मेरठ में पीएसी के 30 रंगरूट और आरएएफ के दो जवान 20 दिसंबर का दिन शायद ही कभी भूले। हिंसक भीड़ से बचने के लिए सभी एक दुकान में घुस गए थे, भीड़ ने देखा तो बाहर से शटर लगा दिया। जवानों के साथ यह संवाददाता भी था। बाहर से मारो...मारो की आवाज सुनाई दे रही थी। गोलियों की तड़तड़ाहट से कलेजा कांप रहा था। भीड़ चिल्ला रही थी कि पेट्रोल बम फेंककर इनको यहीं जला दो। ढाई घंटे सभी रंगरूट और जवान इसी कशमकश में रहे कि मौत अब आई...तब आई। फोन कर बोले- मां आज शायद जिंदगी की आखिरी दिन हो... आगे स्लाइडों में जानिए पूरा अपडेट-
आपबीती! मां आज जिंदगी का शायद आखिरी दिन...मौत को सामने देख रो पड़े थे जवान,मंजर था खौफनाक
रिजवान खान, अमर उजाला, मेरठ
Published by: Dimple Sirohi
Updated Sat, 21 Dec 2019 11:55 AM IST
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