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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Meerut News ›   A long list of exploits of bribe-taking JE Brajraj has come to light; he did not leave Meerut even after his transfer.

Meerut News: रिश्वतखोर जेई ब्रजराज के कारनामों की लंबी फेहरिस्त सामने आई, ट्रांसफर के बाद भी नहीं छोड़ा मेरठ

Wed, 28 Jan 2026 02:50 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Wed, 28 Jan 2026 02:50 AM IST
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A long list of exploits of bribe-taking JE Brajraj has come to light; he did not leave Meerut even after his transfer.
सिंचाई विभाग में 2 लाख की रिश्वत लेने वाले अवर अभियंता बृजराज सिंह को देर शाम पूछताछ के बाद सिव - फोटो : बाबा मस्तनाथ विश्वविद्यालय में गणतंत्र दिवस पर सांस्कृतिक प्रस्तुति देते हुए छात्र-छात्राएं। स्रोत : विवि
मेरठ खंड गंगनहर के सब-डिवीजन पंचम (मोदीनगर) में तैनात अवर अभियंता ब्रजराज का रसूख शासन-प्रशासन में इस कदर हावी है कि भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों के बावजूद वह पिछले 10 वर्षों से मेरठ में ही डटा हुआ था। एक साल पहले ब्रजराज का तबादला बुलंदशहर हुआ था लेकिन राजनैतिक प्रभाव से उसने छह माह में ही इसे रुकवा लिया था। मंगलवार को एंटी करप्शन टीम द्वारा ठेकेदार से 2 लाख रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़े जाने के बाद ब्रजराज के कारनामों की लंबी फेहरिस्त सामने आई है।
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मूल रूप से अलीगढ़ निवासी ब्रजराज वर्ष 2016 तक ड्रेनेज खंड प्रथम मेरठ में वरिष्ठ सहायक लिपिक के पद पर तैनात था। 2016 में पदोन्नति पाकर अवर अभियंता बनने के बाद उसने मेरठ खंड गंगनहर डिवीजन में अपनी तैनाती करा ली। पिछले पांच वर्षों से वह सब-डिवीजन पंचम मोदीनगर का कार्यभार संभाल रहा है जिसमें मोदीनगर रजबहा चपभोला और रजबहा पूठ जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं।
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घटिया निर्माण और विधायक की शिकायत भी रही बेअसर

ब्रजराज का विवादों से पुराना नाता रहा है। पिछले वर्ष मोदीनगर क्षेत्र के चपभोला रजबहे पर एक निर्माणाधीन पुलिया घटिया निर्माण सामग्री के कारण भरभराकर गिर गई थी। इस मामले में स्थानीय विधायक ने भी शासन स्तर पर शिकायत दर्ज कराई थी लेकिन उच्च अधिकारियों के संरक्षण और राजनैतिक रसूख के चलते जेई के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
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स्थानांतरण आदेश भी बेअसर

सरकारी नियमानुसार तीन वर्ष में स्थानांतरण अनिवार्य है लेकिन ब्रजराज के मामले में शासन के आदेश भी बेअसर साबित हुए। डेढ़ साल पहले उसका तबादला बुलंदशहर कर दिया गया था लेकिन अपनी ऊंची पकड़ के चलते उसने वहां जॉइनिंग नहीं दी। छह महीने तक मेरठ में ही बिना किसी आधिकारिक आदेश के ड्यूटी करता रहा और अंततः राजनैतिक प्रभाव का इस्तेमाल कर अपना स्थानांतरण रुकवा लिया। चर्चा है कि उसका परिवार राजनैतिक है और वे अपनी पत्नी को चुनाव लड़ाने की तैयारी में भी जुटा था।



मुख्यालय छोड़ मेरठ में जमाता था महफिल

विभागीय नियमों के अनुसार अवर अभियंता और एसडीओ को अपने सब-डिवीजन मुख्यालय (मोदीनगर) पर रहना अनिवार्य है ताकि किसानों की समस्याओं का निस्तारण मौके पर हो सके। इसके विपरीत ब्रजराज अधिकांश समय मेरठ स्थित कैनाल कंपाउंड में ही बैठता था। कई बार शिकायतें हुईं लेकिन सिस्टम पर उसकी पकड़ इतनी मजबूत थी कि कोई असर नहीं हुआ।




3 लाख की मांग, 2 लाख लेते धराए

ताजा मामला मछरी माइनर के जीर्णोद्धार के टेंडर से जुड़ा है। मवाना रोड निवासी ठेकेदार धर्मसिंह की फर्म ने करीब 7 लाख रुपये से इस कार्य को पूरा किया था। अवर अभियंता ने 4 लाख 32 हजार रुपये तो खाते में भेज दिए लेकिन शेष भुगतान के बदले 2 लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी। ठेकेदार के बेटे अंकुर ने बताया कि जेई की प्रताड़ना से तंग आकर उन्होंने एंटी करप्शन टीम से शिकायत की। मंगलवार को जब वह कैनाल कंपाउंड में 2 लाख रुपये नकद देने पहुंचे तो जेई ने बाकी 1 लाख रुपये भी 15 दिन में देने का दबाव बनाया और धमकी दी कि पैसे न मिलने पर भविष्य में कोई टेंडर नहीं लेने दिया जाएगा। इसी दौरान टीम ने दबिश देकर उसे रंगे हाथ दबोच लिया।
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