UP: वरिष्ठ सहायक लिपिक के खिलाफ मुकदमा, घूस लेते रंगेहाथ दबोचा गया था आरोपी, पहले भी पड़ा था छापा
रिश्वत लेने वाले वरिष्ठ सहायक लिपिक के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। 7500 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ दबोचा गया था।
विस्तार
एंटी करप्शन टीम (भ्रष्टाचार निवारण संगठन) ने मंगलवार को संभागीय परिवहन कार्यालय में तैनात वरिष्ठ सहायक लिपिक मुंशीलाल को 7500 रुपये रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया। उसके पास से कुछ दस्तावेज भी बरामद किए गए हैं। ई-रिक्शा का पंजीकरण कराने के नाम पर यह रिश्वत ली जा रही थी। टीम ने नौचंदी थाने में लिपिक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है। शाम के समय भी टीम ने लिपिक से जुड़ी शिकायतों से जुड़े अभिलेख खंगाले।
अहमदनगर निवासी हाजी अफजाल के पास हिंद बादशाह ई-रिक्शा की डीलरशिप है। वह ई-रिक्शा एसोसिएशन के अध्यक्ष भी हैं। दो बार लोकसभा, तीन बार विधानसभा और दो बार नगर निकाय का चुनाव लड़ चुके हैं। अफजाल के मुताबिक, 29 अगस्त को तीन ई-रिक्शा का पंजीकरण कराने के लिए ऑनलाइन फीस 6600 रुपये जमा की थी। आरोप है कि लिपिक मुंशीलाल ने पंजीकरण के लिए प्रत्येक ई-रिक्शा पर 2500 रुपये के हिसाब से 7500 रुपये रिश्वत की मांग की। अफजाल ने इसके बाद नौ सितंबर को जिलाधिकारी और और एंटी करप्शन टीम से प्रकरण की शिकायत की।
पूर्व में तय प्लान के अनुसार मंगलवार दोपहर एक बजे हाजी अफजाल आरटीओ विभाग में लिपिक मुंशीलाल को रिश्वत के 7500 रुपये देने पहुंचे। इसी दौरान एंटी करप्शन टीम की इंस्पेक्टर ऊषा तोमर के नेतृत्व में आठ-दस लोगों की टीम ने लिपिक को रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया। ऊषा तोमर ने बताया कि जांच और शिकायत के आधार पर कार्रवाई की गई है।
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अब स्लॉट बुक करवाने वालों को ही मिलेगा प्रवेश
आरटीओ हिमेश तिवारी का कहना है कि लिपिक मुंशीलाल वाहन पंजीकरण का नहीं बल्कि ट्रांसफर का काम देखते हैं। अफजाल के आरोप के अनुसार मामला पंजीकरण से जुड़ा बताया गया है जबकि इसके लिपिक सुभाष हैं। वह फ्रेक्चर के कारण एक माह से अवकाश पर हैं। उनके स्थान पर नवीन अस्थायी रूप से काम देख रहे हैं। अब सवाल है कि अफजाल मुंशीलाल से क्यों मिले। फिर भी लिपिक के रिश्वत लेने का मामला उजागर होने से विभाग की छवि प्रभावित हुई है। भविष्य में ऐसा न हो, इसके लिए आरटीओ कार्यालय के सभी कैमरे अपडेट कराएं जाएंगे। साथ ही कार्यालय में उन्हीं वाहन स्वामियों को प्रवेश दिया जाएगा जो ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराकर स्लॉट बुक कराकर आएंगे।
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पहले भी शिकायत पर पड़ा था छापा
अफजाल ने बताया कि वर्ष 2004 में भी आरटीओ विभाग में भ्रष्टाचार की शिकायत की गई थी। तब छापा पड़ने पर लिपिक भाग गए थे। इसके उपरांत 2007 में भी ऐसी कार्रवाई की गई।