खींचतान के 18 घंटे: अकेले पड़े अतुल... हार नहीं मानी तो योगेश ने मारी बाजी, अखिलेश की कोठी पर रातभर जागे दोनों
Meerut News : समाजवादी पार्टी में मेरठ-हापुड़ लोकसभा सीट को लेकर करीब 18 घंटे तक खूब खींचतान चली। आखिर में अतुल प्रधान अकेले पड़ गए और योगेश वर्मा ने बाजी मार ली।
विस्तार
समाजवादी पार्टी में टिकट को लेकर खींचतान तो शुरू से ही रही, लेकिन बुधवार दोपहर दो बजे से लेकर बृहस्पतिवार सुबह आठ बजे तक (18 घंटे) सबसे ज्यादा जोर आजमाइश के रहे। आखिर में विधायक अतुल प्रधान अकेले पड़ गए। योगेश वर्मा जीत गए। योगेश लखनऊ में डेरा डाले हुए थे। बाकी दावेदारों में शहर विधायक रफीक अंसारी, राष्ट्रीय सचिव आकिल मुर्तजा का भी उन्हें साथ मिला, जबकि टिकट के लिए अतुल समर्थन नहीं जुटा सके।
बुधवार को अतुल प्रधान ने कलक्ट्रेट में नामांकन के वक्त खींचतान शुरू हुई। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, उन्हें पता चला कि लखनऊ में पूर्व विधायक योगेश वर्मा डटे हैं। वर्मा ने कागजी प्रक्रिया पूरी कर ली है, लेकिन टिकट बदले जाने और सिंबल पर राष्ट्रीय अध्यक्ष के हस्ताक्षर नहीं हुए हैं। अतुल प्रधान ने रात में लखनऊ पहुंच कर अपना पक्ष रखा। योगेश का तर्क था कि मेरठ सीट पर दलित-मुस्लिम समीकरण है, इसलिए दलित प्रत्याशी पर दांव खेला जाना चाहिए।
रात भर अखिलेश यादव की कोठी के बाहर जागते रहे अतुल-योगेश
योगेश और अतुल प्रधान बुधवार की रात से लेकर बृहस्पतिवार की सुबह तक अखिलेश यादव की कोठी के बाहर जमे रहे। रात भर जागते रहे। अखिलेश यादव सुबह साढ़े सात बजे कार्यालय पहुंचे और सिंबल पर हस्ताक्षर कर योगेश वर्मा को दिया। इस दौरान अतुल प्रधान भी वहां थे। उन्होंने कहा कि उनका टिकट न काटा जाए। लेकिन अखिलेश यादव ने उनकी बात नहीं मानी।
मायूस अतुल के इस्तीफा देने की चर्चा फैली
टिकट कटने पर अतुल प्रधान मायूस हो गए। चर्चा हुई कि अतुल ने विधायक और पार्टी से इस्तीफा देने की चेतावनी दी है। हालांकि, इन सब से अतुल ने इंकार किया। बाद में उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट डाला कि वह राष्ट्रीय अध्यक्ष और पार्टी का फैसला स्वीकार करते हैं।
गिले-शिकवे दूर किए, पर बात नहीं बनी
अतुल ने टिकट से पहले दावेदारों से मान मनोव्वल कर ली थी। उन्होंने पूर्व कैबिनेट मंत्री शाहिद मंजूर, शहर विधायक रफीक अंसारी, राष्ट्रीय सचिव आकिल मुर्तजा से पुराने गिले शिकवे मिटाने की कोशिश की। आखिर में योगेश भारी पड़ गए। वर्मा के नामांकन में रफीक अंसारी, आकिल मुर्तजा और राजपाल सिंह साथ रहे। अतुल के नामांकन में ये लोग शामिल नहीं थे। शाहिद मंजूर उमरा करने सऊदी अरब गए हुए हैं।
यह भी पढ़ें: Lok Sabha Election: पिछलों चुनावों में कैसा रहा गठबंधन का हाल? पश्चिम की सीटों के आंकड़ों पर डालें नजर
अंतर्कलह : 20 दिन में तीन टिकट
पार्टी में अंदरूनी कलह का नतीजा है कि 20 दिन में तीन टिकट बदलने पड़े। 15 मार्च को सपा ने सूची जारी कर भानु प्रताप सिंह को उम्मीदवार घोषित किया। बाहरी उम्मीदवार बता कर उनका विरोध होने लगा। एक अप्रैल को अतुल प्रधान को उम्मीदवार घोषित कर दिया। फिर भी विरोध नहीं थमा।
यह भी पढ़ें: UP: सपा ने मेरठ सीट पर अब सुनीता वर्मा को दिया मौका; अतुल प्रधान ने दी पार्टी को चेतावनी, फिर बैकफुट पर आए
टिकट को लेकर सब प्रयास करते ही हैं। राष्ट्रीय अध्यक्ष के भरोसे पर खरा उतरेंगे। सबको साथ लेकर चुनाव लड़ेंगे। - योगेश वर्मा, पूर्व विधायक हस्तिनापुर
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.