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Meerut News: 24 अवतारों के वर्णन के बीच श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की धूम
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मेरठ। जागृति विहार एक्सटेंशन पर वेदांत सत्संग समिति द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा सप्ताह के छठे दिन बृहस्पतिवार को कथा व्यास महामंडलेश्वर स्वामी अभयानंद सरस्वती ने प्रवचन दिए। उन्होंने शाम चार बजे से शाम साढ़े छह बजे तक भागवत महापुराण पर तात्विक व्याख्यान प्रस्तुत किए। स्वामी जी ने कहा कि भगवान जन्म नहीं लेते बल्कि धर्म की स्थापना और अधर्म के विनाश के लिए अवतार लेते हैं।
स्वामी अभयानंद ने भगवान विष्णु के 24 अवतारों का क्रमवार वर्णन किया। इनमें सनकादि ऋृषि, वराह, नारद, नर, नारायण, कपिल मुनि, दत्तात्रेय, यज्ञ, ऋषभदेव, पृथु, मत्स्य, कूर्म, धन्वंतरि, मोहिनी, नरसिंह, वामन, परशुराम, वेदव्यास, श्रीराम, बलराम, श्रीकृष्ण, बुद्ध, हयग्रीव, हंस तथा कल्कि अवतार शामिल हैं। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव और उनकी बाल लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन किया।
उन्होंने पूतना, शकटासुर और तृणावर्त जैसे राक्षसों के वध की लीलाएं भी सुनाईं। माता यशोदा को मुख में ब्रह्मांड दर्शन कराने तथा गर्गाचार्य द्वारा श्रीकृष्ण और बलराम के नामकरण संस्कार की कथा भी बताई। प्रवचन में स्वामी जी ने कहा कि जब प्रजा है तभी राजा है, श्रोता है तभी वक्ता है और विद्यार्थी है तभी अध्यापक है। इस अवसर पर कथा यजमान बी.डी. पाण्डेय एवं बीना पाण्डेय ने व्यास पूजन किया।
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स्वामी अभयानंद ने भगवान विष्णु के 24 अवतारों का क्रमवार वर्णन किया। इनमें सनकादि ऋृषि, वराह, नारद, नर, नारायण, कपिल मुनि, दत्तात्रेय, यज्ञ, ऋषभदेव, पृथु, मत्स्य, कूर्म, धन्वंतरि, मोहिनी, नरसिंह, वामन, परशुराम, वेदव्यास, श्रीराम, बलराम, श्रीकृष्ण, बुद्ध, हयग्रीव, हंस तथा कल्कि अवतार शामिल हैं। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव और उनकी बाल लीलाओं का भावपूर्ण वर्णन किया।
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उन्होंने पूतना, शकटासुर और तृणावर्त जैसे राक्षसों के वध की लीलाएं भी सुनाईं। माता यशोदा को मुख में ब्रह्मांड दर्शन कराने तथा गर्गाचार्य द्वारा श्रीकृष्ण और बलराम के नामकरण संस्कार की कथा भी बताई। प्रवचन में स्वामी जी ने कहा कि जब प्रजा है तभी राजा है, श्रोता है तभी वक्ता है और विद्यार्थी है तभी अध्यापक है। इस अवसर पर कथा यजमान बी.डी. पाण्डेय एवं बीना पाण्डेय ने व्यास पूजन किया।
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