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यूपी: स्वच्छता सर्वे में फर्स्ट आने को 18 करोड़ में खरीदीं कूड़ा गाड़ी, खुद हो रहीं कबाड़

Tue, 30 Oct 2018 12:14 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Updated Tue, 30 Oct 2018 12:14 PM IST
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crores of garbage cars for clean india survey in meerut city UP are not in use
मेरठ न्यूज

स्वच्छ भारत मिशन और स्वच्छता सर्वेक्षण पर सरकारी खजाने की लगातार सफाई हो रही है। कई करोड़ रुपये योजना पर खर्च हो गए लेकिन न तो शहर साफ हो पाया है और न ही सरकार की मंशा के अनुरूप कार्य हुआ।

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यही नहीं, निगम प्रशासन ने करोड़ों रुपये से कूड़ा वाहन खरीदे जिनमें से काफी वाहन डिपो की चारदीवारी में कैद हैं। इन वाहनों को सड़कों पर उतारने की निगम के पास फिलहाल योजना भी नहीं है। यही कारण है कि नए वाहन कूड़ा होना शुरू हो गए हैं। 
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नगर निगम ने तीन माह पहले 90 छोटी कूड़ा गाड़ियां, 22 ट्रैक्टर और ट्रॉलियां, तीन जेसीबी, सड़क स्वीपिंग मशीन, पोर्कलेन मशीनें खरीदी थीं। वाहनों की खरीद पर लगभग 18 करोड़ रुपया खर्च बताया जा रहा है।
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इनमें से कुछ वाहन तो नगर निगम ने आनन-फानन में बगैर कार्ययोजना के ही सड़क पर उतार दिए, जो शहर में दौड़ते तो दिखाई दे रहे हैं लेकिन उनका स्वच्छता अभियान में योगदान नहीं दिख रहा है। बाकी निगम डिपो की चारदीवारी में खड़े बाकी वाहन कब बाहर निकलेंगे, इसका जवाब किसी के पास नहीं है।

crores of garbage cars for clean india survey in meerut city UP are not in use
मेरठ न्यूज

ट्रैक्टरों में नहीं हैं जरूरी पार्ट्स 

नगर निगम के दिल्ली रोड, सूरजकुंड और कंकरखेड़ा वाहन डिपो पर 22 ट्रैक्टर-ट्रॉलियां खड़ी हैं। ट्रैक्टर के साथ ट्रॉली जोड़ने के लिए ट्रैक्टर का पार्ट हिच और ड्रोवार जरूरी होता है। कूड़ा उठाने वाली ट्रॉली में हाईड्रॉलिक पंप की भी आवश्यकता होती है। इन सभी ट्रैक्टरों को तीन माह पहले खरीदा गया था।

अभी तक एक भी ट्रैक्टर में हिच, ड्रोवार और हाईड्रॉलिक पंप से पाइप लाइन नहीं है। यही कारण है कि तीन माह से सभी ट्रैक्टर-ट्रॉली डिपो में ही खड़े हैं। इन सभी पर धूल चढ़ गयी है। अधिक समय तक न चलने के कारण इनमें कहीं न कहीं दिक्कतें आना तय है। 

शहर को कूड़ा मुक्त करने के लिए खरीदे थे वाहन 

शहर को कूड़े से मुक्ति दिलाने के लिए 14वें वित्त आयोग के खजाने से निगम के कूड़ा वाहनों की खरीद की गयी थी। कमिश्नर की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में निगम ने वाहन खरीद के प्रस्ताव पास कराए थे जिसमें निगम प्रशासन ने वाहनों से शहर की स्वच्छता में चार चांद लगाने का आश्वासन दिया था। वाहन खरीद तो हुई लेकिन स्वच्छता के प्रति किए गए वादे भूल गए।

पार्ट आएंगे तो वाहन चलेंगे 

ट्रैक्टरों में कई जरूरी पार्ट नहीं हैं। इनके बगैर ट्रैक्टर-ट्रॉलियों का चलना संभव नहीं है। इसकी जानकारी नगरायुक्त को दे दी गयी है। पार्ट आएंगे तो वाहन चलेंगे। हो सकता है जिस कंपनी से ट्रैक्टरों की खरीद हुई है, उसी कंपनी से पार्ट्स लिए जा रहे हों।  - डॉ. कुंवरसेन, नगर स्वास्थ्य अधिकारी 

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