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हरियाली के ‘हत्यारे’ गैंग का पर्दाफाश

Fri, 08 Feb 2019 02:05 AM IST
Gaurav sharma न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Gaurav sharma Updated Fri, 08 Feb 2019 02:05 AM IST
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hariyali murder busted gang
मेरठ - फोटो : meerut
करीब दो साल से हरियाली के दुश्मन बने गैंग का जानी थाना पुलिस ने खुलासा किया है। यह गिरोह मेरठ समेत आसपास के जिलों में शाम ढलते ही कीमती पेड़ों को काटकर हरियाणा के गोहाना और यमुनानगर में बेचता था। तीन सगे भाइयों समेत छह आरोपियों को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार किया गया है। दो आरोपी फरार हैं। पुलिस ने बिजली चलित आरी, तीन कुल्हाड़ी, लोहे की तीन आरियां, दो तमंचे, बोलेरो पिकअप बरामद की है।
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एसपी देहात राजेश कुमार ने बृहस्पतिवार को प्रेसवार्ता में बताया कि काफी समय से सूचना मिल रही थी कि गंग नहर पटरी, जानी, रोहटा और हस्तिनापुर क्षेत्र में रात में पेड़ काटे जा रहे हैं। मुखबिर तंत्र से पता चला कि किसी गाड़ी में सवार कुछ लोग जानी क्षेत्र में लगातार पेड़ों को काट रहे हैं। बुधवार रात जानी पुलिस सटीक सूचना जानी के जंगल में पहुंच गई। पुलिस ने वहां मौजूद पिकअप को रोकने की कोशिश की तो बदमाशों ने गाड़ी दौड़ा दी। जानी से सरधना रोड की तरफ घेराबंदी के दौरान बदमाशों से मुठभेड़ हो गई। इस दौरान छह बदमाशा दबोचे गए, दो आरोपी भाग निकले।
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मेरठ से सहारनपुर तक मार
एसपी देहात के अनुसार गिरोह का सरगना मुनीफ उर्फ फरमान निवासी रसूलपुर धौलड़ी थाना जानी है। मुनीफ ने बताया कि वह अपने दो भाइयों नवाब और मुन्ना के साथ मिलकर करीब दो साल से पेड़ों को चोरी से काटता आ रहा था। सबसे ज्यादा उन्होंने हस्तिनापुर, बहसूमा, जानी, रोहटा, सरधना, सरूरपुर और किठौर के जंगल के अलावा शामली, मुजफ्फरनगर, बिजनौर और सहारनपुर में पेड़ काटे हैं। वह पिकअप के अलावा एक कैंटर भी रखते थे। जिन पेड़ों को काटना होता था, उनकी दिन में ही रेकी कर लेते थे। उसके बाद रात में पेड़ को जमीन से सटाकर तना काटते थे, उसके बाद मिट्टी कर देते थे जिससे पुलिस या वन विभाग को पता न चल सके। पेड़ की पत्तियों को आसपास फैला देते थे। मुनीफ का दावा है कि वह एक हजार से ज्यादा पेड़ काट चुके हैं।
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तीस हजार में बेचते थे शीशम की लकड़ी
गैंग के सरगना ने बताया कि शीशम के पेड़ को काटकर गाड़ी में लादने में 40 मिनट से डेढ़ घंटा लगता था। शीशम की लकड़ी को वह 25 से 30 हजार में बेचते थे। जबकि जामुन की लकड़ी को 15 हजार में बेचते थे। यूकेलिप्टस का पेड़ दस हजार रुपये में बेचते थे। जिस पेड़ का तना सीधा होता था उस लकड़ी की ज्यादा मांग रहती थी और आसानी से बेची जाती थी। ऐसे ही पेड़ों को काटा जाता था।
500 रुपये देते थे रिश्वत
मुनीफ और उसके साथी सोनू ने बताया कि उन्होंने नहर पटरी मार्ग, सड़क किनारे और घने जंगल में सबसे ज्यादा सरकारी पेड़ों को निशाना बनाया। हरियाणा में की सीमा में जब लकड़ी ले जाते थे तो हरियाणा पुलिस को पांच सौ रुपये देते थे, जिससे के बाद वहां की पुलिस लकड़ी के बारे में नहीं पूछते थे।

चोरी और लूट को भी दिया अंजाम
पकड़े गये आरोपियों पर कई थानों में चोरी और लूट के भी करीब 18 मामले दर्ज हैं। मुनीफ पूर्व में चोरी के मामले में जेल जा चुका है। मुनीफ ने बताया कि शाम को वह देहात क्षेत्र में बाइक पर अकेले युवक या दंपति को लूट लेते थे। सरधना नहर पटरी पर बीस दिन पहले दंपति से तीन हजार रुपये और मोबाइल लूटा था। चोरी की भी कई घटनाएं कबूल की हैं।
ये हैं गिरफ्तार आरोपी
मुनीफ उर्फ फरमान पुत्र हनीफ निवासी रसूलपुर धौलड़ी, जानी मेरठ
सोनू पुत्र पप्पू निवासी खुव्वा पट्टी बावली, बागपत
दिलशाद पुत्र ननवा निवासी भनवाड़ा, जिला मुजफ्फरनगर
नवाब पुत्र हनीफ निवासी रसूलपुर धौलड़ी, जानी मेरठ
मुन्ना पुत्र हनीफ निवासी रसूलपुर धौलड़ी, जानी मेरठ
सलमान पुत्र मुन्ना निवासी सिवालखास, जानी मेरठ
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