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Meerut News: खेतों में नमी होने पर सरसों व आलू की बुवाई में बरतें सावधानी
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हस्तिनापुर। इस साल हुई औसतन से अधिक बारिश के असर से बोई जाने वाली आलू और सरसों की फसल प्रभावित होती नजर आ रही है। ऐसे में कृषि वैज्ञानिकों ने भी किसानों को सलाह दी है कि अधिक नमी में सावधानी से इन फसलों की बुवाई करें।
बरसात के मौसम में इस बार औसत से अधिक बारिश हुई है। इस कारण खादर क्षेत्र के लोगों को बाढ़ जैसे हालातों का सामना करना पड़ा। अभी भी किसानों की हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि में पानी भरा हुआ है। वहीं बड़े भू भाग में बाढ़ का पानी निकलने से अभी नमी अधिक है, जिसमें इस समय आलू और सरसों की फसल की बुवाई करने में किसानों को नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि नमी ज्यादा रहने से किसानों को खासकर आलू की बुवाई में सावधानी बरतने की जरूरत है। वहीं मौसम विभाग के अनुसार अगले चार दिनों तक बारिश के आसार हैं। इस समय बदलते मौसम ने किसानों को डराना शुरू कर दिया है। उन्हें डर है कि आलू की बुवाई में चूक की तो पछताना पड़ सकता है। खादर क्षेत्र के किसान सरदार सुंदर सिंह, हरविंदर सिंह, पंकज चौधरी आदि का कहना है कि बार-बार मौसम बिगड़ रहा है। इससे आलू की बुवाई और सरसों की बुवाई प्रभावित हो रही है। साथ ही इन फसलों में बीमारी आने की संभावना बढ़ गई है। खादर क्षेत्र में धान की फसल के बाद सरसों की सबसे अधिक बुवाई होती है। वहीं कुछ स्थानों पर किसान आलू की बुवाई भी करते हैं। वहीं बाढ़ में नष्ट हुए गन्ने और धान की फसल से खेत को खाली करने में भी किसानों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है।
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जल्दबाजी न करें किसान
मौसम को ध्यान में रखकर ही बुवाई करें। बीज का उपचार ठीक तरीके से करें। इस बार खेतों की मिट्टी में नमी ज्यादा रहेगी। बारिश का बार-बार मौसम बन रहा है। नमी के कारण आलू की फसल में जड़ गलन जैसे रोगों का खतरा ज्यादा रहता है। इसलिए पूरी जानकारी और समझदारी से ही आलू और सरसों की बुवाई करें। बीज के उपचार में कोई लापरवाही न बरतें। -डाॅ. राकेश तिवारी, प्रभारी वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्र, हस्तिनापुर
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बरसात के मौसम में इस बार औसत से अधिक बारिश हुई है। इस कारण खादर क्षेत्र के लोगों को बाढ़ जैसे हालातों का सामना करना पड़ा। अभी भी किसानों की हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि में पानी भरा हुआ है। वहीं बड़े भू भाग में बाढ़ का पानी निकलने से अभी नमी अधिक है, जिसमें इस समय आलू और सरसों की फसल की बुवाई करने में किसानों को नुकसान का सामना करना पड़ सकता है।
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विशेषज्ञों का मानना है कि नमी ज्यादा रहने से किसानों को खासकर आलू की बुवाई में सावधानी बरतने की जरूरत है। वहीं मौसम विभाग के अनुसार अगले चार दिनों तक बारिश के आसार हैं। इस समय बदलते मौसम ने किसानों को डराना शुरू कर दिया है। उन्हें डर है कि आलू की बुवाई में चूक की तो पछताना पड़ सकता है। खादर क्षेत्र के किसान सरदार सुंदर सिंह, हरविंदर सिंह, पंकज चौधरी आदि का कहना है कि बार-बार मौसम बिगड़ रहा है। इससे आलू की बुवाई और सरसों की बुवाई प्रभावित हो रही है। साथ ही इन फसलों में बीमारी आने की संभावना बढ़ गई है। खादर क्षेत्र में धान की फसल के बाद सरसों की सबसे अधिक बुवाई होती है। वहीं कुछ स्थानों पर किसान आलू की बुवाई भी करते हैं। वहीं बाढ़ में नष्ट हुए गन्ने और धान की फसल से खेत को खाली करने में भी किसानों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है।
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जल्दबाजी न करें किसान
मौसम को ध्यान में रखकर ही बुवाई करें। बीज का उपचार ठीक तरीके से करें। इस बार खेतों की मिट्टी में नमी ज्यादा रहेगी। बारिश का बार-बार मौसम बन रहा है। नमी के कारण आलू की फसल में जड़ गलन जैसे रोगों का खतरा ज्यादा रहता है। इसलिए पूरी जानकारी और समझदारी से ही आलू और सरसों की बुवाई करें। बीज के उपचार में कोई लापरवाही न बरतें। -डाॅ. राकेश तिवारी, प्रभारी वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्र, हस्तिनापुर