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देश में सामाजिक गुलामी अभी कायम : प्रो. सतीश प्रकाश
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- चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के नेताजी सुभाष चंद्र प्रेक्षागृह में मनाई फूलन देवी की जयंती
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के नेताजी सुभाष चंद्र प्रेक्षागृह में रविवार को फूलन देवी जयंती मनाई गई। इस दौरान सामाजिक समावेश सम्मेलन हुआ। विद्वानों ने पाखंड पर जमकर प्रहार करते हुए वैज्ञानिक सोच विकसित करने की पैरवी की। दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रो. रतन लाल ने कहा कि विधायक और सांसद बनने के बाद कोई भी समाज के लिए नहीं बोलता।
प्रो. सतीश प्रकाश ने कहा कि यदि भारतीय समाज में सामाजिक समावेश होता तो फूलन देवी को हथियार उठाने को मजबूर नहीं होना पड़ता। वह भी एक सामान्य जीवन जी पातीं। देश आजाद जरूर हुआ है लेकिन अभी भी देश में सामाजिक गुलामी कायम है। इसलिए सामाजिक रूप से कमजोर वर्गाें को उत्पीड़न के खिलाफ व्यवस्था से न्याय न मिल पाने के कारण हथियार उठाने को मजबूर होना पड़ा। सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट महमूद पारचा ने कहा ईवीएम पर सवाल उठाते हुए बेलेट पेपर से चुनाव की वकालत की। उन्होंने जातिगत जनगणना के मुद्दे पर भी सरकार को घेरा। राजकुमार भाटी ने कहा कि कोई भी व्यक्ति जाति और धर्म के हिसाब से छोटा व बड़ा नहीं होता। उन्होंने पाखंडवाद पर जमकर प्रहार किया और धार्मिक बाबाओं की बयानबाजी के खिलाफ भी आवाज उठाई। उन्होंने वैज्ञानिक सोच को पैदा करने पर जोर दिया जिससे देश पाखंडवाद से मुक्त हो सके। राजेंद्र पाल गौतम ने कहा कि एससी/एसटी ओबीसी, अल्पसंख्यकों पर अत्याचार बढ़ रहे हैं। उन्होंने शिक्षा स्वस्थ पर भी एकसमान योजनाएं स्थापित करने पर जोर दिया। राहुल भारती ने कहा कि समाज को अपना इतिहास पढ़ने और हमको अपनी राजनैतिक हिस्सेदारी पर भी मंथन करने की आवश्यकता है। संयोजक मुकेश सिद्धार्थ ने फूलन देवी को नमन किया और समाज के हर वर्ग को संघर्ष करने के लिए जागृत किया।
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माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के नेताजी सुभाष चंद्र प्रेक्षागृह में रविवार को फूलन देवी जयंती मनाई गई। इस दौरान सामाजिक समावेश सम्मेलन हुआ। विद्वानों ने पाखंड पर जमकर प्रहार करते हुए वैज्ञानिक सोच विकसित करने की पैरवी की। दिल्ली यूनिवर्सिटी के प्रो. रतन लाल ने कहा कि विधायक और सांसद बनने के बाद कोई भी समाज के लिए नहीं बोलता।
प्रो. सतीश प्रकाश ने कहा कि यदि भारतीय समाज में सामाजिक समावेश होता तो फूलन देवी को हथियार उठाने को मजबूर नहीं होना पड़ता। वह भी एक सामान्य जीवन जी पातीं। देश आजाद जरूर हुआ है लेकिन अभी भी देश में सामाजिक गुलामी कायम है। इसलिए सामाजिक रूप से कमजोर वर्गाें को उत्पीड़न के खिलाफ व्यवस्था से न्याय न मिल पाने के कारण हथियार उठाने को मजबूर होना पड़ा। सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट महमूद पारचा ने कहा ईवीएम पर सवाल उठाते हुए बेलेट पेपर से चुनाव की वकालत की। उन्होंने जातिगत जनगणना के मुद्दे पर भी सरकार को घेरा। राजकुमार भाटी ने कहा कि कोई भी व्यक्ति जाति और धर्म के हिसाब से छोटा व बड़ा नहीं होता। उन्होंने पाखंडवाद पर जमकर प्रहार किया और धार्मिक बाबाओं की बयानबाजी के खिलाफ भी आवाज उठाई। उन्होंने वैज्ञानिक सोच को पैदा करने पर जोर दिया जिससे देश पाखंडवाद से मुक्त हो सके। राजेंद्र पाल गौतम ने कहा कि एससी/एसटी ओबीसी, अल्पसंख्यकों पर अत्याचार बढ़ रहे हैं। उन्होंने शिक्षा स्वस्थ पर भी एकसमान योजनाएं स्थापित करने पर जोर दिया। राहुल भारती ने कहा कि समाज को अपना इतिहास पढ़ने और हमको अपनी राजनैतिक हिस्सेदारी पर भी मंथन करने की आवश्यकता है। संयोजक मुकेश सिद्धार्थ ने फूलन देवी को नमन किया और समाज के हर वर्ग को संघर्ष करने के लिए जागृत किया।
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