Bijnor: देश-विदेश में जलवा दिखा रहा नजीबाबाद का अनीस साबरी, बच्चा कव्वाल के नाम से मिली शोहरत
बच्चा कव्वाल के नाम से पैर जमाने वाले बिजनौर के अनीस साबरी देश-विदेश में अपनी विधा का लोहा मनवा रहे हैं। जिंदगी एक किराए का घर है.. से उन्होंने शोहरत हासिल की और आज देश-विदेश में बड़े आयोजनों में परफॉर्म करते हैं।
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सूफियाना कलाम और कव्वाली विधा में बच्चा कव्वाल के नाम से पैर जमाने वाले अनीस साबरी उन युवा कव्वालों में शामिल है जिन्होंने देश और विदेश में श्रोताओं का दिल जीता है।
बिजनौर के जलालाबाद निवासी मशहूर कव्वाल रईस साबरी के बेटे को अनीस को कव्वाली विधा विरासत में मिली। कैसर समस्तीपुरी के कलाम नसीहत अपने मां बाप का तू दिल न दुखा.. को मात्र 10 वर्ष की उम्र में आवाज देकर अनीस साबरी ने धमाल मचाया। 3000 मिलियन से ज्यादा लोगों ने अनीस साबरी के इस कलाम को सुना।
यहीं से उन्हें बच्चा कव्वाल का उप नाम मिला। नसीहत के अंतर्गत ही उन्होंने बाल उम्र में जिंदगी एक किराए का घर है.., कव्वाली तुमको पाया है जमाने से किनारा करके.., शीशा टूटे गुल मच जाए.. के जरिए कव्वाल अनीस साबरी हर आयु वर्ग के श्रोताओं के दिलों की धड़कन बना।
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सिर्फ छह साल की उम्र में अपने उस्ताद मौलाना अब्दुल कारी लतीफ का कलाम मुर्शिद का रौजा सुहाना लगता है..को आवाज देकर अनीस साबरी ने अपने करियर की शुरुआत की।
सूफियाना कलाम,गीत,गजल और कव्वाली विधा के पारंगत अनीस साबरी ने मात्र 17 वर्ष की उम्र में हांगकांग में सत्संग में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए विदेशों का सफर शुरू किया।
मुरादाबाद और किराना घराने से जुड़े युवा कलाकार अनीस साबरी ने करीब 10 देशों में अपनी गायकी से देश का नाम रोशन किया। 28 वर्षीय अनीस साबरी वैजयंती माला और संगीतकार एआर रहमान के हाथों अमीर खुसरो संगीत एकेडमी के यंग आर्टिस्ट अवार्ड से वर्ष 2007 और 2008 में नवाजा जा चुका है।
साज और आवाज की दुनिया में छोटी उम्र में पहचान बनाने वाला अनीस साबरी कव्वाल अपने मुंह से जब घुंघरू की आवाज निकालता है तो सामयीन झूम उठते हैं। कीबोर्ड, हारमोनियम,तबला,ढोलक आदि साज का पारंगत अनीस साबरी आकाशवाणी नजीबाबाद से सुगम संगीत के अंतर्गत बी ग्रेड का कलाकार है।