ठंड में बढ़ रहे खर्राटे, दिल-दिमाग को ज्यादा खतरा, ये लक्षण हैं तो हो जाएं सावधान
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सोते समय खर्राटे लेना आम बात माना जाता है। बच्चे, युवा और बुजुर्ग हर वर्ग में ये समस्या सर्दी में बढ़ जाती है, लेकिन अगर ऐसा रोजाना होता है और ध्वनि तेज है तो सावधान हो जाएं। नहीं तो हार्ट और ब्रेन अटैक का खतरा बढ़ सकता है। मेरठ मेडिकल कॉलेज और जिला अस्पताल की ओपीडी में इस तरह के हर सप्ताह सौ से ज्यादा मरीज आ रहे हैं। खर्राटे 40 से 120 डेसिबल तक ध्वनि पैदा करते हैं।
महिलाओं में पुरुषों से अलग लक्षण
जिला अस्पताल के सीनियर ईएनटी सर्जन डॉ. बीपी कौशिक के अनुसार महिलाओं को सुबह उठने पर अगर सिरदर्द रहे तो समझना चाहिए कि खर्राटे की बीमारी है। महिलाओं में अलग लक्षण की वजह जेनेटिक्स और हार्मोंस है। अक्सर महिलाएं सिर दर्द होने पर माइग्रेन का इलाज कराने लगती हैं। जबकि बच्चों में यह दिक्कत नाक में एडीनॉयड ग्रंथि या पॉलिप बढ़ने से हो सकती है। मेडिकल कॉलेज के ईएनटी सर्जन डॉ. शिवम के अनुसार मौसम के संक्रमण काल में खर्राटे अधिक हो जाते हैं। मानसिक तनाव के अलावा ठंडक बढ़ने पर यह दिक्कत बढ़ती है और गर्मी में कम हो जाती है।
दिल पर बढ़ जाता है भार
मेडिकल के मेडिसिन विभाग के प्रभारी डॉ. टीवीएस आर्य के अनुसार योग, व्यायाम और प्रोटीन डाइट लेने से खर्राटे की दिक्कत कम की जा सकती है। खर्राटों का प्रभाव ब्लड प्रेशर पर पड़ता है। इससे दिल पर भार बढ़ जाता है। बहुत दिनों तक खर्राटों के आने से दिल को खतरा है।
ये लक्षण हैं तो हो जाएं सावधान
- खर्राटों की इतनी तेज आवाज जो दूसरों की नींद में खलल डाले
- खर्राटों के बीच सांस घुटने की आवाज
- झटके के साथ शरीर के अंगों का हिलना
- बेचैनी के साथ करवट बदलना
- खर्राटों का रुक-रुककर आना
- जागने के बाद सिर में भारीपन
- मुंह में सूखापन होना
- चिड़चिड़ापन और याददाश्त कमजोर होना
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इसलिए आते हैं खर्राटे
सांस लेने के दौरान हवा का बहाव गले में स्थित ऊतकों में कंपन पैदा करता है। जब गहरी नींद में सोते हैं तो मुंह, जीभ और गले की मांसपेशियों को आराम मिलता है। इस दौरान गले के ऊतक इतने ढीले हो जाते हैं कि वह आंशिक रूप से वायुमार्ग को ब्लॉक करने लगते हैं और इसकी वजह से कंपन होने लगता है। वहीं, ठंड के अलावा प्रदूषण के कण नाक, गले (श्वास नली) और फेफड़ों तक रुकावट पैदा करते हैं। नली में सूजन आ जाती है तो शरीर में ऑक्सीजन का स्तर घटता है और खर्राटे आते हैं।
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जैसी परेशानी-वैसा इलाज
डॉक्टर पहले उचित परीक्षण द्वारा कारण का निर्धारण करते हैं। अगर यह कारण नाक में मस्सा होना या नाक के परदे का तिरछा होना, टॅान्सिल, फूले हुए एडिनॉयड आदि है तो ऑपरेशन की सलाह दी जाती है। यदि व्यक्ति के मोटापे के कारण उसकी सांस की नली में सिकुड़न है तो उसे पैप थेरेपी लेने की सलाह दी जाती है। मोटापा कम करना, पर्याप्त नींद लेना और धूम्रपान कम करने से भी आराम मिलता है।
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