प्रत्याशियों में जुबानी जंग तेज, एक-दूसरे पर जमकर बोला हमला
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दावतोें और पार्टियों के दौर के साथ एलेक्जेंडर क्लब के दोनों पैनल अब जुबानी जंग में भी आमने-सामने आ गए हैं। अभी तक एक-दूसरे को टक्कर देने के लिए सदस्यों के लिए दावतों का आयोजन हो रहा था। बृहस्पतिवार को हुई प्रेसवार्ता के बाद शुक्रवार को दूसरे पक्ष ने जमकर हमला बोला। अरविंद नाथ सेठ, राकेश जैन और सीएल दास की सफाई को दूसरे पैनल ने झूठ का पुलिंदा करार दिया। उन्होंने कहा कि अरविंद नाथ सेठ और राकेश जैन ने तथ्यों को छिपाया है। क्लब के पास एक करोड़ से ज्यादा रकम होने की बात तो बताई गई है, लेकिन क्लब पर 72 लाख से ज्यादा की देनदारी की जानकारी नहीं दी गई।
एलेक्जेंडर क्लब में आयोजित पत्रकार वार्ता में संजय कुमार, डॉ. सुमंगल प्रकाश और जयप्रकाश अग्रवाल ने कहा कि नियमानुसार 1.30 करोड़ रुपये हमेशा क्लब के पास मौजूद होना चाहिए। आरोप लगाया कि पिछले चार साल में एक करोड़ रुपये प्रति वर्ष के हिसाब से क्लब को चूना लगाया गया है। एक अप्रैल 2012 को क्लब में लगभग एक करोड़ 91 लाख साठ हजार रुपये की एफडीआर थी। इसके बाद 323 नये सदस्य बने और उनसे लगभग पांच करोड़ 37 लाख रुपये प्राप्त हुए। इसके ऊपर 85 लाख रुपये का ब्याज आया। जब चुनाव हुआ तो इस कार्यकारिणी को लगभग आठ करोड़ 14 लाख रुपये सौंपे गये। इसमें लगभग तीन करोड़ 22 लाख रुपये क्लब के खर्च में आए। सदस्यों ने बताया कि क्लब कार्यकारिणी ने इस शेष रकम में से अब अपने पास 1,17,38,000 रुपये बकाया दिखाया है। इसका मतलब इन लोगों ने लगभग 3.79 करोड़ रुपये खर्च किये हैं और उसका कोई हिसाब नहीं है। इन लोगों ने मोटे तौर पर करीब एक करोड़ रुपये सालाना का नुकसान क्लब को किया है। संजय कुमार ने कहा कि इस पक्ष ने बकाया दिखाते समय देनदारी का जिक्र नहीं किया है। इस समय क्लब पर 51,95,148 रुपये सर्विस टैक्स और 27 लाख रुपये आयकर विभाग का बकाया है। देनदारी देने के बाद क्लब के पास करीब 38 लाख रुपये बचते हैं। नियमानुसार क्लब के पास हमेशा 1.30 करोड़ रुपये होना चाहिए। यह सदस्यों की रिफंडेबल फीस है और हमेशा रहनी चाहिए। प्रेसवार्ता में दूसरे पक्ष पर आरोप लगाया गया कि इन लोगों ने एक तरह से क्लब को डिफाल्टर करने की तैयारी की है।
जमकर की मनमानी, लुटाया पैसा
संजय कुमार ने कहा कि स्वीमिंग पूल पर आवश्यकता से ज्यादा 78 लाख रुपये खर्च दिखाया है। क्लब का नियम है कि एक्जीक्यूटिव बॉडी में विभिन्न क्षेत्रों के एक्सपर्ट रहते हैं। दो अच्छे आर्किटेक्ट इसमें मौजूद होने के बावजूद लगातार काम होता रहा और तोड़फोड़ होती रही। नए निर्माण का नक्शा पास नहीं कराया। इसी वजह से निर्माण अवैध घोषित होकर सील कर दिया गया। फर्जी तरीके से काम करने का नतीजा क्लब को भुगतना पड़ा। संजय कुमार ने बार बंद होने के पीछे भी दूसरे पक्ष की लापरवाही और भ्रष्टाचार का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि बार खुलवाने का श्रेय बेवजह खुद ले रहे हैं।
क्लब कोष से रिश्वत देकर दबा रहे अपनी गलती : पहल
सच संस्था के अध्यक्ष संदीप पहल एडवोकेट ने भी बृहस्पतिवार को अरविंद नाथ सेठ, राकेश जैन और सीएलदास गुट पर हल्ला बोला। पहल ने कहा कि उनकी शिकायत पर क्लब बार बंद हुआ था। इसे कार्यकारिणी के लोगों ने झूठे तथ्य पेश करते हुए लाखों रुपये रिश्वत देकर खुलवाया है। पहल ने आरोप लगाया कि यह रिश्वत क्लब खातों में हेराफेरी कर निकाली गई है। क्लब ने जो फर्जी तरीके से अवैध निर्माण किया है, उसका ध्वस्तीकरण भी रिश्वत देकर रुकवाया है। सच संस्था शीघ्र ही इसे न केवल ध्वस्त कराने की कार्रवाई कराएगी, बल्कि निर्माण कराने वालों पर एफआईआर भी दर्ज कराएगी। पहल का आरोप है कि क्लब में निर्माण और खरीद के नाम पर लगभग पांच करोड़ रुपये बर्बाद किया गया है।