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लड़कियों से ज्यादा लड़कों को एग्जाम की टेंशन
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 10 Mar 2017 02:07 AM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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परीक्षा की टेंशन छात्रों को अधिक है। सीबीएसई की हेल्पलाइन पर लड़कियों से ज्यादा लड़के अपनी समस्याएं बता रहे हैं। हेल्पलाइन पर एक महीने में 250 से ज्यादा समस्याएं आईं। इसमें 150 छात्र और 100 छात्राओं ने कॉल कर विशेषज्ञों से मदद मांगी है।
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड 12वीं की परीक्षाएं नौ मार्च से शुरू हो रही हैं। फरवरी से शुरू हुई सीबीएसई एग्जाम हेल्पलाइन में अब तक 250 से अधिक कॉल आई हैं। इनमें अधिकांश शिकायतें पढ़ाई में मन न लगना, याद किया हुआ भूल जाना और मोबाइल की हैं। सीबीएसई के अनुसार 2016 में देशभर में 30 हजार फोन कॉल में से 15 हजार लड़कों की थी। इसके अलावा 10 हजार लड़कियाें और अन्य पांच हजार बार उनके अभिभावकों ने फोन किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्री प्लानिंग, कक्षा में नियमित जाना, प्रारंभ से ही पढ़ाई के प्रति गंभीर होने के कारण परीक्षा के वक्त छात्राएं कूल हैं। वहीं लापरवाही करने के कारण छात्र तनाव में दिखाई दे रहे हैं। कुछ समस्याएं छात्र-छात्राओं में समान हैं।
छात्राएं नियमित पढ़ाई करती हैं : पूनम देवदत्त
सीबीएसई की एग्जाम काउंसलर डॉ. पूनम देवदत्त कहती हैं कि हेल्पलाइन पर ज्यादातर परेशानियां भरे फोन छात्रों के आते हैं। छात्राओं के कम आने की वजह यह भी है कि वो शुरू से क्लास में ध्यान देती हैं। नियमित पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करती हैं। इसलिए परीक्षा के वक्त छात्राओं को ज्यादा परेशानी नहीं होती। छात्राओं के पास एडवांस प्लानिंग होती है। छात्र परीक्षा के वक्त भी कोचिंग के बाद सोशल मीडिया पर चैटिंग और आउटिंग करते रहते हैं।
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सब हो जाता है गायब
शास्त्रीनगर निवासी एक छात्र का कहना है कि फिजिक्स पढ़ने के दौरान उसके सूत्र याद नहीं रहते हैं। कई बार अभ्यास करने के बाद भी अचानक से सब गायब हो जाता है। वेस्टर्न रोड स्थित एक स्कूल के छात्र का कहना है कि पहले उसे गणित अच्छा लगता था, लेकिन बोर्ड परीक्षाआें से पहले सबसे ज्यादा डर अब इसी विषय में है। अब समझ नहीं आ रहा है कि ऐसा क्यों हो रहा है।
छात्रों की शिकायतें
याद किया भूल जाता हूं।
सिलेबस के बारे में अच्छी जानकारी नहीं है।
आखिरी समय में पढ़ने से कंफ्यूज होता हूं।
सिलेबस पूरा होने पर पढ़ने की योजना नहीं।
रेग्युलर स्टडीज न होने से परेशानी है।
नींद नहीं आती और भूख भी कम लगती है।
स्कूल या कोचिंग के बाद घर जाकर रिवीजन नहीं कर पाता।
ये हैं आम शिकायतें
पढ़े जा रहे विषयों में रुचि नहीं आती।
कोर्स को कवर नहीं कर पा रहा हूं, इसलिए डर लगता है।
कोर्स बुक उठाते ही घबराहट होती है।
बार-बार लगता है मैं पास नहीं हो पाऊंगा।
पिछला रिजल्ट आत्मविश्वास कमजोर कर रहा है।
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केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड 12वीं की परीक्षाएं नौ मार्च से शुरू हो रही हैं। फरवरी से शुरू हुई सीबीएसई एग्जाम हेल्पलाइन में अब तक 250 से अधिक कॉल आई हैं। इनमें अधिकांश शिकायतें पढ़ाई में मन न लगना, याद किया हुआ भूल जाना और मोबाइल की हैं। सीबीएसई के अनुसार 2016 में देशभर में 30 हजार फोन कॉल में से 15 हजार लड़कों की थी। इसके अलावा 10 हजार लड़कियाें और अन्य पांच हजार बार उनके अभिभावकों ने फोन किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्री प्लानिंग, कक्षा में नियमित जाना, प्रारंभ से ही पढ़ाई के प्रति गंभीर होने के कारण परीक्षा के वक्त छात्राएं कूल हैं। वहीं लापरवाही करने के कारण छात्र तनाव में दिखाई दे रहे हैं। कुछ समस्याएं छात्र-छात्राओं में समान हैं।
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छात्राएं नियमित पढ़ाई करती हैं : पूनम देवदत्त
सीबीएसई की एग्जाम काउंसलर डॉ. पूनम देवदत्त कहती हैं कि हेल्पलाइन पर ज्यादातर परेशानियां भरे फोन छात्रों के आते हैं। छात्राओं के कम आने की वजह यह भी है कि वो शुरू से क्लास में ध्यान देती हैं। नियमित पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करती हैं। इसलिए परीक्षा के वक्त छात्राओं को ज्यादा परेशानी नहीं होती। छात्राओं के पास एडवांस प्लानिंग होती है। छात्र परीक्षा के वक्त भी कोचिंग के बाद सोशल मीडिया पर चैटिंग और आउटिंग करते रहते हैं।
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सब हो जाता है गायब
शास्त्रीनगर निवासी एक छात्र का कहना है कि फिजिक्स पढ़ने के दौरान उसके सूत्र याद नहीं रहते हैं। कई बार अभ्यास करने के बाद भी अचानक से सब गायब हो जाता है। वेस्टर्न रोड स्थित एक स्कूल के छात्र का कहना है कि पहले उसे गणित अच्छा लगता था, लेकिन बोर्ड परीक्षाआें से पहले सबसे ज्यादा डर अब इसी विषय में है। अब समझ नहीं आ रहा है कि ऐसा क्यों हो रहा है।
छात्रों की शिकायतें
याद किया भूल जाता हूं।
सिलेबस के बारे में अच्छी जानकारी नहीं है।
आखिरी समय में पढ़ने से कंफ्यूज होता हूं।
सिलेबस पूरा होने पर पढ़ने की योजना नहीं।
रेग्युलर स्टडीज न होने से परेशानी है।
नींद नहीं आती और भूख भी कम लगती है।
स्कूल या कोचिंग के बाद घर जाकर रिवीजन नहीं कर पाता।
ये हैं आम शिकायतें
पढ़े जा रहे विषयों में रुचि नहीं आती।
कोर्स को कवर नहीं कर पा रहा हूं, इसलिए डर लगता है।
कोर्स बुक उठाते ही घबराहट होती है।
बार-बार लगता है मैं पास नहीं हो पाऊंगा।
पिछला रिजल्ट आत्मविश्वास कमजोर कर रहा है।