यूपी शर्मसार: मामले की लखनऊ तक गूंज, राज्य महिला आयोग ने जाना पीड़िता का हाल, कोर्ट में बयान दर्ज
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बागपत जिले में कक्षा तीन की छात्रा से सामूहिक दुष्कर्म के मामले की गूंज लखनऊ तक पहुंच गई है। उप्र महिला आयोग की सदस्य राखी त्यागी ने जिला अस्पताल पहुंचकर दुष्कर्म पीड़ित छात्रा से बातचीत की। उन्होंने पीड़ित परिवार को दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कराने का भरोसा दिलाया। वहीं सीओ सिटी ओमपाल सिंह ने भी प्रकरण की जांच शुरू कर दी है। रमाला पुलिस ने न्यायालय में छात्रा के बयान दर्ज कराए। जिला अस्पताल से छात्रा को महिला अस्पताल में शिफ्ट कर दिया है। सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस तैनात है।
बुधवार को उप्र महिला आयोग की सदस्य राखी त्यागी ने जिला अस्पताल में पहुंचकर सामूहिक दुष्कर्म पीड़ित छात्रा व उसके परिजनों से मुलाकात कर मामले की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि स्कूल में मासूम छात्रा के साथ सामूहिक दुष्कर्म की घटना शर्मसार कर देने वाली है। पुलिस व शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने मामले में तुरंत कार्रवाई नहीं की। 15 दिनों तक मामला दबाने के प्रयास में पुलिस लगी रही। पूरे प्रकरण की गहराई से जांच कराने के लिए पुलिस अधिकारियों को निर्देशित किया। जांच में दोषी पाए जाने पर सख्त कार्रवाई कराई जाए। सीओ सिटी ओमपाल सिंह ने प्रकरण में जांच शुरू कर दी है। एसआई अमन सिंह को विवेचना दी गई है। बुधवार को पुलिस ने छात्रा को न्यायालय में पेश कर 164 के बयान दर्ज कराए। बयान दर्ज कराने के बाद पुलिस ने छात्रा को वापस अस्पताल पहुंचाया। चिकित्सकों ने जिला अस्पताल से छात्रा को महिला अस्पताल में शिफ्ट कर दिया है। उसकी हालत में सुधार है। सुरक्षा की दृष्टि से पुलिस तैनात है।
यह था मामला
रमाला थाना क्षेत्र के एक स्कूल में 16 अगस्त को कक्षा तीन की छात्रा से बाथरूम में तीन सगे भाइयों ने सामूहिक दुष्कर्म किया था। तीनों भाई स्कूल में कक्षा तीन, चार व पांच में पढ़ते थे। पिता की तहरीर पर पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मुमदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने तीनों छात्रों को गिरफ्तार कर बाल संप्रेक्षण गृह मेरठ भेज दिया। एसपी प्रताप गोपेंद्र यादव ने थानाध्यक्ष नरेश कुमार को लाइन हाजिर कर दिया था। सीओ सिटी ओमपाल सिंह को जांच सौंपी की गई थी।
शिक्षिक-शिक्षिकाओं की भूमिका की जांच
निलंबित किए गए शिक्षक-शिक्षिकाओं की भूमिका की जांच भी की जा रही है। अभी तक की पुलिस जांच में शिक्षकों की लापरवाही उजागर हो चुकी है। पीड़ितों ने यह भी कहा कि कुछ लोगों ने उन्हें रुपये देने की पेशकश की थी।
रमाला थाना पुलिस सवालों के घेरे में
सामूहिक दुष्कर्म के मामले में तत्कालीन थानाध्यक्ष ने अदूरदर्शिता से काम लिया। जांच में कई तथ्य सामने आए हैं। अभी तक यह सामने आया है कि पुलिस ने मामले को फर्जी बताते हुए पीड़ित परिवार पर फैसले का दबाव बनाया था। पुलिस अफसरों को झूठा आरोप बताकर गुमराह किया। मेडिकल रिपोर्ट में दुष्कर्म की पुष्टि होने के बाद उनकी लापरवाही सामने आई।
खेल-खेल में जघन्य वारदात बेहद शर्मनाक
महिला आयोग की सदस्य ने कहा कि जिस तरह खेल-खेल में बच्चे ऐसा काम कर जाते हैं यह बेहद शर्मनाक और सोचनीय है। जिस तरह वारदात हुई है, वह बेहद चिंतित करने वाला है। उन्होंने बताया कि स्कूल में पढ़ने वाले छोटे-छोटे बच्चे इस तरह की घटनाएं कर रहे हैं, यह समाज के लिए ठीक नहीं है।
आरोपियों के पिता बोले, उनके बच्चे निर्दोष
आरोपी छात्रों के पिता का कहना है कि तीनों बच्चे निर्दोष हैं। सीएम योगी आदित्यनाथ और मानवाधिकार आयोग को पत्र भेजा गया है। गलत तरीके से उन्हें फंसाया गया है। छात्रा के परिवार ने इस प्रकरण में पहले समझौता कर लिया, लेकिन इसके बाद अचानक वह छात्रा को लेकर अस्पताल पहुंच गए। पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। जिसके बाद दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।
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