुक्ति की सच्चाई जाननी है तो मेरठ की गढ़ रोड पर आनंद अस्पताल से काली नदी तक का सफर तय कर लीजिए। इसके अलावा मवाना रोड, रुड़की रोड, दिल्ली रोड, बागपत रोड गड्ढों में तब्दील है।
हालांकि, इनमें तीन मार्ग राष्ट्रीय राजमार्ग के हैं। अगर देहात की सड़कों की गड्ढा मुक्ति की बात करें तो बुरा हाल है। सरकार ने भले ही 15 नवंबर तक का समय दिया हुआ हो, लेकिन सच्चाई यह है कि सड़कों की गड्ढा मुक्ति में भी लापरवाही और घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है। सरकार की योजना को पलीता लगाने में पीडब्ल्यूूडी के अधिकारी भी कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं।
शासन से नहीं मिली स्वीकृति
गंगनहर की पटरी पर कांवड़ मार्ग सहित कई प्रपोजल बनाए गए हैं। शासन से स्वीकृति नहीं मिली है। गंगा पुल का रिवाइज बजट शासन को भेजा गया है। शासन के निर्देश पर आईआईटी रुड़की के इंजीनियरों ने मौके पर जांच की है। प्रपोजल शासन को जाना है। धन मिलते ही गंगा पुल पर सड़क निर्माण शुरू हो जाएगा। सेतु निगम का काम भी धन के अभाव में अटका पड़ा है। सड़कों की गड्ढा मुक्ति चल रही है। - संजीव भारद्वाज, अधीक्षण अभियंता, पीडब्ल्यूडी।
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