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मेरठ: एसपी के वायरल वीडियो पर एडीजी की सफाई, बताया साजिश का हिस्सा

Sat, 28 Dec 2019 12:54 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: कपिल kapil Updated Sat, 28 Dec 2019 12:54 PM IST
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CAA Protest, SP city Akhilesh Narayan said rioters should go other countries after Meerut violence
adg prashant kumar - फोटो : अमर उजाला

मेरठ में एसपी सिटी अखिलेश नारायण सिंह का एक वीडियो वायरल होने के बाद राजनीति तेज हो गई है। जहां प्रियंका गांधी ने इस वीडियो को ट्वीट करते हुए सवाल खड़ा किया है। तो वहीं एसपी सिटी डॉ. अखिलेश नारायण सिंह ने सफाई देते हुए कहा कि पाकिस्तान के पक्ष में नारे लगाने वाले उपद्रवियों को हमने वहां से भगाया। उधर, एडीजी प्रशांत कुमार कहना है कि पुलिसकर्मियों की तरफ से कोई गोलीबारी नहीं हुई। 

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वहीं मेरठ जोन के एडीजी प्रशांत कुमार ने भी एसपी का बचाव करते हुए कहा है कि वायरल हुई वीडियो बीते 20 दिसंबर को मेरठ शहर में हुए उपद्रव के बाद की है। उन्होंने बताया कि इसमें तथ्य यह है कि वहां भारत विरोधी एवं पड़ोसी देश जिंदाबाद के नारे लग रहे थे और कुछ लोग पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) और सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (एसडीपीआई) के आपत्त्तिजनक पर्चे बांट रहे थे। 
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इस सूचना पर एसपी सिटी एवं एडीएम सिटी मौके पर गए थे। उन्होंने उपद्रवियों से कहा था आप जाना चाहते हैं तो कहीं भी जाए लेकिन यहां उपद्रव ना करें। उन्होंने कहा कि घटना के एक सप्ताह बाद इस तरह के वीडियो वायरल होना विशेषकर जब कल शुक्रवार को शांति थी, एक साजिश का हिस्सा है ताकि यहां के हालात सामान्य ना हो पाएं।
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इस संबंध में स्थानीय मीडिया को सफाई देते एसपी सिटी ने कहा कि जो कुछ भी वीडियो में सुना गया है वह प्रदर्शनकारियों के उस समूह को जवाब था जो पाकिस्तान के समर्थन में ‘पाकिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लगे रहे थे।

 

प्रियंका गांधी ने भाजपा पर साधा निशाना

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने मेरठ के एसपी सिटी अखिलेश नारायण सिंह के वारयल वीडियो को लेकर सवाल खड़ें किए हैं। उन्होंने कहा कि 'भारत का संविधान किसी भी नागरिक के साथ इस भाषा के प्रयोग की इजाजत नहीं देता और जब आप अहम पद पर बैठे अधिकारी हैं तब तो जिम्मेदारी और बढ़ जाती है।' 'भाजपा ने संस्थाओं में इस कदर साम्प्रदायिक जहर घोला है कि आज अफसरों को संविधान की कसम की कोई कद्र ही नहीं है।'

वायरल हुआ एक मिनट 43 सेकेंड का वीडियो

नागरिकता संशोधन कानून को लेकर 20 दिसंबर को मेरठ शहर में हुए उपद्रव के बाद सोशल मीडिया पर एक अफसर का वीडियो वायरल हो रहा है। जिसमें वह अटपटे बोल बोलते हुए दिख रहे हैं। वीडियो एक मिनट 43 सेकेंड का है।  

अफसर के हाथ में डंडा और हेलमेट है। बॉडी प्रोटेक्टर जैकेट पहनकर गली में जाते दिखाई पड़ रहे हैं। वह मोबाइल से वीडियो बनाते हुए गली में वापस मुड़ते हैं। एक समुदाय के लोगों से कहते हैं कि जो हो रहा है वह ठीक नहीं है। इस पर वहां खड़ा एक व्यक्ति कहता है कि जो लोग माहौल बिगाड़ रहे हैं, वह गलत हैं। इस पर अफसर कहते हैं कि उनको कह दो वह दूसरे मुल्क चले जाएं। कोई गलत बात मंजूर नहीं होगी।

इस दौरान उन्होंने कहा, यह गली मुझे याद हो गई है। जो एक बार याद कर लेता हूं तो उसे भूलता नहीं हूं। एक- एक आदमी को जेल भेज दूंगा। सुन लिया न। इसके बाद वह फोर्स के साथ चले जाते हैं।

एसपी सिटी डॉ. अखिलेश नारायण सिंह ने बताया कि एडीएम सिटी अजय तिवारी और मैं पुलिस फोर्स के साथ जब वहां पहुंचे तो कुछ उपद्रवी पाकिस्तान के पक्ष में नारे लगा रहे थे। मैंने इतना कहा कि अगर पाकिस्तान के पक्ष में नारे लगा रहे हो तो फिर वहीं चले जाओ। इसके अलावा कुछ नहीं कहा। 

एडीजी प्रशांत कुमार कहना है कि अगर स्थिति सामान्य होती तो शायद शब्दों का चुनाव बेहतर हो सकता था, लेकिन उस दिन स्थिति बेहद अस्थिर थी। उन्होंने कहा हमारे अधिकारियों ने बहुत संयम दिखाया, पुलिस द्वारा कोई गोलीबारी नहीं हुई।

उल्लेखनीय है कि नागरिकता संसोधन कानून के विरोध में मेरठ में 20 दिसंबर को भारी बवाल हुआ था। मेरठ में गोली लगने से पांच युवकों की मौत हो गई थी। उपद्रवियों ने पुलिस की दो दर्जन से ज्यादा गाड़ियों को फूंक दिया था। जमकर पथराव और फायरिंग की गई। जवाबी कार्रवाई में पांच उपद्रवियों की गोली लगने से मौत हो गई थी, जबकि तीन-चार उपद्रवी गोली लगने से घायल हुए थे। इसके साथ ही तीन सिपाहियों को भी गोली लगी थी। पथराव में डीएम, एसएसपी, एसपी सिटी और एडीएम सिटी समेत कई पुलिसकर्मी चोटिल हो गए थे।

मेरठ में उपद्रव होने का इनपुट था। जुमे की नमाज को देखते हाई अलर्ट घोषित किया गया था। दोपहर करीब दो बजे कोतवाली स्थित जामा मस्जिद से नमाज के बाद लोगों की भीड़ सीएए के विरोध में काली पट्टी बांधकर प्रदर्शन करते हुए बाहर निकली। पुलिस फोर्स ने उनको रोकने की कोशिश की तो भीड़ ने नारेबाजी शुरू कर दी। पुलिस ने लाठीचार्ज कर भीड़ को खदेड़ दिया था। उसके बाद 15-20 उपद्रवी लिसाड़ीगेट चौराहे पर पहुंचकर हंगामा करने लगे। भीड़ बढ़ती गई। जिसके बाद उपद्रवियों ने पुलिस पर पथराव और फायरिंग करनी शुरू कर दी थी।

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