एक बार फिर सवालों के घेरे में नगर निगम, निर्माण के नाम पर सिर्फ भ्रष्टाचार
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शहर में घटिया सामग्री से भ्रष्टाचार की नाली और सड़क निर्माण आम बात है। अनेकों बार गड़बड़झाले पर उंगलियां उठ चुकी हैं। निगम के दामन पर दाग लग चुके हैं। उसके बाद भी नगर निगम निर्माण विभाग के अधिकारी गंभीर होने को तैयार नहीं हैं। ऐसा ही मामला नगर निगम के वार्ड 30 के इंदिरानगर (ब्रह्मपुरी) में सामने आया है। क्षेत्र में 25 लाख रुपये से नाली और सड़क का निर्माण किया जा रहा है। क्षेत्रीय जनता ही नहीं बल्कि पार्षद ने घटिया सामग्री से नाली और सड़क निर्माण की शिकायत निगम अफसरों से की। लेकिन न तो निर्माण कार्य की गुणवत्ता में सुधार कराया गया और न ही कोई कार्रवाई। यही नहीं, इसी वार्ड में दो माह पहले सड़क पर लगायी गई टाइल्स खुरदरी हो गई हैं। जिसमें सीधे-सीधे कमीशन का खेल उजागर हो रहा है।
पार्षद की गली में ही गड़बड़झाला
वार्ड 30 के इंदिरानगर में पार्षद राजू वर्मा-टीसी शर्मा वाली गली का नाला और सड़क पर टाइल्स लगाने का प्रस्ताव अवस्थापना निधि से पास है। जिस पर 25 लाख रुपये खर्च किए जा रहे हैं। ठेकेदार ने जहां नई टाइल्स लगाने के लिए पुरानी टाइल्स उखाड़ दी, वहीं नाली को उखाड़े बगैर ही भरे पानी में नाली की दीवार बनानी शुरू कर दी है। स्थानीय जनता और पार्षद का आरोप है कि नाली का निर्माण घटिया सामग्री से किया जा रहा है। नाली को नए सिरे से बनाना जाना चाहिए था। डस्ट के स्थान पर चिकनी मिट्टी का इस्तेमाल किया जा रहा है। सीमेंट भी घटिया है। सड़क पर घटिया टाइल्स लगाने की तैयारी है।
12 लाख का निर्माण दफन
वार्ड 30 में ही अनिल कुमार, भारतभूषण व रविंद्र सेठी वाली गली में नाली निर्माण और टाइल्स लगाने का कार्य निगम खजाने से 12 लाख रुपये में किया गया। दो माह में ही जहां टाइल्स पूरी तरह खुरदरी हो गई, वहीं नालियों से प्लास्टर भी उखड़ना शुरू हो गया। पार्षद की मानें तो उन्होंने सभी अधिकारियों से शिकायत की। लेकिन अफसरों ने जांच करना भी गवारा नहीं समझा। यह भी आरोप है कि सड़क व नाली निर्माण में भ्रष्टाचार हो रहा है। जिसकी आवाज निगम बोर्ड बैठक में भी उठायी जा चुकी है।
नया नहीं भ्रष्टाचार
सड़क निर्माण में भ्रष्टाचार का मामला नया नहीं है। दो माह पहले ही राजेंद्र नगर में डेंस की सड़क बनायी गई थी। मामला उजागर होने पर नगर निगम की महिला जेई ने रातोरात दोबारा से सड़क को बनवाने का काम किया था।
सुपरवाइजर भूल गए कर्तव्य
शहर में सड़क, नाले, नाली, पार्क आदि निर्माण कार्यों की निगरानी के लिए नगर निगम में 10-12 सुपरवाइजर हैं। शासन से इनकी नियुक्ति निर्माण कार्यों की गुणवत्ता बनाए रखने और घटिया सामग्री लगाए जाने पर उच्च अधिकारियों को जानकारी देने की है। लेकिन नगर निगम में एक-दो सुपरवाइजर को छोड़ दें तो बाकी कोई सुपरवाइजर क्षेत्र में निर्माण कार्यों की निगरानी करने नहीं पहुंचता है। यही नहीं इन ठेकेदारों ने अपने रिश्तेदारों के नाम से ठेकेदारी की हुई है। जो वर्ष में कई-कई करोड़ रुपये के निर्माण कार्य करते हैं। इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि जब सुपरवाइजर सरकारी जिम्मेदारी भूलकर स्वयं ठेकेदारी करेंगे तो अच्छी निर्माण सामग्री की उम्मीद कितनी हो सकती है।
जांच तक नहीं हुई
नाली व सड़क निर्माण में घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है। दो माह पहले 12 लाख की लागत से नाली और सड़क पर टाइल्स लगाने का काम हुआ था। दो माह में ही टाइल्स जर्जर हो गई हैं। जिसकी शिकायत कमिश्नर, डीएम, नगरायुक्त, चीफ इंजीनियर सभी से की, लेकिन जांच तक नहीं की गई।- राजू वर्मा, पार्षद वार्ड 30
शिकायत नहीं मिली
अगर भरे पानी के बीच नाली या नाले की दीवार बनायी जा रही है, तो गलत है। इसको दिखवाया जाएगा। हालांकि अब से पहले हमारे पास ऐसी कोई शिकायत नहीं आयी है।- कुलभूषण वार्ष्णेय, चीफ इंजीनियर नगर निगम।