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आज सेलरी डे : कैश की किल्लत से कानून व्यवस्था को चुनौती

Thu, 01 Dec 2016 01:33 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Thu, 01 Dec 2016 01:33 PM IST
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cash ki killat se chunoti
फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
 नोटबंदी के बाद से बैंकों की हालत सुधरने के बजाय लगातार बिगड़ती जा रही है। बैंकों के खजाने खाली हो चुके हैं तो जनता की जेब। रोजाना की कैश की किल्लत और बैंकों में नो कैश के नोटिस देखकर अब जनता उग्र होने लगी है, जिससे कानून व्यवस्था बनाए रखना चुनौतीपूर्ण हो गया है। हालात इस कदर गंभीर हो चले हैं कि आरबीआई से कैश का फ्लो न बढ़ने से स्थिति और ज्यादा बिगड़ने की आशंका जताई जा रही है।
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बैंकों में कई दिनों से नकदी का संकट है। दिन निकलते ही बैंकों के बाहर लंबी लाइनें लगनी शुरू हो जाती हैं। दोपहर होते-होते कैश खत्म होने की बात कह दी जाती है। मंगलवार दोपहर भी हापुड़ अड्डा स्थित इलाहाबाद बैंक में कैश खत्म होने पर लोगों ने जाम लगा दिया था। जबकि सिवालखास में सिंडिकेट बैंक नहीं खुलने दिया था। हापुड़ अड्डा स्थित सिंडिकेट बैंक पर भी बुधवार को बवाल हुआ तो शहर की कई शाखाओं में लोगों ने हंगामा किया। खास बात यह है कि जिले के लीड बैंक सिंडिकेट बैंक की हालत सबसे ज्यादा खस्ता है।
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शहर के कई बैंक और एटीएम संवेदनशील और अतिसंवेदनशील इलाकों में हैं। जहां शासन के निर्देशों के बावजूद पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था तक नहीं है। यहां कैश की किल्लत होने पर हालात बिगड़ते हैं तो इसका सीधा असर कानून व्यवस्था पर पड़ेगा।
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कैश का फ्लो बढ़ने पर ही सुधार
आरबीआई से कैश का फ्लो नहीं बढ़ रहा है। सिंडिकेट बैंक के भी चेस्ट खाली हैं। हालांकि बैंक अधिकारी और प्रशासन अपने स्तर से कैश की व्यवस्था के लिए हरसंभव प्रयास कर रहा हैं। अगले दिनों में नौकरी पेशा और पेंशन वाले भी बैंक पहुंचेंगे। ऐसे में कैश का फ्लो बढ़ने पर ही सुधार संभव है।- अविनाश तांती, लीड बैंक मैनेजर
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