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अटल टनल बनाने वाली कंपनी ही बनाएगी मेरठ में भूमिगत ट्रैक
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मेरठ। हिमाचल प्रदेश के रोहतांग में हाल ही में नौ किमी लंबी अटल टनल का शुभांरभ किया गया था। इस टनल को एफकांस इंफ्रास्ट्रक्चर ने तैयार किया है। अब इसी कंपनी ने मेरठ में रैपिड रेल के भूमिगत स्टेशनो के लिए सबसे कम बोली लगाई है। इस भूमिगत ट्रैक की लंबाई लगभग 5.8 किमी है। मेरठ में रैपिड रेल के तीन स्टेशन भूमिगत बनाए जाने हैं।
नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन ने रैपिड रेल निर्माण में सभी विश्वस्तरीय मानकों पर कार्य कर रही कंपनियों से करार किया है। भूमिगत स्टेशों ने कार्य को लगभग एफकांस को ही दिया जाएगा। यह प्रक्रिया अब अंतिम चरणों में पहुंच गई है। इस ट्रैक में मेरठ सेंट्रल, भैंसाली और बेगमपुल स्टेशन होंगे। हालांकि, इस भूमिगत ट्रैक के लिए चीन की शंघाई टनल इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन कंपनी ने बोली लगाई थी, लेकिन उसे तकनीकी बोली में ही बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था।
चेन्नई और कोलकाता मेट्रो ट्रैक निर्माण
इस कंपनी ने चेन्नई और कोलकाता मेट्रो ट्रैक बनाने में अहम रोल निभाया था। उसी को देखते हुए टेंडर बोली को आधार मानते हुए ऐसी कंपनियों को मेरठ में रैपिड रेल के ट्रैक बनाने की जिम्मेदारी दी जा रही है। इसके अलावा चिनाब रेलवे ब्रिज, ढाका- चिटगांव रेलवे कॉरिडोर डबलिंग, कानपुर मेट्रो का कार्य भी एफकांस के पास ही रहा।
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अभी तक ये कंपनियां कर रही रैपिड का कार्य
एलएंडटी, एपको इंफ्रा, इरकॉन इंटरनेशनल, आर्सेलर मित्तल
रैपिड रेल : मेरठ भी नजर आने लगे पिलर्स
परतापुर। रैपिड रेल के पिलर अब दुहाई के बाद भी मेरठ में भी नजर आने लगे हैं। एनसीआरटीसी की कार्यदायी संस्था एलएंडटी ने काम को रफ्तार देने के लिए दिन रात कार्य शुरू कर दिया है। पिलर्स निर्माण के साथ ही इन्हें भरने और सड़क चौड़ीकरण का काम तेजी से चल रहा है।
दिल्ली मेरठ रैपिड रेल के निर्माण के पहले चरण में 17 किमी हिस्से में साहिबाबाद से लेकर दुहाई तक कार्य चल रहा है। एनसीआरटीसी का लक्ष्य 2023 तक रैपिड को दौड़ाने का है। इसके चलते दुहाई से मेरठ के शताब्दी नगर तक पिलर्स निर्माण और भराव का कार्य किया जा रहा है। वहीं डीएन पॉलिटेक्निक के सामने नाले के ऊपर लिंटर डालने का काम किया जा रहा है।
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नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉरपोरेशन ने रैपिड रेल निर्माण में सभी विश्वस्तरीय मानकों पर कार्य कर रही कंपनियों से करार किया है। भूमिगत स्टेशों ने कार्य को लगभग एफकांस को ही दिया जाएगा। यह प्रक्रिया अब अंतिम चरणों में पहुंच गई है। इस ट्रैक में मेरठ सेंट्रल, भैंसाली और बेगमपुल स्टेशन होंगे। हालांकि, इस भूमिगत ट्रैक के लिए चीन की शंघाई टनल इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन कंपनी ने बोली लगाई थी, लेकिन उसे तकनीकी बोली में ही बाहर का रास्ता दिखा दिया गया था।
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चेन्नई और कोलकाता मेट्रो ट्रैक निर्माण
इस कंपनी ने चेन्नई और कोलकाता मेट्रो ट्रैक बनाने में अहम रोल निभाया था। उसी को देखते हुए टेंडर बोली को आधार मानते हुए ऐसी कंपनियों को मेरठ में रैपिड रेल के ट्रैक बनाने की जिम्मेदारी दी जा रही है। इसके अलावा चिनाब रेलवे ब्रिज, ढाका- चिटगांव रेलवे कॉरिडोर डबलिंग, कानपुर मेट्रो का कार्य भी एफकांस के पास ही रहा।
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अभी तक ये कंपनियां कर रही रैपिड का कार्य
एलएंडटी, एपको इंफ्रा, इरकॉन इंटरनेशनल, आर्सेलर मित्तल
रैपिड रेल : मेरठ भी नजर आने लगे पिलर्स
परतापुर। रैपिड रेल के पिलर अब दुहाई के बाद भी मेरठ में भी नजर आने लगे हैं। एनसीआरटीसी की कार्यदायी संस्था एलएंडटी ने काम को रफ्तार देने के लिए दिन रात कार्य शुरू कर दिया है। पिलर्स निर्माण के साथ ही इन्हें भरने और सड़क चौड़ीकरण का काम तेजी से चल रहा है।
दिल्ली मेरठ रैपिड रेल के निर्माण के पहले चरण में 17 किमी हिस्से में साहिबाबाद से लेकर दुहाई तक कार्य चल रहा है। एनसीआरटीसी का लक्ष्य 2023 तक रैपिड को दौड़ाने का है। इसके चलते दुहाई से मेरठ के शताब्दी नगर तक पिलर्स निर्माण और भराव का कार्य किया जा रहा है। वहीं डीएन पॉलिटेक्निक के सामने नाले के ऊपर लिंटर डालने का काम किया जा रहा है।