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Meerut News: अंतर महाविद्यालय प्रतियोगिता में अंजनी सिंह रही प्रथम
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मेरठ। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के विधि अध्ययन संस्थान में शुक्रवार को उत्तर प्रदेश राजभवन से प्रेरित नारी शक्ति वंदन सम्मेलन का आयोजन किया गया। विकसित भारत में महिलाओं की भूमिका विषय पर अंतर महाविद्यालय भाषण प्रतियोगिता का आयोजन हुआ। प्रथम पुरस्कार अंजनी सिंह को मिला।
कार्यक्रम का शुभारंभ समन्वयक डॉ. विवेक कुमार ने मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन कर किया। डॉ. विवेक कुमार ने कहा कि मां का हमारे जीवन में महत्वपूर्ण स्थान है। विकसित भारत 2047 के निर्माण में महिलाएं सिर्फ लाभार्थी नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की सारथी हैं। उन्होंने बताया कि 33 प्रतिशत आरक्षण के साथ पंचायतों में लाखों महिलाएं नीति-निर्माण में सक्रिय हैं। नारी शक्ति वंदन अधिनियम के माध्यम से संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी ऐतिहासिक रूप से बढ़ रही है, जिससे 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का सपना साकार होगा।
आशीष कौशिक ने कहा कि महिलाओं के योगदान से देश ही नहीं, हमारा विभाग भी तरक्की कर रहा है। डॉ. धनपाल ने कहा कि प्रत्येक संस्थान में महिलाएं बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं। प्राचीन काल से वर्तमान युग तक महिलाओं ने हर क्षेत्र में अपनी क्षमता साबित की है। जहां भी उन्हें अवसर मिला, उन्होंने जिम्मेदारी सफलता पूर्वक निभाई।
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प्रतियोगिता में 32 छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। निर्णायक मंडल में डॉ. विकास कुमार, आशीष कौशिक और डॉ. सुशील कुमार शर्मा शामिल रहे। प्रथम पुरस्कार अंजनी सिंह (विधि अध्ययन संस्थान), द्वितीय पुरस्कार कुश गिरि (इतिहास विभाग) और तृतीय पुरस्कार रितु शर्मा (विधि अध्ययन संस्थान) को मिला। रिषिता त्यागी और वंशिका शर्मा को सांत्वना पुरस्कार प्रदान किए गए। कार्यक्रम का संचालन डॉ. अपेक्षा चौधरी एवं डॉ. मीनाक्षी ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. सुदेशना ने दिया।
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कार्यक्रम का शुभारंभ समन्वयक डॉ. विवेक कुमार ने मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन कर किया। डॉ. विवेक कुमार ने कहा कि मां का हमारे जीवन में महत्वपूर्ण स्थान है। विकसित भारत 2047 के निर्माण में महिलाएं सिर्फ लाभार्थी नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की सारथी हैं। उन्होंने बताया कि 33 प्रतिशत आरक्षण के साथ पंचायतों में लाखों महिलाएं नीति-निर्माण में सक्रिय हैं। नारी शक्ति वंदन अधिनियम के माध्यम से संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी ऐतिहासिक रूप से बढ़ रही है, जिससे 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का सपना साकार होगा।
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आशीष कौशिक ने कहा कि महिलाओं के योगदान से देश ही नहीं, हमारा विभाग भी तरक्की कर रहा है। डॉ. धनपाल ने कहा कि प्रत्येक संस्थान में महिलाएं बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं। प्राचीन काल से वर्तमान युग तक महिलाओं ने हर क्षेत्र में अपनी क्षमता साबित की है। जहां भी उन्हें अवसर मिला, उन्होंने जिम्मेदारी सफलता पूर्वक निभाई।
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प्रतियोगिता में 32 छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। निर्णायक मंडल में डॉ. विकास कुमार, आशीष कौशिक और डॉ. सुशील कुमार शर्मा शामिल रहे। प्रथम पुरस्कार अंजनी सिंह (विधि अध्ययन संस्थान), द्वितीय पुरस्कार कुश गिरि (इतिहास विभाग) और तृतीय पुरस्कार रितु शर्मा (विधि अध्ययन संस्थान) को मिला। रिषिता त्यागी और वंशिका शर्मा को सांत्वना पुरस्कार प्रदान किए गए। कार्यक्रम का संचालन डॉ. अपेक्षा चौधरी एवं डॉ. मीनाक्षी ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. सुदेशना ने दिया।