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वेस्ट के जिलों में चंदन की लकड़ी के सेफ अड्डे
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
Updated Fri, 22 Jan 2016 02:22 AM IST
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वेस्ट यूपी के जिलों में चंदन की लकड़ी का सेफ अड्डा बना हुआ है। खरखौदा-मोहिउद्दीनपुर मार्ग पर गोदाम में मिली 40 करोड़ रुपये की लकड़ी की जांच में खुलासा हुआ है।
चंदन की लकड़ी के सौदागर ने यूपी के कई जिलों में अपना ऑफिस खोला हुआ है। फर्जी दस्तावेज तैयार कर लकड़ी का कारोबार चलता है, जिसमें वन विभाग के अफसरों और कर्मचारियों की भूमिका भी संदिग्ध है।
खरखौदा-मोहिउद्दीनपुर मार्ग पर चार दिन पूर्व एक गोदाम से करीब 150 कुंतल चंदन की लकड़ी बरामद हुई थी। लंबी जांच के बाद उसकी कीमत करीब 40 करोड़ रुपये आंकी गई। एसएसपी ने एसओ खरखौदा को मामले की गंभीरता से जांच कराने को कहा। चंदन की लकड़ी का सौदागर सुचित सिंघल है।
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पुलिस ने जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। एसओ खरखौदा पीयूष दीक्षित ने बताया कि चंदन की लकड़ी मध्य प्रदेश के राजनमपट फॉरेस्ट से आयी है। दो साल पहले 50 करोड़ की लकड़ी के दस्तावेज बने, जिसमें लकड़ी को ले जाने का परमिट आंध्रप्रदेश के तिरुपति के लिए था। लेकिन सौदागर ने फर्जी दस्तावेज बनाए और चंदन की लकड़ी का कारोबार पूरे देश में फैला दिया।
फर्जी निकली हैंडीक्राफ्ट संस्था
पुलिस के मुताबिक फोन पर सौदागर सुचित सिंघल ने बताया कि हरियाणा में हैंडीक्राफ्ट के नाम से उसने एक संस्था खोली हुई है। जिसमें चंदन की लकड़ी सप्लाई होना बताया। पुलिस की जांच सब कुछ फर्जी निकला।
हिसार समेत आठ जगह है ऑफिस
सौदागर सुचित के हिसार और वेस्ट यूपी में आठ जगह पर ऑफिस हैं। जिसमें केवल चंदन की लकड़ी की डीलिंग होती थी। चंदन कहां और कितना भेजना है, यह सब ऑफिस से आर्डर दिया जाना बताया। पुलिस ने हरियाणा में भी दबिश दी, लेकिन सुराग नहीं लगा। पुलिस की एक टीम सोनीपत गई है। सुचित की लोकेशन सोनीपत में ही बतायी गई है।
कुंडुर के रास्ते आता चंदन
आंध्रप्रदेश के कुंडुर के रास्ते से चंदन की लकड़ी भारी संख्या में उत्तर प्रदेश में आती है। उसके बाद कई जनपदों में अलग-अलग जगहों पर चंदन की लकड़ी रखी जाती है। कई जगह ऑनलाइन सप्लाई की भी व्यवस्था है। सौदागर ने अधिकांश गोदाम देहात इलाके में ले रखे हैं।
वन विभाग की भूमिका संदिग्ध
वेस्ट में चंदन की लकड़ी का बड़ा कारोबार वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका पर सवाल उठा रहा है। चार दिन बीतने के बावजूद भी वन विभाग ने 40 करोड़ की लकड़ी के मामले में गंभीरता नहीं दिखायी। इस मामले में वन मंत्री द्वारा अधिकारियों को फटकार लगाना भी बताया गया है। इस कारोबार में किस अधिकारी की भूमिका है, इसी जांच चल रही है।
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चंदन की लकड़ी के सौदागर ने यूपी के कई जिलों में अपना ऑफिस खोला हुआ है। फर्जी दस्तावेज तैयार कर लकड़ी का कारोबार चलता है, जिसमें वन विभाग के अफसरों और कर्मचारियों की भूमिका भी संदिग्ध है।
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खरखौदा-मोहिउद्दीनपुर मार्ग पर चार दिन पूर्व एक गोदाम से करीब 150 कुंतल चंदन की लकड़ी बरामद हुई थी। लंबी जांच के बाद उसकी कीमत करीब 40 करोड़ रुपये आंकी गई। एसएसपी ने एसओ खरखौदा को मामले की गंभीरता से जांच कराने को कहा। चंदन की लकड़ी का सौदागर सुचित सिंघल है।
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पुलिस ने जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। एसओ खरखौदा पीयूष दीक्षित ने बताया कि चंदन की लकड़ी मध्य प्रदेश के राजनमपट फॉरेस्ट से आयी है। दो साल पहले 50 करोड़ की लकड़ी के दस्तावेज बने, जिसमें लकड़ी को ले जाने का परमिट आंध्रप्रदेश के तिरुपति के लिए था। लेकिन सौदागर ने फर्जी दस्तावेज बनाए और चंदन की लकड़ी का कारोबार पूरे देश में फैला दिया।
फर्जी निकली हैंडीक्राफ्ट संस्था
पुलिस के मुताबिक फोन पर सौदागर सुचित सिंघल ने बताया कि हरियाणा में हैंडीक्राफ्ट के नाम से उसने एक संस्था खोली हुई है। जिसमें चंदन की लकड़ी सप्लाई होना बताया। पुलिस की जांच सब कुछ फर्जी निकला।
हिसार समेत आठ जगह है ऑफिस
सौदागर सुचित के हिसार और वेस्ट यूपी में आठ जगह पर ऑफिस हैं। जिसमें केवल चंदन की लकड़ी की डीलिंग होती थी। चंदन कहां और कितना भेजना है, यह सब ऑफिस से आर्डर दिया जाना बताया। पुलिस ने हरियाणा में भी दबिश दी, लेकिन सुराग नहीं लगा। पुलिस की एक टीम सोनीपत गई है। सुचित की लोकेशन सोनीपत में ही बतायी गई है।
कुंडुर के रास्ते आता चंदन
आंध्रप्रदेश के कुंडुर के रास्ते से चंदन की लकड़ी भारी संख्या में उत्तर प्रदेश में आती है। उसके बाद कई जनपदों में अलग-अलग जगहों पर चंदन की लकड़ी रखी जाती है। कई जगह ऑनलाइन सप्लाई की भी व्यवस्था है। सौदागर ने अधिकांश गोदाम देहात इलाके में ले रखे हैं।
वन विभाग की भूमिका संदिग्ध
वेस्ट में चंदन की लकड़ी का बड़ा कारोबार वन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका पर सवाल उठा रहा है। चार दिन बीतने के बावजूद भी वन विभाग ने 40 करोड़ की लकड़ी के मामले में गंभीरता नहीं दिखायी। इस मामले में वन मंत्री द्वारा अधिकारियों को फटकार लगाना भी बताया गया है। इस कारोबार में किस अधिकारी की भूमिका है, इसी जांच चल रही है।