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ड्रिल में 3 गढ़वाल राइफल बनी चैंपियन

Fri, 08 Apr 2016 02:31 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/मेरठ
अमर उजाला ब्यूरो/मेरठ Updated Fri, 08 Apr 2016 02:31 AM IST
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champion in the Garhwal Rifles Drill 3
इंटर बटालियन ड्रिल प्रतियोगिता मंे हिस्सा लेता दल। - फोटो : अमर उजाला
देश के जांबाजों की ताकत अनुशासन होती है। अनुशासन की यह तारतम्यता सैनिकों में ड्रिल के दौरान देखी जा सकती है। बृहस्पतिवार को आरवीसी परेड ग्राउंड में जांबाजों ने अनुशासन की इसी श्रृंखला का बेहतरीन प्रदर्शन चार्जिंग रैम इंटर बटालियन ड्रिल प्रतियोगिता 2015-16 में किया। इसमें 3 गढ़वाल राइफल को विजेता बनी। मुख्य अतिथि चार्जिंग रैम डिविजन के मेजर जनरल आरपी सिंह रहे। उन्होंने
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विजेताओं को पुरस्कृत किया। 
चार
दिवसीय ड्रिल प्रतियोगिता 4 अप्रैल से शुरू हुई थी। इसमें चार्जिंग रैम की 17 यूनिट के दलों ने प्रतिभाग किया। इसमें तीन स्तर पर प्रत्येक दल की शक्ति का परखा गया। इसके आधार पर 3 गढ़वाल राइफल को विजेता और 23 पंजाब रेजीमेंट को उपविजेता बनने का अवसर मिला।

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3/5 गोरखा राइफल को तीसरा स्थान प्राप्त हुआ। सभी प्रतिभागी बटालियन ने अपने परेड कमांडर के आदेश पर मार्च किया। बटालियन के उत्साह, निष्ठा और दृढ़ता की दर्शकों ने सराहना भी की। मुख्य अतिथि ने कहा कि ड्रिल की मदद से फौज के जवानों में गौरव, साझापन और सहकारिता जैसे गुणों का विकास होता है। थ्री गढ़वाल के पाइप बैंड ने प्रस्तुति देकर सभी को मंत्रमुग्ध किया।

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तीन स्तर पर हुई प्रतियोगिता
पहला
स्तर ट्रनाउट चैक का हुआ। इसमें प्रत्येक दल में मौजूद एक अफसर, तीन जीओसी, 47 अन्य पदों के जवान शामिल थे। 200 प्वाइंट के इस चरण में प्रतिभागियों की ड्रेस, चाल, पदक आदि की जांच की गई। इसके बाद सटीक राइफल ड्रिल का प्रदर्शन हुआ।

सैन्य बैंड की धुनों पर मार्चपास्ट हुआ। इसमें मार्च के समय तेज-धीरे चलना, जवानों का तालमेल, सलामी का तरीका आदि की जांच की गई। इसके बाद वर्ड ऑफ कमांड को परखा गया। जिसमें जवान के अपने साथियों को निर्देश देने के तरीके की परख होती हैं। इसके लिए प्रत्येक दल को 40 मिनट का समय मिलता है। ड्रिल के लिए 22 से 25 मिनट दिए जाते हैं। यह प्रतियोगिता कुल 1000 प्वाइंट की होती है। जिसमें 5 जजों के पैनल ने अंक देकर विजेता घोषित किया किए।

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