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अवैध दवा बिक्री पर रोक की मांग, मंडल आयुक्त को ज्ञापन सौंपा
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कमिश्नर से मिले जिला केमिस्ट एमडी ड्रगिस्ट एसोसिएशन के पदाधिकारी
- फोटो : संवाद
फोटो
बोले- बिना बिल और डिस्काउंट के साथ दवाएं बेचना चिंता का विषय
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। जिला मेरठ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन ने बिना लाइसेंस, बिना फार्मासिस्ट और बिना डॉक्टर के पर्चे के दवाओं की बिक्री पर रोक लगाने और सख्त कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने इस संबंध में बुधवार को मेरठ मंडल आयुक्त को एक ज्ञापन दिया।
जिला मेरठ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन ने मंडलायुक्त हृषिकेश भास्कर यशोद से कहा कि दवा एक जीवन रक्षक वस्तु है। उसकी बिक्री नियमों के विपरीत हो रही है। बिना बिल और डिस्काउंट के साथ दवाएं बेचना चिंता का विषय है। ज्ञापन में सात मांगें रखी गई हैं। पहली, औषधि व खाद्य विभाग और जीएसटी अधिकारियों की संयुक्त टीम द्वारा कस्बों और देहातों में मेडिकल स्टोरों की नियमित जांच कराई जाए। दूसरी, सभी स्टोरों पर ड्रग लाइसेंस और फार्मासिस्ट का नाम व रजिस्ट्रेशन साइन बोर्ड पर प्रदर्शित करने के निर्देश दिए जाएं।
तीसरी, हस्तलिखित बिलों को अमान्य करने और केवल कंप्यूटर बिल स्वीकार किए जाएं। चौथी, 31 मार्च 2025 तक जिले के लाइसेंस धारकों की सूची जारी की जाए। पांचवीं, दवा के रूप में बिकने वाले फूड प्रोडक्ट्स की गुणवत्ता जांच और पुरानी सैंपलिंग रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए। छठी, फार्मासिस्टों को एप्रन और नेम बैज पहनने का नियम लागू किया जाए। सातवीं, हाल ही में पकड़ी गई 20 लाख की नशीली दवाओं की खरीद-बिक्री की जांच की जाए। इस दौरान महामंत्री रजनीश कौशल, गुड्डू, राजीव ग्रोवर, योगेंद्र प्रधान, हेमंत बंसल और सुनील अग्रवाल आदि मौजूद रहे।
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बोले- बिना बिल और डिस्काउंट के साथ दवाएं बेचना चिंता का विषय
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। जिला मेरठ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन ने बिना लाइसेंस, बिना फार्मासिस्ट और बिना डॉक्टर के पर्चे के दवाओं की बिक्री पर रोक लगाने और सख्त कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने इस संबंध में बुधवार को मेरठ मंडल आयुक्त को एक ज्ञापन दिया।
जिला मेरठ केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन ने मंडलायुक्त हृषिकेश भास्कर यशोद से कहा कि दवा एक जीवन रक्षक वस्तु है। उसकी बिक्री नियमों के विपरीत हो रही है। बिना बिल और डिस्काउंट के साथ दवाएं बेचना चिंता का विषय है। ज्ञापन में सात मांगें रखी गई हैं। पहली, औषधि व खाद्य विभाग और जीएसटी अधिकारियों की संयुक्त टीम द्वारा कस्बों और देहातों में मेडिकल स्टोरों की नियमित जांच कराई जाए। दूसरी, सभी स्टोरों पर ड्रग लाइसेंस और फार्मासिस्ट का नाम व रजिस्ट्रेशन साइन बोर्ड पर प्रदर्शित करने के निर्देश दिए जाएं।
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तीसरी, हस्तलिखित बिलों को अमान्य करने और केवल कंप्यूटर बिल स्वीकार किए जाएं। चौथी, 31 मार्च 2025 तक जिले के लाइसेंस धारकों की सूची जारी की जाए। पांचवीं, दवा के रूप में बिकने वाले फूड प्रोडक्ट्स की गुणवत्ता जांच और पुरानी सैंपलिंग रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए। छठी, फार्मासिस्टों को एप्रन और नेम बैज पहनने का नियम लागू किया जाए। सातवीं, हाल ही में पकड़ी गई 20 लाख की नशीली दवाओं की खरीद-बिक्री की जांच की जाए। इस दौरान महामंत्री रजनीश कौशल, गुड्डू, राजीव ग्रोवर, योगेंद्र प्रधान, हेमंत बंसल और सुनील अग्रवाल आदि मौजूद रहे।
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