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भक्ति और समर्पण से ही भगवान की प्राप्ति संभव : अखिल दास
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- बाबा औघड़नाथ मंदिर में हुई श्रीमद्भागवत कथा
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। बाबा औघड़नाथ मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में कथा व्यास अखिल दास महाराज ने भगवान की कृपा, सद्गुरु की महिमा और श्रीमद्भागवत के महत्व के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत केवल सुनने मात्र का विषय नहीं है बल्कि इसे जीवन में आत्मसात करने से ही इसके वास्तविक फल की प्राप्ति होती है।
अखिल दास महाराज ने कहा कि जब मनुष्य पर भगवान की कृपा होती है तभी उसे सद्गुरु का सान्निध्य प्राप्त होता है। यह सान्निध्य जीवन में दिव्य अनुभूतियों के मार्ग को प्रशस्त करता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भगवान की प्राप्ति विश्वास, भक्ति और समर्पण के माध्यम से संभव है।
श्रीमद्भागवत सुनने से मनुष्य के जीवन में आध्यात्मिक जागृति आती है। इससे वह धर्म और सत्य के मार्ग पर अग्रसर होता है। उन्होंने श्रीमद्भागवत की रचना से जुड़े प्रसंगों का भी उल्लेख किया। इसमें वेदव्यास और भगवान गणेश की भूमिका का वर्णन शामिल था। उन्होंने भगवान शंकर, शुकदेव महाराज और महाभारत के प्रसंगों का भी स्मरण कराया। उनके कर्म सदैव न्याय और सदाचार पर आधारित रहे। कथा में महागौरी, आकाश शर्मा, अनिल त्यागी, सीमा और क्षीर सुमन सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। इस कथा के माध्यम से श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ज्ञान और प्रेरणा प्राप्त हुई।
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माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। बाबा औघड़नाथ मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में कथा व्यास अखिल दास महाराज ने भगवान की कृपा, सद्गुरु की महिमा और श्रीमद्भागवत के महत्व के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत केवल सुनने मात्र का विषय नहीं है बल्कि इसे जीवन में आत्मसात करने से ही इसके वास्तविक फल की प्राप्ति होती है।
अखिल दास महाराज ने कहा कि जब मनुष्य पर भगवान की कृपा होती है तभी उसे सद्गुरु का सान्निध्य प्राप्त होता है। यह सान्निध्य जीवन में दिव्य अनुभूतियों के मार्ग को प्रशस्त करता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भगवान की प्राप्ति विश्वास, भक्ति और समर्पण के माध्यम से संभव है।
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श्रीमद्भागवत सुनने से मनुष्य के जीवन में आध्यात्मिक जागृति आती है। इससे वह धर्म और सत्य के मार्ग पर अग्रसर होता है। उन्होंने श्रीमद्भागवत की रचना से जुड़े प्रसंगों का भी उल्लेख किया। इसमें वेदव्यास और भगवान गणेश की भूमिका का वर्णन शामिल था। उन्होंने भगवान शंकर, शुकदेव महाराज और महाभारत के प्रसंगों का भी स्मरण कराया। उनके कर्म सदैव न्याय और सदाचार पर आधारित रहे। कथा में महागौरी, आकाश शर्मा, अनिल त्यागी, सीमा और क्षीर सुमन सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। इस कथा के माध्यम से श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ज्ञान और प्रेरणा प्राप्त हुई।
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