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बागपत में नाव हादसा : बहादुर नाजमा ने दुपट्टे से बचाई तीन लोगों की जान
अमर उजाला ब्यूरो, बागपत, मदन बालियान
Updated Fri, 15 Sep 2017 08:24 PM IST
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बहादुर नजमा अपनी मां के साथ।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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काठा के नाव हादसे में मौत के मुंह से बचकर निकले कई लोग ऐसे भी हैं, जिन्होंने जिंदगी बचाने के लिए मौत से लड़ाई लड़ी। किशोरी नाजमा मौत की नाव में सवार थी। नाव धंसने लगी तो वह कूद पड़ी। यमुना किनारे पहुंची। तब तक चीख-पुकार मच चुकी थी। अपनी मां के साथ मिलकर उसने दुपट्टे से तीन लोगों की जिंदगी बचाई। काठा की फिरदौस अपनी बेटी नाजमा के साथ नाव में सवार थी। वह कहती है कि हादसे के बाद चीख-पुकार मच गई थी। उसके साथ नाव में उसकी बैठी नाजमा भी बैठी हुई थी। नाव में ही उसने अपने बेटी का एक हाथ पकड़ लिया था। उसने अपनी बेटी को हताश नहीं होने दिया और उसका हाथ पकड़कर दोनो पानी में हाथ-पैर मारते हुए किसी तरह किनारे पर आ गई और यमुना से निकल गई। किनारे पर पहुंचने पर उसने तीन लोगों को अपने दुपट्टे का सहारा देकर बाहर निकाला।
गुलफ्सा ने दुपट्टा डालकर बचाई जान
किशोरी गुलफ्सा ने बताया कि वह यमुना में डूब गई थी। किसी तरह किनारे पर आई। उसके बाद उसने अपना दुपट्टा यमुना में डाल दिया था। उसको कपड़कर कई महिलाएं उससे निकली।
काजल की भाभी भी निकली यमुना से
नाव डूबने से काजल की तो मौत हो गई। उसकी भाभी मीना किसी तरह निकाल ली गई थी। उसकी फिलहाल हालत गंभीर बनी हुई है। उसका मेरठ अस्पताल में उपचार चल रहा है।
यमुना में डूबी शमा थी घर की खेवनहार
काल बनी यमुना के सामने काठा बेबस हो गया। सालों तक यह हादसा टीस बनकर सीने में उभरता रहेगा। लेकिन एक परिवार ऐसा भी है जिसका सहारा हमेशा के लिए छिन गया। अपने घर की खेवनहार शमा यमुना के भंवर में फंसकर मौत का शिकार हुई। लेकिन इसके साथ ही उसका परिवार बेसहारा हो गया है। शमा अपने परिवार के लिए बेटे की तरह थी। मजदूरी कर परिवार को पालना और बहनों को पढ़ाना उसका मकसद था। उसकी मौत से परिवार बेसहारा हो गया है।
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काठा की शमा नाव हादसे में मौत का शिकार हो गई। उसके पिता मौसम ने बताया कि वह मजदूरी करके अपने परिवार का पालन पोषण करता है। उसकी पत्नी संजीदा के सात बेटी पैदा हुई थी। उनके कोई लड़का नहीं है। बेटियों में शमा सबसे बड़ी थी। परिवार की माली हालत होने के कारण शमा को कक्षा आठ में ही पढ़ाई छूट गई थी। शमा उनके साथ मजदूरी करती थी। उसका इरादा अपनी छोटी बहनों को शिक्षित बनाना था। उनकी पढ़ाई में उसने कोई कसर नहीं छोड़ी। उसकी बहन साइन और साईस्ता कक्षा 10, गुलिस्ता आठवीं, सना नौवीं, अक्षा छठीं और अक्षरा कक्षा चार में पढ़ती है। शमा सुबह को अपनी माता संजीदा के साथ खेत में मजदूरी करने के लिए जाती थी। इसी तरह बृहस्पतिवार को भी हरियाणा के किसान के खेत में काम करने के लिए जा रही थी। इसी दौरान नाव डूबने से उसकी मौत हो गई। उसकी मौत से पूरा परिवार टूट गया है। शमा का सपना अधूरा रह गया। साथ ही उसके पिता खुद को अकेला महसूस कर रहे हैं। कहते हैं कि बेटी उसकी सबसे बड़ी मददगार थी, ऊपर वाले के सामने कोई क्या करें।
संजीदा बोली, मैने बेटी को डूबते देखा
शमा और उसकी माता संजीदा दोनो डूब गई थीं। संजीदा किसी तरह पानी से निकल गई थी। उसने अपनी बेटी को अपने आंखों के सामने डूबते हुए देखा था।
शादी की तैयारियां भी अटकीं
अनिल के भाई मनोज की अगले माह शादी होनी है। परिवार के लोग शादी की तैयारियों में लगे हुए थे। अनिल की नाव डूबने से मौत होने से परिवार कहर टूट पड़ा। शादी की तैयारियों गम में बदल गई। इसी तरह युवती काजल की बहन मनु की अगले माह शादी होनी है। काजल की मौत होने से पूरा परिवार गम में डूबा गया।
रज्जो के पति की 15 साल पूर्व हो गई थी मौत
नाव में डूबने से महिला राजो उर्फ रज्जो की मौत हुई है। उसके पति बरसे की 15 साल पूर्व मौत हो गई थी। इससे बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल हो रहा है।
मासूम को छोड़कर चली गई श्यामवीरी
श्यामवीरी अपने पति जोगेंद्र के साथ मिलकर मजदूरी करती थी। वह अपनी ढाई वर्षीय बेटी शगुन को छोड़कर खेतों में काम करने जा रही थी, लेकिन हादसे का शिकार हो गई। शगुन का भी रो-रोकर बुरा हाल है।
एक साल के अंदर दो बहनों की हो चुकी मौत
रतनपाल की बेटी सविता की नाव डूबने से मौत हो गई। एक साल पूर्व भी उसकी दूसरी बेटी बबीता की बीमारी के चलते मौत हो गई थी। इससे परिवार का रो-रोकर बुरा हाल हो रहा है।
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गुलफ्सा ने दुपट्टा डालकर बचाई जान
किशोरी गुलफ्सा ने बताया कि वह यमुना में डूब गई थी। किसी तरह किनारे पर आई। उसके बाद उसने अपना दुपट्टा यमुना में डाल दिया था। उसको कपड़कर कई महिलाएं उससे निकली।
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काजल की भाभी भी निकली यमुना से
नाव डूबने से काजल की तो मौत हो गई। उसकी भाभी मीना किसी तरह निकाल ली गई थी। उसकी फिलहाल हालत गंभीर बनी हुई है। उसका मेरठ अस्पताल में उपचार चल रहा है।
यमुना में डूबी शमा थी घर की खेवनहार
काल बनी यमुना के सामने काठा बेबस हो गया। सालों तक यह हादसा टीस बनकर सीने में उभरता रहेगा। लेकिन एक परिवार ऐसा भी है जिसका सहारा हमेशा के लिए छिन गया। अपने घर की खेवनहार शमा यमुना के भंवर में फंसकर मौत का शिकार हुई। लेकिन इसके साथ ही उसका परिवार बेसहारा हो गया है। शमा अपने परिवार के लिए बेटे की तरह थी। मजदूरी कर परिवार को पालना और बहनों को पढ़ाना उसका मकसद था। उसकी मौत से परिवार बेसहारा हो गया है।
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काठा की शमा नाव हादसे में मौत का शिकार हो गई। उसके पिता मौसम ने बताया कि वह मजदूरी करके अपने परिवार का पालन पोषण करता है। उसकी पत्नी संजीदा के सात बेटी पैदा हुई थी। उनके कोई लड़का नहीं है। बेटियों में शमा सबसे बड़ी थी। परिवार की माली हालत होने के कारण शमा को कक्षा आठ में ही पढ़ाई छूट गई थी। शमा उनके साथ मजदूरी करती थी। उसका इरादा अपनी छोटी बहनों को शिक्षित बनाना था। उनकी पढ़ाई में उसने कोई कसर नहीं छोड़ी। उसकी बहन साइन और साईस्ता कक्षा 10, गुलिस्ता आठवीं, सना नौवीं, अक्षा छठीं और अक्षरा कक्षा चार में पढ़ती है। शमा सुबह को अपनी माता संजीदा के साथ खेत में मजदूरी करने के लिए जाती थी। इसी तरह बृहस्पतिवार को भी हरियाणा के किसान के खेत में काम करने के लिए जा रही थी। इसी दौरान नाव डूबने से उसकी मौत हो गई। उसकी मौत से पूरा परिवार टूट गया है। शमा का सपना अधूरा रह गया। साथ ही उसके पिता खुद को अकेला महसूस कर रहे हैं। कहते हैं कि बेटी उसकी सबसे बड़ी मददगार थी, ऊपर वाले के सामने कोई क्या करें।
संजीदा बोली, मैने बेटी को डूबते देखा
शमा और उसकी माता संजीदा दोनो डूब गई थीं। संजीदा किसी तरह पानी से निकल गई थी। उसने अपनी बेटी को अपने आंखों के सामने डूबते हुए देखा था।
शादी की तैयारियां भी अटकीं
अनिल के भाई मनोज की अगले माह शादी होनी है। परिवार के लोग शादी की तैयारियों में लगे हुए थे। अनिल की नाव डूबने से मौत होने से परिवार कहर टूट पड़ा। शादी की तैयारियों गम में बदल गई। इसी तरह युवती काजल की बहन मनु की अगले माह शादी होनी है। काजल की मौत होने से पूरा परिवार गम में डूबा गया।
रज्जो के पति की 15 साल पूर्व हो गई थी मौत
नाव में डूबने से महिला राजो उर्फ रज्जो की मौत हुई है। उसके पति बरसे की 15 साल पूर्व मौत हो गई थी। इससे बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल हो रहा है।
मासूम को छोड़कर चली गई श्यामवीरी
श्यामवीरी अपने पति जोगेंद्र के साथ मिलकर मजदूरी करती थी। वह अपनी ढाई वर्षीय बेटी शगुन को छोड़कर खेतों में काम करने जा रही थी, लेकिन हादसे का शिकार हो गई। शगुन का भी रो-रोकर बुरा हाल है।
एक साल के अंदर दो बहनों की हो चुकी मौत
रतनपाल की बेटी सविता की नाव डूबने से मौत हो गई। एक साल पूर्व भी उसकी दूसरी बेटी बबीता की बीमारी के चलते मौत हो गई थी। इससे परिवार का रो-रोकर बुरा हाल हो रहा है।