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बच्चों के पुष्टाहार में गोलमाल

Sat, 23 Apr 2016 02:23 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/मेरठ
अमर उजाला ब्यूरो/मेरठ Updated Sat, 23 Apr 2016 02:23 AM IST
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children Pushtahar
ई-रिक्शा में लादते कट्टे। बाद में इन्हें बनीसराय ले जाया गया। - फोटो : अमर उजाला
बच्चों की मुस्कराहट हर बोझिल मन को खुशियों से लबरेज करने का दम रखती हैं, लेकिन सरकारी अमला उनके हिस्से का पुष्टाहार हजम कर इस मुस्कराहट को फीकी करने पर आमदा है। लाखों रुपये खर्च करके मासूमों के लिए शासन की ओर से आंगनबाड़ी केंद्रों पर पुष्टाहार भेजा जाता है। यह पुष्टाहार केंद्रों पर पहुंचने से पहले ही बीच रास्ते में कालाबाजारी की भेंट चढ़ जाता है। विधानसभा तक में यह मामला उठा, लेकिन नतीजा सिफर ही रहा। बाल विकास विभाग से जुड़े अधिकारियों, कर्मचारी और आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों का पूरा अमला मिलीभगत के इस खेल में शामिल है। 
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केसरगंज स्थित पंचायत भवन की बिल्डिंग में बाल विकास परियोजना अधिकारी का कार्यालय और गोदाम है। शुक्रवार को अमर उजाला माय सिटी टीम सूचना पर वहां पहुंची। बाहर ट्रक से उतारे जा रहे सत्तू के बोरों में से कुछ गोदाम में रखे जा रहे थे। कुछ बोरे ई-रिक्शा और ठेलों में लादकर भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ाने का प्रयास किया जा रहा था। मीडियाकर्मियों ने ई-रिक्शा का बनीसराय तक पीछा किया। सत्तू के बोरे यहां डेरियों में सप्लाई किए जा रहे थे। टीम बाल विकास परियोजना अधिकारी कार्यालय पर मामले की जानकारी लेने पहुंची तो बाल विकास परियोजना अधिकारी के छुट्टी पर होने की जानकारी दी गई।
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यहां पर सुपरवाइजर नीता गर्ग सहित 6-7 महिलाएं मिली। नीता गर्ग ने बताया कि शहर में सप्लाई किया जा रहा पुष्टाहार सत्तू उनकी देखरेख में कार्यकत्रियों को दिया जा रहा है। शुक्रवार को रशीद नगर, शकूरनगर, तारापुरी, सद्दीकनगर, बागड़यान में 10-10 बोरे और माधवपुरम में 100 बोरे भेजे गए हैं। 
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बदतर स्थिति है केंद्रों की 
आंगनबाड़ी
केंद्रों पर छह माह से तीन वर्ष तक के बच्चों को शासन की ओर से पुष्टाहार उपलब्ध कराया जाता है।  सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर कार्यकत्री तैनात हैं। इनके वेतन पर लाखों रुपये का खर्च हो रहा है। लेकिन आंगनबाड़ी केंद्रों पर धरातल की स्थिति किसी से छुपी नहीं है। कई जगह आंगनबाड़ी केंद्र ही गायब हैं। अधिकांश आंगनबाड़ी केन्द्रों पर बच्चे ही नहीं हैं। बाल विकास परियोजना विभाग के रिकार्ड के अनुसार महानगर में 315 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। 

 
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